“जब तक भारत हिंदू राष्ट्र नहीं बनता, तब तक सरकार का मंदिर चलाने का कोई काम नहीं”, प्रिंट, जुलाई 15, 2026
“अयोध्या राम मंदिर में कथित “चंदा चोरी” की खबर पर कुछ विपक्षी नेताओं और खुद को “सेक्युलर” कहने वाले टिप्पणीकारों की खुशी देखने लायक नहीं, बल्कि परेशान करने वाली है. इस चोरी के बाद कई लोगों ने यह भी कहा कि मंदिरों का संचालन सीधे सरकार को करना चाहिए. जहां कुछ लोग इस उम्मीद में खुश हैं कि इससे बीजेपी को नुकसान हो सकता है, वहीं जो लोग मानते हैं कि ऐसी चोरी रोकने के लिए सरकार की बड़ी भूमिका होनी चाहिए, वे गलत दिशा में सोच रहे हैं (जैसा कि द टाइम्स ऑफ इंडिया में सरकार के एक पूर्व सचिव ने अपने लेख में लिखा है). जब भी कहीं कोई गड़बड़ी होती है, तो सरकार को बीच में लाना सही समाधान नहीं है. यह इस मूल सोच के भी खिलाफ है कि धार्मिक मामलों में सरकार का कोई काम नहीं होना चाहिए.
यह मान लेना कि चोरी सिर्फ हिंदू मंदिरों में ही होती है, बिल्कुल गलत है. वेटिकन से लेकर भारत और दूसरे देशों की मस्जिदों और चर्चों तक, चोरी ही नहीं बल्कि कई तरह की गलत घटनाएं सामने आई हैं. इनमें पादरियों द्वारा बच्चों के पेडोफिलिया जैसे मामले भी शामिल हैं. अगर इन घटनाओं के बाद सरकारों ने गैर-हिंदू धार्मिक स्थलों का संचालन अपने हाथ में नहीं लिया, तो फिर यह कहना कि जिन मंदिरों में चोरी हुई है, वे सरकार के बिना खुद नहीं चल सकते, इसकी क्या वजह है?
जब भी कहीं कोई गड़बड़ी होती है, तो सरकार को बीच में लाना सिद्धांत के तौर पर कई वजहों से गलत है. नीचे दी गई वजहों में सबसे आखिरी वजह हिंदू नजरिए से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है……”
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