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Tuesday, September 28, 2021

रवि दहिया की नूरइस्लाम सनायेव पर जीत सनातन संयम की जीत है!

भारत की झोली में आज ओलंपिक्स में दो पदक आए। एक तो बहुप्रतीक्षित हॉकी में आया, जिसके लिए न जाने देश कब से तरस रहा था। और दूसरा पदक लाए रवि दहिया, जिन्होनें पहलवानी में आज रजत पदक जीता। यद्यपि देश स्वर्ण की आस लगाए था, परन्तु यह रजत भी अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है। परन्तु रवि दहिया की यह उपलब्धि इसलिए भी और महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि यह संस्कृति और संयम की विजय है।

दरअसल रवि दहिया का सामना सेमीफाइनल में कजाकिस्तान के नूरइस्लाम सनायेव के साथ था, और सनायेव की कहानी इस खेल को लेकर बहुत ही हैरान करने वाली है। सनायेव ने अपनी पहचान तक इस खेल के लिए छोड़ दी थी। नूरइस्लाम का जन्म रूस में तवया में हुआ था और उनका नाम अर्हस सना था। और उनका जन्म पहलवानों के परिवार में हुआ था। नूरइस्लाम का यह दुर्भाग्य है कि रूस में पहलवानी बहुत लोकप्रिय है और संख्या में बहुत अधिक पहलवान हैं।

इसलिए वह कजाकिस्तान चले गए और वहां पर जाकर अपना सब कुछ बदल लिया, नागरिकता, पहचान और धर्म भी! सना ने इस्लाम अपना लिया और अपना नाम नूरइस्लाम सनायेव कर लिया

कहा जाता है कि नूरइस्लाम में खेल को लेकर जूनून था, हाँ, हो सकता है जूनून हो, मगर खेल को लेकर आदर नहीं था। उनके भीतर जैसे वही भावना थी कि कुछ भी हो मुझे ही जीतना है। और छल से जीतूँ या किसी और से, मगर जीतना है। क्या यह खेल भावना थी? नहीं! यह दरअसल उस वर्चस्व की भावना थी, जो पूरी दुनिया पर छा जाने की होती है। क्या इस छल के लिए ही उन्होंने नागरिकता और धर्म बदला था?

रवि दहिया के साथ नूरइस्लाम का जब मुकाबला चल रहा था तो मैच के एकदम अंत के दृश्य पर किसी का ध्यान सहज नहीं गया, भारतीय बस उस जीत में मग्न हो गए थे, जो रवि उनके लिए ला रहे थे। कुश्ती में जब वह नूरइस्लाम के दोनों कंधे एक साथ जमीन पर लगाने की कोशिश कर रहे थे, उस समय नूरइस्लाम क्या कर रहे थे? क्योंकि यह दांव बहुत ही कठिन होता है और यदि ऐसा हो जाता है तो जिस खिलाड़ी के दोनों कंधे जमीन पर लग जाते हैं, वह हार जाता है।

रवि अपने दांव पर लगे थे, पर जो वीडियो आया उसने रवि के लिए आदर और बढ़ा दिया। रवि अपने संकल्प के प्रति समर्पित थे। और उन्हें हर स्थिति में भारत के लिए पदक चाहिए था, और शायद यही कारण था कि वह नूरइस्लाम के दांतों का प्रहार अपने बाजुओं पर झेलते रहे। जी हाँ, जब खेल के लिए अपने जूनून के चलते अपनी पहचान तक बदल बैठे थे, वह इस खेल को बदनाम कर रहे थे और वहीं रवि अपने सयंम से एक नई ऊंचाई तक जा रहे थे।

रवि उस भूमि का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जहाँ पर संयम वीरता का प्रतीक है। जहाँ की मिट्टी जानती है कि कब उग्र होना है और कब संयमित रहना है। वह लक्ष्य के लिए, दर्द सहना भी जानते हैं और पटखनी देना भी। वह उस धर्म का पालन करते हैं, जिसमें कृष्ण शत्रुओं को अंतिम समय तक शांति का अवसर देते हैं, जिसमें संयम और शान्ति को वीर का आभूषण बताया गया है। परन्तु साथ ही यह भी कहा गया है कि विजय के प्रति ही वीर को प्रतिबद्ध रहना चाहिए।

रवि दहिया के साथ किया गया नूरइस्लाम का यह व्यवहार खेल प्रेमियों को आहत कर गया। और वीरेंद्र सहवाग ने इस पर ट्वीट किया कि कजाख लूजर नूरइस्लाम सनायेव ने बहुत प्रयास किया, पर रवि की स्प्रिट को नहीं तोड़ पाए!

गजब रवि, बहुत सीना चौड़ा किया आपने!

वहीं आज की जीत के बाद पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी वेंकटेश प्रसाद ने रवि दहिया की वह तस्वीरें ट्वीट की जो रवि की इस शक्ति का स्रोत हैं:

वेंकटेश प्रसाद ने उनकी केदारनाथ मंदिर के सामने की तस्वीर ट्वीट की, और लिखा कि महादेव आपको हमेशा शक्ति देते रहें। रवि कुमार दहिया का नाम हमेशा ही स्मृतियों में रहेगा

हर हर महादेव

हालांकि यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने यह कहा कि सनायेव द्वारा दहिया को काटा जाना गलत है, मगर वह जानबूझकर नहीं किया गया था। पर जानबूझकर किया गया हो या जानते बूझते, यह तो निश्चित है कि रवि का संयम जीता और नूरइस्लाम सनायेव द्वारा अपने उस खेल के साथ किया गया छल हारा जिसके लिए उन्होनें अपनी पहचान को पूरा बदल लिया था!


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