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Monday, September 20, 2021

मुस्लिम तुष्टिकरण : तेलंगाना में वक़्फ़ समितियों को मिल सकते हैं न्यायिक अधिकार !

तेलंगाना सरकार ने एक अभूतपूर्व निर्णय लिया है, जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं | राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कोप्पुला ईश्वर ने तेलंगाना विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरानऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन या एआईएमआईएम के सदस्य अकबरुद्दीन ओवैसी द्वारा उठाए गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए घोषणा की कि वक्फ समितियों को न्यायिक शक्तियां देने पर सरकार विचार कर रही है

तेलंगाना टुडे ने अनुसार मंत्री ने  कहा, “तेलंगाना सरकार राज्य भर में फैली मूल्यवान वक्फ संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है |” साथ ही उन्होंने कहा, “शीघ्र ही सरकार वक्फ समितियों की भूमि के दूसरे सर्वेक्षण के विवरण के राजपत्र अधिसूचना में विलम्ब  के संबंध में सभी संबंधित व्यक्तियों के साथ बैठक बुलाएगी।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बैठक के बाद वक्फ समितियों को न्यायिक शक्तियाँ देने के विषय पर भी मुख्यमंत्री द्वारा विचार किया जाएगा।

मंत्री के अनुसार सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान कई आपत्तियों के कारण राजपत्र में प्रकाशन में विलम्ब हुआ। आईआईटी रुड़की की सहायता से सीमांकन प्रक्रिया को डिजिटल बनाने और वक्फ बोर्ड से संबंधित सभी संपत्तियों को जियोटैग करने के लिए का कार्य किया गया ।

यह समाचार ऐसे समय आया है जब न्यायपालिका और केंद्र सरकार मुस्लिम समाज को मध्यकालीन शरिया कानून के शिकंजे से मुक्त करने का प्रयास कर रहे हैं । ट्रिपल तालक और निकाह हलाला के विषय में उनके निर्णयों और कार्यों को इसी दृष्टि से देखा जाता है ।

इस सन्दर्भ में  विचार विमर्श का विषय व्यक्तिगत कानूनों को समाप्त करना और एक संवैधानिक रूप से अनुशंसित समान नागरिक संहिता( यूनिफॉर्म सिविल कोड) के कार्यान्वयन के बारे में होना चाहिए, न कि शरिया कानून की वापसी|  परंतु तेलंगाना सरकार मध्ययुगीन समय की ओर कदम उठाने की कोशिश कर रही है ताकि इस्लामवादी एआईएमआईएम का समर्थन  मिले।

इस कदम से अन्य राज्यों के इस्लामवादियों को भी अपने-अपने राज्यों में ऐसे कानूनों  की माँग करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इसमें कोई संदेह नहीं है कि सभी दलों  के तथाकथित धर्मनिरपेक्षतावादी भी इस तरह के निर्णय का समर्थन करेंगे,जिससे कट्टर मुल्लाओं द्वारा  विधिरहित न्यायालय चलाये जायेंगे । केंद्र सरकार को राज्य सरकार को यह कानून बनाने से रोकने की सलाह देनी चाहिए और यदि आवश्यक हो तो राज्यपाल की शक्तियों का उपयोग करते हुए इस प्रयास पर विराम लगाना चाहिए ।

(प्रमोद सिंह भक्त द्वारा इस अंग्रेजी लेख का हिंदी अनुवाद)


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