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Monday, November 28, 2022

तालिबान ने अब जजों से कहा कि इस्लामी क़ानून को पूरी तरह से लागू किया जाए

जब से तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता सम्हाली है, उसके बाद से ही कट्टरता का दौर चालू हो गया था। इतने दिनों के बाद अब एक बार फिर से ऐसा समाचार आया है, जो कट्टरता में एक और कड़ी है। तालिबान के नेता हेबतुल्ला ने जजों को यह आदेश दिया है कि कई अपराधों में जैसे डकैती, अपहरण एवं यौन शोषण के लिए इस्लामिक शरिया क़ानून के अनुसार ही दंड दिया जाएगा।

यह निर्देश आते ही लोगों के दिल में एक बार फिर से उन्हीं दिनों की यादें ताजा हो गयी हैं जब 90 के दशक में तालिबान ऐसा दंड देते थे।

पिछले वर्ष जब तालिबान ने सत्ता सम्हाली थी, तब ऐसा कहा गया था कि वह उदारवादी दृष्टिकोण अपनाएंगे और यह कहा गया था कि वह महिलाओं के लिए उदार दृष्टि अपनाएँगे और वह पहले वाले तालिबान नहीं हैं। मगर अब वह फिर से उसी तरीके से सामने आ गए हैं।

मीडिया के अनुसार तालिबान के प्रवक्ता ज़बिहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि हेबतुल्ला से जजों के साथ मीटिंग के बाद निर्देश दिए हैं।

उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि

न्यायाधीशों की बैठक में अलीकदर अमीरुल मोमिनीन ने कहा कि चोरों, अपहरणकर्ताओं और देशद्रोहियों के मामलों की जांच करें। इन सभी मामलों की जांच शरिया के अनुसार हो और आपको शरिया के अनुसार ही सीमाएं तय करनी है,  क्योंकि यह शरीयत और मेरा आदेश है और यह कार्य करना अनिवार्य है

यह बहुत ही हैरान करने वाला मामला इसलिए है क्योंकि जब तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्ज़ा किया था, उसके बाद से ही भारत का लिबरल वर्ग इस बात को लेकर प्रसन्नता व्यक्त कर रहा था कि अमेरिका गया और मूल लोग सत्ता में आए!

भारत का मीडिया जैसे खुशी से पागल हो गया था और अफगानिस्तान में तालिबान को सबसे उदार शासक बताने की जिसे होड़ लग गयी थी, जब उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस की थी। मगर उसके बाद जिस प्रकार से लड़कियों एवं कलाकारों तथा उदार आवाजों के साथ अत्याचार हुए, उनके विषय में चुप्पी छा गयी। जैसे जैसे समय बढ़ता गया, महिलाओं और मुट्ठी भर सिखों एवं उंगली पर गिने जाने वाले हिन्दुओं के साथ अत्याचार बढ़ते गए।

गुरुद्वारे में विस्फोट हुए, मगर भारत में लोग शांत रहे! जो लॉबी इस बात पर प्रसन्न थी कि कम से कम तालिबान प्रेस कांफ्रेंस तो कर रहे हैं, वह लॉबी इस विषय में एकदम मौन थी कि आखिर तालिबान अपने ही नागरिकों के साथ क्या कर रहा है?

अब फिर से वहां पर महिलाओं को कोड़े से मारने की सजा चालू हो गयी हैं, एक वीडियो तेजी से ट्विटर पर वायरल है, जिसमें एक महिला को कोड़ों से मारा जा रहा है:

एक और वीडियो शबनम नासिमी ने साझा किया है जिसमें एक महिला को सड़क पर मारते हुए दिखाया जा रहा है

शबनम नासिमी ने एक और वीडियो साझा किया है। वह वीडियो भारत में बैठी उन सभी औरतों को जरूर देखना चाहिए जो तालिबानियों का समर्थन केवल इसलिए कर रही थीं और कर रही हैं क्योंकि वह उनके हिसाब से नरेंद्र मोदी को और हिन्दुओं को पराजित कर सकते हैं।

वह नरेंद्र मोदी और भाजपा का विरोध करने के लिए इस हद तक नीचे चली गयी हैं कि अब वह उस तालिबान का भी विरोध नहीं कर रही हैं जो छोटी छोटी बच्चियों को स्कूल तक नहीं जाने दे रहा है। लगभग पांच सौ दिन हो गए हैं और बच्चियों के लिए स्कूल नहीं खुल पाया है। और इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे तालिबानी लड़कियों के खाली स्कूल में खेल रहे हैं, हंस रहे हैं!

उन्होंने एक महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली जैनब राहिमी का भी वीडियो साझा किया जिन्हें तालिबान ने 5 नवम्बर के लगभग अगवा कर लिया था।

वैश्विक बहनापे का राग गाने वाली और युक्रेन के राष्ट्रपति तक का समचार रखने वाली इन मुद्दों पर मौन हैं

भारत की हिन्दी पट्टी की फेमिनिस्ट जो इतनी मुखर और जागरूक हैं कि उन्हें युक्रेन के राष्ट्रपति एवं पाकिस्तान के भूतपूर्व प्रधानमंत्री का समर्थन करते हुए देखा जा सकता है, वह खुलकर अपने उन वैश्विक नेताओं के साथ खड़ी होती हैं, जो उनके वामपंथी एजेंडे के साथ होते हैं। वह ऋषि सुनक का विरोध करती हैं, वह एलन मस्क के विरोध में आ जाती हैं, मगर वह लोग अफगानिस्तान में अपनी बिरादरी के साथ हो रहे अत्याचारों पर एकदम मौन हैं!

और जब तालिबान ने जजों के साथ मिलकर शरिया के अनुसार मामले हल करने के लिए कहा है तो आम लोगों में डर तो है ही, परन्तु भारत की वह पूरी की पूरी लॉबी एकदम शांत है, जो तालिबान के सत्ता सम्हालते समय यह कह रही थी कि “वह नए विचारों वाले हो सकते हैं!”

यहाँ तक कि यह लॉबी उस समय भी चुप रही थी जब एंकर्स के लिए बुर्का अनिवार्य कर दिया था!

चुनिन्दा चुप्पियों का दौर है साहब,

यहाँ प्रोग्रेसिव ही सबसे अधिक पिछड़े होते हैं!

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