“यात्रा गोरक्षा के लिए, बातें मुलायम-अखिलेश-मुस्लिम की, मंच पर शिवपाल-डिंपल यादव: क्या सपा की चुनावी चाल में फँस गए हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?”, ऑपइंडिया, जून 08, 2026
“सनातन धर्म में संतों का स्थान हमेशा से राजनीति और सत्ता के गलियारों से ऊपर माना गया है। संत का धर्म होता है सत्य की रक्षा, निष्पक्षता और समाज को सही राह दिखाना। लेकिन बीते कुछ दिनों में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की राजनीतिक बयानबाजी और समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रति उनका झुकाव एक नए विवाद को जन्म दे रहा है।
राजनीतिक गलियारों और सनातन प्रेमियों के बीच आज यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सपा की सोची-समझी राजनीतिक चाल को समझ नहीं पा रहे हैं या फिर इसके पीछे कोई और कहानी है? वह रह-रहकर सपा की तारीफ करते हैं, कभी इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रति नरम रुख अपनाते हैं, तो कभी देश में जातियों की राजनीति की बात करने लगते हैं।
अभी इटावा और सैफई में यादव परिवार के साथ मंच साझा करते हुए उन्होंने जो बयान दिए, उसने करोड़ों सनातनी भक्तों को हैरान कर दिया है…….”
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