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Thursday, September 29, 2022

केरल में एक कॉलेज में एसएफआई ने राष्ट्रवाद को गाली देकर और यौन मुक्ति के साथ किया नए छात्रों का स्वागत

केरल में श्री केरल वर्मा कॉलेज में फिर से एसएफआई ने न केवल राष्ट्र विरोधी बल्कि साथ ही अश्लील पोस्टर लगाए, हालांकि उन सभी पोस्टर्स में उनकी वही यौन कुंठा झलक रही थी, जो पूरे वामपंथी साहित्य का अंग है। पहले उन पोस्टर्स पर नजर डालते हैं, जो केरल के उस कॉलेज में स्वागत का हिस्सा बने हैं, जो कोचीन देवस्वाम बोर्ड द्वारा संचालित होता है। कोचीन देवस्वाम बोर्ड में अधिकांश धन हिन्दुओं द्वारा दिया गया दान ही होता है।

https://www.facebook.com/sfikeralavarmacollege/posts/2006767519502596

अब आते हैं, पोस्टर्स पर। लाल रंग में रंगे हुए यह पोस्टर्स वास्तव में उन मूल्यों के रक्त का रंग है, जिन पर भारत या राष्ट्र का निर्माण हुआ है। एक पोस्टर में एक सैनिक और एक लड़की को चुम्बन लेते हुए दिखाया है और लिखा है “फक योर नेशनलिज्म, वी आर आल अर्थलिंग्स” अर्थात भाड़ में जाए तुम्हारा राष्ट्रवाद, हम सभी एक ही धरती के निवासी हैं!” अब यह पोस्टर बहुत रोचक है, इसमें एसएफआई की यौन कुंठा तो झाँक रही है, पर वह यह नहीं बता रहे कि यह सैनिक किस देश का है और लड़की किस देश और धर्म की है! सारा पेंच यही पर हैं!

अर्थात राष्ट्रवाद को मार डालें और लडकियां सारी उन सैनिकों की यौन संगिनी बन जाएं, जो उनके देश पर हमला कर सकते हैं। क्या सारे धरती के निवासी इसी यौन कुंठा में निवास करते हैं?

उसके बाद एक नग्न तस्वीर है और इसमें सारी यौन कुंठा झाँक रही है। इस नग्न तस्वीर में लिखा है कि इस ग्रह को यौन मुक्ति की आवश्यकता है!” एसएफआई अर्थात स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया, जो सीपीएम की छात्र इकाई है, उसने यौन अराजकता का पोस्टर जारी किया है। वह ऐसी यौन अराजकता क्यों चाहते हैं? जहां भारतीय मूल्यों में काम को पवित्र रूप में प्रस्तुत किया गया है, और कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं, तो ऐसे में वामपंथ विद्यार्थी जीवन से ही यौन अराजकता क्यों चाहता है? हिन्दू धर्म में शिक्षा ग्रहण करने तक ब्रह्मचर्य का पालन करना सिखाया जाता है, जिससे विद्यार्थी अध्ययन कर सकें, एवं यौन सम्बन्धों को समझने योग्य हो सकें, मानसिक और शारीरिक दोनों ही रूप में वह ऐसे सम्बन्धों की वास्तविकता एवं गंभीरता समझ सकें।

परन्तु कुंठित वाम विद्यार्थी जीवन से विद्यार्थियों को कुंठित कर देना चाहता है और यौन का एक बेहद विकृत रूप प्रस्तुत करना चाहता है।

ऐसी एक नहीं कई तस्वीरें हैं। परन्तु एक बहुत ही रोचक तस्वीर है जिसमें कांग्रेस को “Cong-rss” करके लिखा हुआ है। जैसे कांग्रेस और आरएसएस एक हैं और कांग्रेस आरएसएस के समर्थन बिना कुछ भी नहीं है। यह बेहद बचकाना कार्टून है क्योंकि कांग्रेस आरएसएस है या नहीं, परन्तु यह सच है कि केरल को छोड़कर वामपंथ जरूर कांग्रेस की ही बी, या कहें सी या फिर और स्पष्ट कहें तो सहायक टीम है। वामपंथ, आज जब पूरे विश्व में वामपन्थ की वास्तविकता लोग समझ गए हैं तो उसी समय भारत में वह कांग्रेस का फिर अन्य छोटे दलों का पिछलग्गू बना हुआ है। कांग्रेस के साथ के साथ वह अकादमिक ही नहीं बल्कि सत्ता में भी साथ रहा है!

वह मुख्यतया उन दलों के साथ जाता है, जो हिन्दू हितों पर बात न करते हुए, मुस्लिम तुष्टिकरण की बात करते हैं।

वामपंथी संगठन है और उसमें इस्लाम का महिमामंडन न हो, ऐसा हो नहीं सकता। एक पोस्टर में तालिबानियों के कुकृत्यों का समर्थन है और साथ ही फिलिस्तीन के पत्थरबाज को भी दिखाया गया है।

और जब यौन कुंठा के हर रूप हैं, तो समलैंगिक यौन सम्बन्ध नहीं होंगे, यह तो हो नहीं सकता। दो लड़कियों के बीच यौन सम्बन्ध दिखाए गए हैं और हाँ, ब्लैक लाइव्स मैटर भी है। हालांकि एक भी पोस्टर बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ हुई हिंसा के लिए एक भी पोस्टर नहीं है। अफगानिस्तान में सिखों के साथ जो हुआ, उसके विरोध में एक भी पोस्टर नहीं है। होगा भी कैसे क्योंकि तालिबान के कुकृत्यों को वह कुकृत्य मानते ही नहीं हैं।

अभी हाल ही में तालिबान ने महिला खिलाड़ियों पर कहर बरपा रखा है, पर एसएफआई ने ब्लैक लाइव्स मैटर तो दिखाया है, परन्तु अफगानिस्तान की महिलाओं लाशें नहीं हैं। एसएफआई का इतिहास वैसे भी भारत विरोधी रहा है, परन्तु नए छात्रों के स्वागत को लेकर किए गए इस पोस्टर प्रदर्शन ने उन्हें बिलकुल ही अनावृत कर दिया है, कि वह जड़ों से कितना टूटे और कटे हुए हैं। जिस कांग्रेस के समर्थन से अकादमिक जगत पर कब्जा जमाए रहे, उसी कांग्रेस को आरएसएस के साथ जोड़ दिया। ऐसा प्रतीत हटा है जैसे एसएफआई में केवल अब कट्टर इस्लामियों का ही वर्चस्व हो गया है, तभी फिलिस्तीन है, तालिबान है, परन्तु बांग्लादेशी हिन्दू नहीं हैं।

सबसे दुखद यही है कि कोचीन देवस्वाम बोर्ड द्वारा संचालित होने वाले कॉलेज में इस प्रकार हिन्दू विरोधी और राष्ट्रविरोधी पोस्टर एक ऐसे संगठन द्वारा लगाए गए हैं, जो छात्रों का संगठन है।

एसएफआई के पोस्टर्स की फोटो अब वायरल हो रही हैं, और नेट पर लोग आलोचना तो कर रहे हैं, और वामपंथियों की यौन कुंठा पर प्रश्न उठा रहे हैं और साथ ही नग्न पेंटिंग्स की आलोचना कर रहे हैं।

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