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Friday, December 2, 2022

‘पंजाब दे पादरी’ – सिखों और पंजाबी समाज को भारत से अलग करने का एक कुत्सित और जघन्य षड्यंत्र

पंजाब ऐतिहासिक रूप से अपने भोजन, संगीत, नृत्य, गतिशील लोगों, हरित क्रांति और सबसे बढ़कर, सिख धर्म के लिए जाना जाता रहा है। सिख धर्म सनातन का ही एक भाग रहा है, और यही कारण रहा है कि सिख धर्म को सनातन से दूर करने के षड्यंत्र पिछले कई दशकों से लगातार चल रहे हैं। यह देखा गया है कि कैसे कभी भाषा के नाम पर, कभी खालिस्तान के नाम पर, कभी बेअदबी के नाम पर, कभी भिंडरावाले का उपयोग कर पाकिस्तान ने पंजाबी समाज को भारत से काटने का प्रयास किया है। आज भी खालिस्तान के नाम पर विदेश में रहने वाले असामाजिक और आतंकवादी तत्व पंजाब और सिखों को अलग करने का प्रयास कर रहे हैं।

लेकिन आज बात करेंगे एक और सामाजिक षड्यंत्र की, जो चुपचाप कई वर्षों से पंजाब में चल रहा है । इंडिया टुडे ने अपने इस बार के अंक में विशेष रूप से यह बताया है कि कैसे यह षड्यंत्र धार्मिक हलकों में खलबली पैदा कर रहा है। अब पंजाब ईसाई धर्म को तेजी से बढ़ाने वाली मिशनरियों की एक प्रयोगशाला बन गया है। पंजाब के कस्बों और गांवों में ईसाई धर्मांतरण एक ज्वार की लहर की तरह बढ़ रहा है, और आश्चर्य की बात है कि ना ही समाज और ना ही सरकार इसे रोकने के लिए कोई प्रयास करती दिख रही है।

पादरी, जो धर्मांतरण से बदल रहे हैं पंजाब का जनसांख्यिक संतुलन

पंजाब के इन पादरियों के नाम हैं: अंकुर यूसुफ़ नरूला, बाजिंदर सिंह, अमृत संधू, कंचन मित्तल, रमन हंस, गुरनाम सिंह खेड़ा, हरजीत सिंह, सुखपाल राणा, और फारिस मसीह। इनके अनुयाइयों की बड़ी संख्या है, पंजाब में इन लोगों ने अपने धर्मांतरण केंद्रों का एक बड़ा तंत्र बना लिया है, वहीं सोशल मीडिया पर इनके करोड़ों अनुयायी हैं।

यह सभी पादरी चमत्कारी इलाज करने का दावा करते हैं। इन सभी का व्यक्तित्व आकर्षक है, और यह जवान पुरुष और महिलाओं का उपयोग सञ्चालन के लिए करते हैं, जो युवाओं को साथ जोड़ने में इनकी सहायता करता है। यह सभी पादरी ईसाई बन चुके हैं, लेकिन इन्होने अपने हिंदू या सिख नामों को नहीं बदला है । यह अपने धार्मिक चिन्हों जैसे पगड़ी आदि का उपयोग करते हैं, जो लोगो को भ्रमित करने का ही एक उपक्रम है।

अंकुर नरूला के मिशनरी मंत्रालय ने जकड लिया है पंजाब को

इस षड्यंत्र में कुछ पादरियों की मुख्य भूमिका है। इनमें सबसे बड़े अपराधी हैं अंकुर यूसुफ़ नरूला, जो जालंधर में फ़र्श टाइल्स और संगमरमर का व्यापार करने वाले एक हिंदू खत्री परिवार में जन्मे थे। नरूला ने 2008 में ईसाई धर्म अपना लिया और तीन सदस्यों के साथ अपना मिशनरी का मंत्रालय शुरू किया, जिसका एकमात्र उद्देश्य था सिखों और हिन्दुओं को ईसाई बनाना।

नरूला का ‘चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स’ दुनिया भर में लगभग 300,000 सदस्य होने का दावा करता है। मुख्य चर्च के अतिरिक्त जालंधर के खंब्रा गांव में 65 एकड़ में फैले ‘अंकुर नरूला मिनिस्ट्री’ की अमेरिका, कनाडा, जर्मनी में कई शाखाएं हैं । इनमे से एक हैरो, ग्रेटर लंदन में और दूसरी बर्मिंघम में है, जिसका उद्घाटन अभी अक्टूबर में किया गया है।

अंकुर नरूला भोले भाले लोगों को भ्रमित करने के लिए घोषणा करते हैं, “हर बीमार रोगी को यीशु के नाम से चंगा किया जाए, और वह अशुद्ध आत्माओं को यीशु मसीह के शक्तिशाली नाम से बाहर निकालने की आज्ञा देता है?” इस घोषणा का सीधा सा अर्थ है कि वह हिन्दुओं और सिखों को यह दर्शाता है कि उनके भीतर अशुद्ध आत्मा हैं, जिसे यीशु का नाम ले कर शुद्ध किया जायेगा।

अंकुर नरूला चलने फिरने की अक्षमता, वर्षों पुराने बवासीर, हड्डी रोग, टॉन्सिल, अवसाद, बांझपन और अन्य बीमारियों को ठीक करने का दावा करता है। पादरी अंकुर यूसुफ नरूला के पास चिकित्सा विज्ञान की कोई डिग्री नहीं है, लेकिन फिर भी वह यह फर्जी दावे कर लोगो को मूर्ख बनता है। भीड़ में अपने ही लोगों को बैठाया जाता है, जो अजीबो गरीब हरकतें करते हैं । जैसे ही अंकुर नरूला उन्हें छूता है वह एकदम से ठीक हो जाते हैं । ऐसे ही प्रपंच कर अंकुर नरूला अबोध हिन्दुओं और सिखों को अपने जाल में फंसाता है।

पादरी बाजिंदर सिंह के चर्च ऑफ़ ग्लोरी एंड विजडम ने पंजाब में फैलाया धर्मांतरण का जाल

लगभग 35 वर्षीय और जींस-ब्लेज़र पहने हुए बाजिंदर सिंह एक कॉर्पोरेट कार्यकारी की तरह दिखते हैं, लेकिन वह एक पादरी हैं जिनका एक ही काम है, कथित “बुरी आत्मा” को दूर करना। अपने कर्मचारियों द्वारा बुलाये गए सैकड़ों लोगों के सामने मंच पर वह कहते हैं “क्या तुम्हें विश्वास है कि तुम यहाँ चंगे हो जाओगे? क्या आप मानते हैं?”

तभी वह पहले से ही उपस्थित व्हीलचेयर पर बैठे महिला या पुरुष के सामने कोई मन्त्र पढ़ते हैं और कहते हैं “अपने हाथ उठाओ और पवित्र आत्मा को काम करने दो”। वह पीड़ित व्यक्ति की ओर देखते हुए चिल्लाते हैं, “यीशु, उसे छू लो, उठ जाओ, यीशु कृपा करो”।

तभी एकाएक वह पीड़ित व्यक्ति व्हीलचेयर से खड़ा हो जाता है। तभी बाजिंदर जोर जोर से हाललुजाह बोलने लगता है, सामने उपस्थित भीड़ भी उत्साहपूर्ण हाललुजाह का उद्घोष करती है। और तभी मंच पर उपस्थित बैंड और गायक एक उत्साहित भक्ति गीत ‘मेरा यशु यशु’ गाने लगते हैं।

पादरी बाजिंदर को उनके अनुसरणकर्ता ईश्वर का वाहक मानते हैं। बाजिंदर दावा करते हैं कि वह हरसंभव बीमारी और विकलांगता को ठीक कर सकते हैं, भूतों को भगा सकते हैं और यहां तक ​​कि मृतकों को भी जीवित कर सकते हैं। उनके अनुसार, उनका दैवीय प्रभाव लोगों को वीजा प्राप्त करने, नौकरी पाने, जीवनसाथी खोजने, बच्चा पैदा करने, एक बेहतर राजनीतिक पद पाने में सहायता कर सकता है। इन्ही प्रपंचों का दुरूपयोग करके बाजिंदर हजारों हिन्दू और सिखों का धर्मांतरण कर चुके हैं।

हिन्दुओं और सिखों को भ्रमित कर बनाया जा रहा है ईसाई

नरूला और उस जैसे अन्य पादरियों ने पंजाब के विभिन्न प्रकार के पेशेवरों को अपने साथ जोड़ लिया है। हजारों डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, पुलिस, नौकरशाह, व्यवसायी और जमींदार, इन पादरियों से जुड़े हुए हैं, यह लोग अपने काम धंधे छोड़ कर चर्च जाते हैं और अबोध हिन्दुओं और सिखों का धर्मांतरण करवाने में सहयोग देते हैं। इन पादरियों और मिशनरी माफिया ने इन पेशेवर पंजाबियों के अतिरिक्त सोशल मीडिया अनुसरणकर्ताओं और कई सामाजिक हस्तियों का दुरूपयोग कर छद्म ‘चमत्कारों की शक्ति’ और ‘विश्वास उपचार’ को आम पंजाबियों के बीच लोकप्रिय कर दिया है, जो धर्मांतरण के लिए एक बहुत बड़ा कारक है।

अगर 2011 की जनगणना के आंकड़ों को देखें तो पाएंगे कि पंजाब में ईसाइयों की कुल संख्या 3,48,000 थी, लेकिन अब यह संख्या बड़ी ही तेजी से बढ़ रही है। आज हर गाँव, कस्बे, और नगर में मिशनरी माफिया और पादरी धर्मांतरण के कार्यक्रम खुलेआम चलाने लगे हैं। आपको हजारों सिख इनके आयोजनों में दिखेंगे, जो पगड़ी पहने रहते हैं, महिलाएं पंजाबी वेशभूषा में रहती हैं, जिसका एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ता है। यह पादरी इन लोगों को भूत भगाने, कैंसर से लड़ने, हर प्रकार की बीमारी, बांझपन ठीक करने, और और यहाँ तक कि वीसा दिलवाने के नाम पर इन हजारों लोगों को भ्रमित कर ईसाई बनाने का उपक्रम चल रहा है।

धर्मांतरण की तीव्र गति ने अकाल तख़्त को किया विचलित

पंजाब में ईसाई मिशनरी माफिया द्वारा सिखों के धर्मांतरण की गति इतने तीव्र हो चुकी है कि इससे अकाल तख़्त भी विचलित हो गया है। पिछले ही दिनों अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को सामने आकर धर्मांतरण विरोधी कानून की माँग करनी पड़ी थी । उन्होंने कहा था कि ईसाई मिशनरियाँ चमत्कारिक इलाज और कपट से सिखों का जबरन धर्म परिवर्तन करा रही हैं।

पंजाब के सिखों और हिंदुओं को भ्रमित कर उन्हें धर्मांतरण करने को विवश किया जा रहा है । वहीं राजनीतिक दल अपने वोट बैंक सुरक्षित रखने के लिए किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं कर रहे हैं । पंजाब चूंकि एक सीमावर्ती राज्य है, ऐसे में यहां अवैध धर्मांतरण करने से जनसांख्यिकी बदलाव आ रहे हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकता है।

पंजाब चला दक्षिण के राज्यों के रास्ते पर

अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पंजाब के 12,000 गाँवों में से 8,000 गाँवों में ईसाई धर्म की समितियाँ बन चुकी हैं। वहीं अमृतसर और गुरदासपुर जिलों में 4 ईसाई समुदायों के 600-700 चर्च बनाये जा चुके हैं। इनमें से 60-70% चर्च तो पिछले 5 वर्षों में ही अस्तित्व में आए हैं। आश्चर्य की बात है कि यह आकड़ें सरकारी नहीं हैं, यह आकड़ें यूनाइटेड क्रिश्चियन फ्रंट के हैं, और सत्य इससे कहीं ज्यादा चौकाने वाला हो सकता है।

यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि पंजाब आज दक्षिण के राज्यों की राह पर चल पड़ा है। यह लगभग वही परिस्थिति है जो तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और केरल ने 1980 और 1990 के दशक में देखी थी, जब वहां भी मिशनरियों ने अपने तंत्र फैलाने आरम्भ कर दिए थे। उसका दुष्प्रभाव यह हुआ कि आज इन तीनों प्रदेशों में बड़े स्तर पर जनसांख्यिक परिवर्तन आ चुका है।

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