“भारत-मोदी पर उठाए सवाल, ईरान-खामेनेई के लिए दिखाया प्यार…: प्रोपेगेंडा के ‘प्राइम मास्टर’ बने रवीश कुमार, 5 दिन में 6 Video डालकर जानिए क्या नैरेटिव बनाया”, ऑपइंडिया, मार्च 05, 2026
“आजकल डिजिटल मीडिया के दौर में पत्रकारिता के मायने बदल गए हैं, लेकिन कुछ पत्रकारों के लिए यह केवल अपना ‘एजेंडा’ सेट करने का जरिया बन गया है। प्रोपेगेंडाई पत्रकार रवीश कुमार के हालिया वीडियोज को देखकर ऐसा लगता है कि उनकी निष्पक्षता की परिभाषा अब केवल ‘एकतरफा विरोध’ तक सिमट गई है। बीते 5 दिनों में रवीश कुमार ने अपने यूट्यूब चैनल पर ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष को लेकर 6 वीडियो पोस्ट किए हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि जैसे-जैसे दिन बीते, उनकी पत्रकारिता से ‘तथ्य’ गायब होते गए और ‘ईरान के प्रति संवेदना’ बढ़ती गई। इन वीडियोज के जरिए रवीश ने न केवल अमेरिका और इजरायल को विलेन साबित करने की कोशिश की, बल्कि ईरान के कट्टरपंथी शासन का कुछ इस तरह महिमामंडन किया जैसे वे किसी शांतिदूत के पक्ष में खड़े हों।
हमले की आड़ में अमेरिका-इजरायल को घेरने की कोशिश
रवीश कुमार की पहली वीडियो 28 फरवरी को अपलोड की गई थी, जिसका शीर्षक है- ‘अमेरिका-इजरायल का ईरान पर हमला, क्या इस बार बच पाएगा ईरान?’ वीडियो के थंबनेल में उन्होंने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के साथ बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर लगाई है। थंबनेल का टेक्स्ट ‘ईरान पर हमला’ पाठकों को यह संदेश देने की कोशिश करता है कि ईरान एक पीड़ित मुल्क है जिस पर दो ताकतवर देश मिलकर अत्याचार कर रहे हैं। लेकिन टाइटल में ही ‘क्या इस बार बच पाएगा ईरान’ लिखकर रवीश कुमार ने दर्शकों के मन में ईरान के प्रति एक ‘बेचारा’ वाली छवि गढ़ने की कोशिश शुरू कर दी……”
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