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Friday, October 22, 2021

स्वरा भास्कर के गृह प्रवेश के बाद अब मंगलसूत्र के कारण प्रियंका चोपड़ा आईं फेमिनिस्ट और वामपंथियों के निशाने पर!

छोटी छोटी बातों पर हिन्दुओं को कोसने वाले सेलेब्रिटीज को कभी कभी असहिष्णुता की खुराक अपने ही वह लोग दे देते हैं, जिनके लिए वह कभी आदर्श होते हैं। स्वरा भास्कर और नसीरुद्दीन शाह का सर्टिफिकेट कैंसल करने के बाद अब बारी थी प्रियंका चोपड़ा का लाइसेंस कैंसल करने की।

जहाँ नसीरुद्दीन शाह का मामला पूरी तरह से मजहबी था तो वहीं स्वरा भास्कर और प्रियंका चोपड़ा का अपने उस धर्म के विषय में कुछ कदम उठा लेना, जिसमें उन्होंने जन्म लिया है। स्वरा भास्कर क्रांतिकारी होकर हिन्दू त्योहारों, हिन्दू मान्यताओं को जमकर कोसती थीं और फिर उसके उत्तर में उन्हें कुछ कहा जाता है तो वह भक्त आदि कहकर उपहास से नहीं चूकती थीं, और उसमें उनका साथ देते थे उनके वह वामपंथी मित्र, जो हिन्दुओं से दिल से नफरत करते हैं। मगर जैसे ही उन्होंने गृह प्रवेश के लिए पूजा की, वैसे ही उनका प्रगतिशील होने का लाइसेंस कैंसल हो गया और उन्हें पता चला होगा कि असहिष्णुता क्या होती है, असहिष्णुता का असली स्तर और असली चेहरा क्या होता है?

हुआ यह था कि स्वरा भास्कर ने गृह प्रवेश किया था, तो उन्होंने कई घंटों तक पूजा की तस्वीरें ट्विटर पर पोस्ट कर दी थीं। और फिर उन पर जो हमला हुआ था, वह सभी ने देखा था। उन्हें बामन सकर्स-जाति व्यवस्था का चौकीदार आदि कहा गया था।

उन्हें नकली बताया था

और भी न जाने क्या क्या कहा गया था। कुलमिलाकर जैसे ही स्वरा ने अपनी धार्मिक स्वतंत्रता का प्रयोग किया, उन्हें निशाना बनाया गया। खैर अभी भी स्वरा को यह नहीं पता चल पाया है कि असली असहिष्णु कौन है? और वह संघियों को ट्रोल कर रही हैं। उन्हें जिन लोगों ने अपशब्द कहे, वह वही थे जो हिन्दुओं को कोसना अपना सबसे पहला अधिकार मानते हैं। स्वरा भास्कर जैसे लोग उनकी वाहवाही पाने के लिए, अपने धर्म को गाली देते हैं, हिन्दू आतंकवाद का सिद्धांत गढ़ते हैं और फिर तालिबान और आरएसएस को समानान्तर खड़ा करते हैं, हाँ, न ही इस्लाम की कट्टरपंथी सोच की बुराई कर सकते हैं और न ही तालिबान की।

अब आते हैं। हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा को क्वांटिको में जैसे स्थापित कर दिया था। उस धारावाहिक में पूरी तरह से उस कांसेप्ट को दिखाया था, जो दरअसल है ही नहीं, कुछ राजनीतिक षड्यंत्रों के चलते एक शब्द गढ़ा गया, जिसासे इस्लामी कट्टरपन्थ को सेफ पैसेज मिल सके।

ऐसे में क्वांटिको में एक कहानी दिखाई गयी जिसमे कुछ भारतीय ‘मैनहट्टन’ में बम धमाका प्लान करते हैं। ऐसा करके वो बम धमाके के आरोप में पाकिस्तान को फंसाना चाहते हैं।

सोशल मीडिया पर इसका विरोध हुआ था, और फिर क्वांटिको के निर्माताओं ने माफी माँगी थी और कहा था कि इसमें प्रियंका चोपड़ा का हाथ नहीं है। प्रियंका चोपड़ा ऐसा नहीं है कि हिन्दू आस्थाओं पर प्रहार नहीं करतीं, बल्कि वह खुलकर करती हैं। अपनी शादी में जमकर पटाखे चलाने चलने वाली प्रियंका चोपड़ा, दीपावली पर पटाखे न चलाने की अपील करती हैं और कहती हैं कि उन्हें अस्थमा है, इसलिए पटाखे न चलाए जाएं,

मगर दीपावली पर होने वाला अस्थमा उनके पति के साथ सिगरेट पीने पर गायब हो जाता है। यह अजीब चमत्कार है। और इतना ही नहीं, उनकी शादी में आतिशबाजी में भी नहीं दिखता है।

खैर, हिन्दू रीतिरिवाजों पर हमला करके प्रियंका चोपड़ा ने मार्क्सवादियों का जो प्यार पाया था, वह प्यार हाल ही में गुम हो गया, जब उन्होंने व्यावसायिक अनुबंध के अंतर्गत एक ज्वेलरी ब्रांड को भारत में उतारा और उसमें डिज़ाईनर और बहुत महंगा मंगलसूत्र प्रदर्शित किया। और जिसे ऐसे मंगलसूत्र के रूप में बताया जो बदलती हुई स्त्री की पहचान है!

प्रियंका यह भूल गयी थीं, कि वह लोग केवल वामपंथी लोगों के हाथों में हिन्दू धर्म के विरोध में प्रयोग किए जाने वाले टूल्स हैं, जैसे ही यह टूल्स व्यावसायिक कारणों के कारण भी अपनी हिन्दू संस्कृति या पहचान की बात करेंगे वह ट्रोल हो जाएंगे अर्थात उन्हें कचड़े के डिब्बे में फेंक दिया जाएगा।

ऐसा ही प्रियंका चोपड़ा के  साथ हुआ। वोग के उनके नए फोटोशूट में वह बहुत सुन्दर दिखाई दे रही हैं, पर फेमिनिस्ट को उनके इस सुन्दर रूप से कोई लगाव नहीं है बल्कि उनकी कुंठा प्रियंका चोपड़ा के गले पर जाकर अटक गयी। जहाँ पर मंगल सूत्र था। और फिर उन्होंने अपनी कुंठा का वमन करना आरम्भ कर दिया।

और उनके विरोध में फेमिनिस्ट उतर आईं! वह फेमिनिस्ट जो लोग हिजाब को व्यक्तिगत स्वतंत्रता मानती हैं, वह प्रियंका चोपड़ा पर मंगलसूत्र को लेकर आक्रमण करने लगीं और इस बहाने यह भी कहा गया कि यह सब फिर से पितृसत्ता का आक्रमण है।

पितृसत्ता का आक्रमण हो या न हो, वामपंथियों का आक्रमण इन सब पर जरूर हुआ और इन्हें समझ में आएगा कि केवल सनातन में ही इतनी स्वतंत्रता है कि आप सनातन की आलोचना कर सकें! यहाँ तक कि वामपंथ भी यह आज़ादी नहीं देता कि आप अपनी हिन्दू पहचान दिखा सकें!

मगर फिर भी वामपंथियों और कट्टर इस्लामपंथियों के हाथों हिन्दू धर्म के विरुद्ध टूल बने यह लोग समझेंगे नहीं और अवसर पाते ही उसी हिन्दू धर्म के विरुद्ध उतरेंगे जिसमें देने के लिए केवल स्नेह है और स्वीकार्यता है, छद्म सहिष्णुता नहीं!

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