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Friday, April 12, 2024

आल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा पर लगे यौन शोषण के आरोप: महिला के आरोपों पर कथित लिबरल क्रांतिकारी मौन

मीडिया इन दिनों धीरेन्द्र शास्त्री को लेकर हमलावर है। परन्तु इस सारे शोर में एक बात दब रही है और वह है एक ऐसे व्यक्ति के ऊपर लगे यौन शोषण की बात, जिसे कथित लिबरल समाज “देवता” मानता है। जिसे कथित लिबरल और फेमिनिस्ट समाज किसी भी प्रश्न से परे मानता है। जिसे कथित लिबरल समाज सबसे बड़ा क्रांतिकारी मानता है। यहाँ पर बात हो रही है आल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा की!

आल्ट न्यूज़ के विषय में सभी जानते हैं कि कैसे उसके सह-संस्थापक जुबैर ने नुपुर शर्मा के विरुद्ध संपादित वीडियो चलाकर भावनाओं को भड़काने का कार्य किया था और कैसे इस कारण कई हिन्दू मारे गए थे। उस समय जुबैर के विरोध में कोई भी कथित फेमिनिस्ट नहीं आई थी और न ही यह कहा था कि नुपुर शर्मा के साथ गलत हो रहा है।

वही फेमिनिस्ट आज एक बार फिर छुप कर बैठी हुईं हैं क्योंकि एक बार फिर से उसी आल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक पर प्रश्न है, आरोप हैं। मगर यह प्रश्न और आरोप तो ठीक हैं, मगर लगाए किसने हैं? लगाए भी ऐसी ही महिला ने है जो खुद कथित रूप से “संघी” अर्थात हिन्दू होने के टैग से डरती है! मगर जो इस टैग से डरती है उसके लिए भी फेमिनिस्ट खड़ी नहीं हो रही हैं! यह बहुत हैरानी भरा है। अर्थात फेमिनिस्ट ही उस महिला के लिए खड़ी नहीं हो रही हैं, जो खुद ही घोषित फेमिनिस्ट है!

उफ़! भयानक पीड़ा है! खैर! मसले पर आते हैं। मसला यह है कि एक “संघी” नहीं हूँ, घोषणा करने वाली युवती ने इन्स्टाग्राम पर लम्बी सी पोस्ट लिखकर यह बताया है कि कैसे उसका रणनीतिक और चरण बद्ध तरीके से प्रतीक सिन्हा ने यौन शोषण किया।

जरा कल्पना करें कि यदि यही पोस्ट किसी ऐसे पत्रकार या पोर्टल के विरुद्ध होता जो उनके इकोसिस्टम के विरुद्ध होता तो अब तक विमर्श के स्तर पर कितना तूफ़ान मच चुका होता! अब तक न जाने कितने धरने प्रदर्शन हो चुके होते और उस बहाने पूरे धर्मनिष्ठ हिन्दू समाज को निशाने पर ले लिया होता।

परन्तु ऐसा कुछ नहीं हुआ। और न ही हो सकता है, हालांकि कहने के लिए प्रतीक सिन्हा भी हिन्दू ही है, परन्तु वह उनके इकोसिस्टम वाला है और वह धर्मनिष्ठ हिन्दुओं के विरुद्ध विमर्श खड़ा करने वाला है, इसलिए उस प्रतीक सिन्हा को फेमिनिस्ट यह अधिकार दे देती हैं कि भाई कुछ भी कर सकते हो, विरोध नहीं होगा!

वह सोशल मीडिया जो स्वाति मालीवाल के उस वीडियो पर समाज को, पुलिस को कोसने लगता है जो कहीं न कहीं पूरी तरह से झूठा ही दिख रहा है, वही सोशल मीडिया प्रतीक सिन्हा पर लगे आरोपों पर छुप कर बैठ गया है। प्रतीक सिन्हा के स्थान पर यदि कथित गोदी मीडिया का कोई चेहरा होता तो क्या होता? खैर, अभी मीडिया और सोशल मीडिया पर कथित क्रांतिकारियों का सारा निशाना बागेश्वर धाम है! चलिए हम और आप तो पढ़ें कि आखिर प्रतीक सिन्हा पर क्या आरोप उस लड़की ने लगाए हैं!

लड़की ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाए हैं कि वह एक सेक्स मैनिक है! उसने यह भी कहा कि जिस तरीके से उसने उसे फंसाया, उन्हीं तरीकों का प्रयोग करके उसने दूसरी महिलाओं को भी फंसाया था।

पीड़िता ने कहा कि वह सिन्हा को कुछ वर्षों से जानती थी और वह उसके काम से बहुत प्रभावित थी। इन दोनों ने ही फेसबुक पर वर्ष 2020 से बात करना आरम्भ किया और फिर दोनों ने परस्पर एक दूसरे से नम्बर भी बदल लिए। फिर वह लोग मेसेज पर बातें करते रहे। और फिर दो ही महीनों में सिन्हा से उससे कहा कि वह दोस्ती से कुछ और अधिक चाहता है।

अब दोस्ती से कुछ और अधिक क्या चाहता है, उसे सहज समझा ही जा सकता है और पीड़िता ने समझ लिया। मगर लड़की ने कहा कि अभी पढ़ाई है तो दो साल तक इंतजार करे!

इस स्थिति में इंतज़ार, इंतज़ार, इंतज़ार करो का गाना सुनते हुए प्रतीक ने हामी भर दी, मगर नवम्बर 2020 में सिन्हा ने कहा कि वह रिश्ता जारी नहीं रख सकता, हाँ वह लोग बातें करते रहे! फिर दिसंबर 2020 में उसने कहा कि वह रिश्ता जारी रखना चाहता है!

खैर, यह कभी हाँ और कभी न करते हुए इस बात पर हामी भरी गयी कि महामारी समाप्त होते ही वह दोनों मिलते हैं और हाँ, टीकाकरण के बाद भी! फिर वह फरवरी 2021 तक लड़की के पीछे पड़ा रहा। मई 2021 में उसने कहा कि वह अब खास रिश्ता चाहता है और यह भी कहा कि उसके जीवन में वर्ष 2019 से कोई और लड़की नहीं आई है।

उफ़, इस साफगोई पर कौन न फ़िदा हो जाए! दो साल और एक भी लड़की नहीं आई! यह लग रहा लड़की को उपलब्धि और त्याग दिखा! फिर जुलाई 2021 का समय आया जब प्रतीक सिन्हा ने अपनी असली फीलिंग्स बताईं और फिर सितम्बर 2021 को वह कोलकता गया और फिर दोनों ने तीन दिन एक साथ बिताए, जहाँ पर दोनों ने अन्तरंग पल भी साथ बिताए!

उसने शादी का वादा भी किया! मगर सितम्बर के तीसरे सप्ताह में, सिन्हा ने पीड़िता से कहा कि वह उसे धोखा दे रहा था और अब वह इस ड्रामे को और आगे नहीं चला सकता! इतना ही नहीं उसने यह तक कहा कि उसने दिल में उसके लिए सच्ची फीलिंग्स नहीं थीं और जब वह उसके साथ प्यार का नाटक कर रहा था, उस समय भी उसके जीवन में महिलाऐं थीं!

टूटी और निराश पीड़िता ने कहा कि वह जनता के बीच जाएगी! मगर इसी बीच प्रतीक सिन्हा की महिला मित्र ने उसे समझाया कि क्या फायदा! अर्थात उससे चुप रहने के लिए कहा गया कि मामले को लोगों के बीच लेकर जाने का क्या फायदा!

पीड़िता को महिला ‘मित्र’ से यह भी पता चला कि सिन्हा के अन्य महिलाओं के साथ आकस्मिक शारीरिक संबंध थे और वह भी कई महिलाओं के साथ। उसे यह भी पता चला कि बिस्तर पर एक महिला को पाने के लिए अपनी एकल मोनोगैमस स्थिति के बारे में झूठ बोलना उसकी आदत थी। दोस्त ने कथित तौर पर पीड़िता से कहा कि सिन्हा एक सेक्स मैनियाक’ है।

पीड़िता ने यह भी कहा कि सिन्हा ने न केवल उसके कॉल और मैसेज उठाना बंद कर दिया बल्कि उसे ब्लॉक भी कर दिया। उन्होंने सिन्हा को धोखेबाज और “महिलाओं के स्तनों को घूरने वाला” करार दिया। जब पीड़िता ने सिन्हा का विरोध किया तो उसने कहा कि पिछले बुरे सम्बन्ध ने चलते उसकी आदत ऐसी बन गयी है और उसने दावा किया इसके पीछे एक मनोवैज्ञानिक कारण है।

महिला ने अनावश्यक रूप से दक्षिणपंथी पर हमला किया और सिन्हा को उनके जैसा बताया “दक्षिणपंथियों से नफरत करने का एक कारण यह है कि वे लोगों से झूठ बोलते हैं, वे फर्जी खबरें फैलाते हैं, वे व्यक्तिगत/राजनीतिक लाभ के लिए लोगों को धोखा देते हैं”! उसने जहर उगलते हुए कहा कि  

“यह एक जाल है जो वह अपने शरीर की भूख मिटाने के लिए बिछाता है!  यह आपको कल्पना से परे नुकसान पहुंचाएगा, और आपको एकदम बेकार महसूस कराएगा। ऐसे सच के लिए लड़ने वालों और महिलाओं के लिए लड़ने वाले क्रांतिकारियों से सावधान रहें। उन्हें आपके सुख दुःख से कोई मतलब नहीं है क्योंकि वह एक “पब्लिक फिगर” है! वह यह नहीं सोचेंगे कि और लड़कियां इस जाल में न फंसे, बल्कि वह यह कहेंगे कि छोडो जो हुआ वह हुआ आगे बढ़ो और यह भी दावा करेंगे कि सभी महिलाएं इस तरह के कैजुअल और आम सहमती से दैहिक रिश्ते चाहती हैं!”

महिला ने चेताया कि सिन्हा के साथ लड़कियां काम न करें!

परन्तु यह बहुत ही अधिक दुःख और हैरानी की बात है कि बागेश्वर धाम पर शोर मचाने वाला मीडिया इस समय पूरी तरह से मौन है और साक्षी जोशी, स्वाति मालीवाल जैसे लोग भी चुप हैं

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