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Tuesday, October 4, 2022

क्या मोहम्मद जुबैर, राणा अय्यूब, और हरभजन सिंह ने गेंदबाज अर्शदीप को ‘खालिस्तानी’ बताने के ‘पाकिस्तानी दुष्प्रचार’ को जानबूझकर आगे बढ़ाया?

भारत और पाकिस्तान के बीच 4 सितंबर 2022 को दुबई में बहुप्रतीक्षित एशिया कप का टी-20 मैच खेला गया, जिसमे भारत को पांच विकेट से करारी हार झेलनी पड़ी। भारतीय टीम की हार ने कई भारतीय प्रशंसकों को नाराज और निराश किया। वहीं दूसरी ओर इस मैच में एक महत्वपूर्ण कैच छोड़ने के लिए भारतीय तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह सोशल मीडिया पर भारी ट्रोलिंग का शिकार हो गए हैं। सोशल मीडिया पर उन्हें खालिस्तानी बताया जा रहा है, उनके विकिपीडिया पेज पर गलत जानकारी दी जा रही है। लेकिन इसका प्राम्भ हुआ कैसे?

हालांकि यह कोई पहली बार नहीं है कि इस प्रकार का दुष्प्रचार किया गया हो, हर बार इन देशविरोधी तत्वों का यही प्रयास रहता है कि येन केन प्रकारेण भारत के विभिन्न धर्मों और गुटों के बीच तनाव पैदा किया जाए। इस बार भी पाकिस्तान की जीत के कुछ ही मिनटों बाद, ऑल्ट न्यूज़ के संस्थापक मोहम्मद जुबैर, कथित पत्रकार राणा अय्यूब, लेखक मोहम्मद जीशान, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, और ऑल्ट न्यूज़ के पत्रकार अभिषेक सहित कई वामपंथी तत्वों ने कुछ ‘संदिग्ध’ ट्विटर उपयोगकर्ताओं द्वारा अर्शदीप को खालिस्तानी कहने के स्क्रीनशॉट साझा करके हिंदू विचारधारा से संबंधित लोगों का मजाक उड़ाया। इन लोगों ने ना सिर्फ भारत की प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाने का प्रयास किया, बल्कि यह दावा भी किया कि अर्शदीप सिंह को सिख होने के कारण खालिस्तानी कहा गया, और यह भारतीय दक्षिणपंथी समूह ने आरम्भ किया था।

मैच ख़त्म होने के कुछ ही मिनटों के अंदर ज़ुबैर ने अलग अलग लोगों के ट्वीट को जोड़ कर एक इमेज बनायीं और उसको शेयर कर दिया। इनमे से अधिकांश पाकिस्तानी ट्विटर अकाउंट हैं, लेकिन ज़ुबैर ने ऐसा दिखाया है जैसे भारत के सभी हिन्दू अर्शदीप को खालिस्तानी बोल रहे हो।

वहीं दूसरी ओर पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने भी मैच ख़त्म होते ही आपत्तिजनक ट्वीट किया है। हम यह तो नहीं कहेंगे कि वह इस षड्यंत्र में सम्मिलित हैं, लेकिन उन्होंने बिना यह जाने कि अर्शदीप के विरोध में किये जाने वाले ट्वीट का स्त्रोत क्या है, इसे बड़े स्तर पर उठा दिया।

जब यह लोग दुष्प्रचार करेंगे तो कथित पत्रकार और प्रमाणित जिहादी राणा अय्यूब कैसे पीछे रहती? उन्होंने भी ज़हर उगला और अपना एजेंडा भी चलाया।

इसी तरह से लेखक मोहम्मद जीशान और ऑल्ट न्यूज़ के पत्रकार अभिषेक ने भी इस विषय पर दक्षिणपंथी खेमे पर दोषारोपण किया।

क्या हम एक बार पुनः पाकिस्तान के साइबर-वॉर का लक्ष्य बने हैं?

जिहादी पत्रकार और वामपंथी चाहे कुछ भी कहें, लेकिन यह साफ़ हो गया है कि अर्शदीप के लिए ‘खालिस्तानी’ शब्द का उपयोग करने की प्रवृत्ति पहली बार एक पाकिस्तानी षड्यंत्र सिद्धांतकार जैद हामिद और डब्ल्यूएस खान द्वारा शुरू की गई थी। अर्शदीप की आलोचना डब्ल्यूएस खान ने की थी, जिन्होंने लिखा था कि अर्शदीप निस्संदेह खालिस्तान आंदोलन से जुड़ा हुआ है, जिसे पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त है।

अगर आप अर्शदीप पर हमला करने वाले सोशल मीडिया हैंडल देखेंगे तो पाएंगे कि इनमे से अधिकांश पाकिस्तान से हैं और इनका एक ही ध्येय था, भारत के हिन्दुओं और सिखों के मध्य द्वेष पैदा करना। इसके अतिरिक्त, कई फर्जी खातों से संकेत मिलता है कि जब अर्शदीप कैच से चूक गए, तो भारतीयों ने सिख होने के लिए उनका मजाक उड़ाया। वहीं, खेल के बाद अर्शदीप पाकिस्तान का सबसे लोकप्रिय ट्विटर ट्रेंड बन गया था, जिसे पाकिस्तान में कई पत्रकारों और सोशल मीडिया के प्रभावी व्यक्तियों द्वारा फैलाया गया था।

इसके अतिरिक्त यह भी देखने में आया है कि अर्शदीप सिंह के विकिपीडिया पेज को संपादित किया गया था, और उनकी निजी जानकारियों से छेड़छाड़ की गयी, और उनके परिचय में ‘खालिस्तानी’ शब्द भी जोड़ा गया था। ट्विटर यूजर अंशुल सक्सेना द्वारा दी गई आईपी जानकारी के आधार पर यह पता लगा है कि विकिपीडिया पेज को पाकिस्तान के किसी व्यक्ति ने बदल दिया था। यह बहुत स्पष्ट है कि उन्होंने सिखों को लक्षित करने और भारतीय हिंदुओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए उद्देश्यपूर्ण रूप से पृष्ठ को संशोधित किया।

ट्विटर यूजर अंशुल सक्सेना द्वारा एक अन्य ट्वीट में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर, 2022 को पाकिस्तान में “खालिस्तानी” शब्द के लिए सबसे ज्यादा सर्च किया गया था। ट्विटर हैंडल ‘द हॉक आई’ द्वारा साझा किए गए गूगल ट्रेंड्स मैप के अनुसार, “खालिस्तानी” शब्द के लिए आधे से अधिक सर्च पाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात और कतर से किए गए थे। भारत में इस षड्यंत्र को उजागर करने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं, इसकी निंदा की जा रही है, और यही कारण है कि भारत में भी यह शब्द ट्रेंड में है।

ट्विटर के एडवांस सर्च के भाषाई विश्लेषण के माध्यम से यह भी ज्ञात हुआ है कि इमरान खान की पार्टी पीटीआई और पाकिस्तान में स्थित चरमपंथी समूह टीएलपी से जुड़े लोगों ने भी “खालिस्तानी” शब्द का उपयोग किया था। इस तरह के ट्रेंड करवाने के लिए नकली हैंडल्स और बॉट अकाउंट्स का उपयोग भी किया जाता है।

इन सब साक्ष्यों से यह साफ़ हो जाता है कि भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी अर्शदीप सिंह के लिए खालिस्तानी शब्द का इस्तेमाल करने का चलन सबसे पहले पाकिस्तान ने शुरू किया था। दुर्भाग्य की बात है कि कुछ भारतीय लोग भी इस छद्म युद्ध में फंस गए और उन्होंने भी अर्शदीप के विरुद्ध गलत टिप्पणियां कर दी।

इसी का फायदा उठाते हुए ऑल्ट न्यूज़ के ज़ुबैर ने भारत की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए पाकिस्तान के दुष्प्रचार को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया था। उनके ट्वीट, जिसने केवल कुछ भारतीय ट्विटर उपयोगकर्ताओं से चुनिंदा स्क्रीनशॉट पेश करके भारतीयों को अनुचित रूप से अपमानित किया, को कई पाकिस्तानी ट्विटर खातों द्वारा प्रवर्धित और समर्थन किया गया था। वहीं उनका समर्थन किया राणा अय्यूब और अन्य वामपंथी पत्रकारों ने।

उनका एक ही ध्येय था, भारत के विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत कि छवि को हानि पहुँचाना। ऐसे में हर भारतीय का यह उत्तरदायित्व है कि इस तरह के सोशल मीडिया ट्रेंड और साइबर वारफेयर से भ्रमित ना हों। हमे प्रयास करना चाहिए कि इन विषयों पर हम जानकारी बढ़ाएं और इस तरह के दुष्प्रचार का कठोरता से विरोध करें।

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