“30 नवंबर: जयंती व पुण्यतिथि पर नमन ‘स्वदेशी विचारधारा’ के प्रेरणास्रोत राजीव दीक्षित जी को… जो भ्रष्टाचार और विदेशी कंपनियों के खिलाफ निडरता से बने योद्धा”, सुदर्शन न्यूज़, नवंबर 30, 2025
“राजीव दीक्षित जी का नाम देशभक्ति और स्वदेशी आंदोलन के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है. उनकी वक्तृत्व कला और निडर स्वभाव ने उन्हें समाजसेवा और लोक कल्याण के क्षेत्र में एक अद्वितीय पहचान दी. राजीव जी भारतीय संस्कृति, स्वदेशी उत्पादों और आयुर्वेद को बढ़ावा देने वाले महान समर्थक थे. राजीव दिक्षित सिर्फ एक समाजसेवक ही नहीं बल्कि एक विचारक भी थे जिन्होंने अपने विचारों और क्रियाओं से भारतीय समाज को समृद्धि की दिशा में मार्गदर्शन किया.
वामपंथ के समर्थक देश की उन्नति में बहुत बड़ी रुकावट है, वे कभी भी राजीव दीक्षित जैसी सोच को बर्दाश्त नहीं कर सकते. आज 30 नवंबर को राजीव दीक्षित जी की जयंती और पुण्यतिथि दोनों ही है, ऐसे में सुदर्शन परिवार आधुनिक युग के ऐसे महापुरुष को बारंबार नमन करते हुए उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा है. आइए स्वदेशी आंदोलन के अग्रदूत और भारतीय संस्कृति के रक्षक के प्रेरक कहानी को जानें.
विदेशी कंपनियों के विरोधी और स्वदेशी के समर्थक
राजीव दीक्षित जी विदेशी कंपनियों द्वारा भारत के व्यापार और आर्थिक संरचना पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के खिलाफ थे. वे हमेशा इन कंपनियों के कारण देश के छोटे उद्योगों और स्थानीय व्यापारियों को हो रहे नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करते रहे. उनका मानना था कि विदेशी कंपनियां न केवल देश की अर्थव्यवस्था को कमजोर कर रही हैं, बल्कि भारत की स्वदेशी पहचान को भी खत्म कर रही हैं……”
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