“ ‘एकसूत्र में बांधता है हिंदू राष्ट्रवाद’, विजयादशमी पर सरसंघ चालक मोहन भागवत ने स्वयं सेवकों को दिया संदेश”, नई दूनिया, अक्टूबर 02, 2025
“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने आज नागपुर में विजयादशमी उत्सव धूमधाम से मनाया। इस बार का आयोजन विशेष रहा क्योंकि संघ अपनी स्थापना का शताब्दी वर्ष भी मना रहा है। कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख सरसंघ चालक मोहन भागवत ने भाषण देते हुए गुरु तेग बहादुर के बलिदान, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के योगदान को नमन किया।
सरसंघ चालक मोहन भागवत के भाषण के प्रमुख अंश
सरसंघ चालक मोहन भागवत ने कहा कि विविधता और हमारी संस्कृति का पूर्ण स्वीकार और सम्मान जो हम सभी को एक सूत्र में बांधता है, वह राष्ट्रवाद है, जिसे हम हिंदू राष्ट्रवाद कहते हैं। यह हमारे लिए हिंदू राष्ट्रवाद है। हिंदवी, भारतीय और आर्य सभी हिंदू के पर्यायवाची हैं।
हमारे पास कभी भी राष्ट्र राज्य की अवधारणा नहीं रही है। हमारी संस्कृति हमारे राष्ट्र का निर्माण करती है। राज्य आते हैं और जाते हैं, लेकिन एक राष्ट्र हमेशा के लिए रहता है। यह हमारा प्राचीन हिंदू राष्ट्र है। हमने सभी प्रकार के उत्थान और पतन देखे हैं, हमने गुलामी देखी है और हमने आजादी देखी है, लेकिन हम इन सबसे बच गए। यही कारण है कि एक मजबूत और एकजुट हिंदू समाज देश की सुरक्षा और अखंडता की गारंटी है। हिंदू समाज एक जिम्मेदार समाज है। हिंदू समाज हमेशा ‘हम और वे’ की इस मानसिकता से मुक्त रहा है…..”
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