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Saturday, August 20, 2022

अलीगढ में गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण – दलितों की बारात पर कट्टरपंथी मुस्लिमों ने फेंके अंडे और जातिसूचक अपशब्दों का किया प्रयोग

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में कल एक बार फिर से कथित गंगा जमुनी तहजीब का उत्कृष्ट उदहारण प्रस्तुत किया गया। एक हिन्दू परिवार की लड़कियों के विवाह के लिए बरात जा रही थी, उस पर गाँव के ही कट्टर मुस्लिमों ने बारातियों पर अंडे फेंके और जातिवादी अपशब्द भी कहे।
कट्टरवादी मुस्लिमों द्वारा की गयी इस घटना के बाद गाँव में अत्यंत तनावपूर्ण माहौल बन गया है, जिससे निबटने के लिए भारी मात्रा में पुलिस बल को तैनात किया गया है।

यह विषय अलीगढ़ के टप्पल इलाके के नूरपुर गाँव का है। यहाँ गुरुवार 7 जुलाई 2022 को एक हिंदू परिवार की दो लड़कियों के विवाह का समारोह आयोजित किया गया था। जाटव समाज के धर्मवीर अपनी दोनों पुत्रियों का विवाह एक साथ कर रहे थे। एक बारात दनकौर के गाँव अच्छेजा और दूसरी बारात दनकौर के ही खरेली गाँव से आई थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात को लगभग 10 बजे के आस पास जब बारात धर्मवीर के घर की ओर जा रही थी, तभी कुछ इमारतों की छत से कट्टरपंथी मुस्लिमों ने बारातियों पर अंडे फेंकने शुरू कर दिए। इससे घटना से लोगो के कपड़े खराब हो गए और उनमें अफरा-तफरी मच गई। जब बारातियों ने इसका विरोध किया तो उनके साथ गाली-गलौज की गई। मुस्लिम समाज के दंगाइयों ने जाटव समाज के लोगों पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें अपशब्द भी कहे।

स्थिति बिगड़ते देख गाँव के लोगो ने तुरंत पुलिस को सूचित किया। चूंकि बकरीद आने वाली है, इसलिए प्रशासन सतर्क था, और इसे समाज में अशांत करने की घटना समझ कर पुलिस दल तुरंत मौके पर पहुंचा। कुछ लोगो और मीडिया के लोगो ने बताया कि चूंकि बारात एक मस्जिद के सामने से निकल रही थी, इसलिए उस पर अंडे फेंके गए थी। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए पुलिस ने तुरंत दोनों पक्षों से बात कर मामले को शांत करने के प्रयास किये।

गाँव के लोगों का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिद के सामने से बारात ले जाने का विरोध करते रहते हैं। इससे पहले भी गाँव में मुस्लिम समाज के कट्टर तत्वों ने अलग अलग बहानों से हिंदू समाज के कार्यक्रमों में व्यवधान डालने के प्रयास किये हैं। उन्होंने मस्जिद के सामने से बारात निकालने, बैंड वालों को बाजा बजाने, बारातियों के नाचने-गाने, और जातिविशेष के दूल्हों के घोड़ी पर चढ़ने पर अघोषित रोक लगा राखी है। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके साथ मारपीट और अभद्रता की जाती है।

टप्पल-जट्टारी इलाका वैसे भी मजहबी और जातीय घटनाओं के लिए बदनाम है। पिछले ही दिनों केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में भी यहां जबरदस्त हिंसा हुई थी, लोगों की गाड़ियों पर पत्थरबाजी की गयी थी, तब लोगों को जान बचाने के लिए गाडी छोड़ कर भागना पड़ा था।

पुलिस के अनुसार घटनास्थल पर कोई मस्जिद नहीं

गाँव के राजवीर सिंह ने चार आरोपियों के नाम शिकायत में दर्ज कराए हैं। टप्पल थाने में दी गई शिकायत के अनुसार आरोपी अंसार,अमजद, शाहरुख, और सउआ को नामजद किया गया है। पुलिस ने इन आरोपियों पर एससी-एसटी ऐक्ट के अंतर्गत मुकदमा भी दर्ज कर लिया है। एसपी देहात पलाश बंसल के अनुसार पुलिस इन सभा आरोपियों और इनके सहयोगियों को ढूंढ रही है और जल्दी ही इन्हे गिरफ्तार भी किया जाएगा।

वहीं मीडिया रिपोर्टों के उलट उत्तरप्रदेश पुलिस के अनुसार जिस मार्ग से बारात जा रही थी, और जहां हमला हुआ, वहां कोई मस्जिद नहीं है। ऐसे में यह भी संभव है कि मस्जिद का बहाना बनाया जा रहा है, हिन्दुओ द्वारा कोई भी भड़काऊ हरकत नहीं की गयी, फिर भी उन पर हमला किया गया।

यह बहुत ही हैरानी की बात है कि कथित भीम और मीम एकता की बात करने वाले कार्यकर्ता या कथित जातियों के लिए कार्य करने वाली भीम आर्मी जैसे लोग तभी अपना एजेंडा चलाने आते हैं, जब जाति विशेष के लोगों पर हिन्दुओं की कथित रूप से उच्च जातियों ने कुछ कहा हो, उस समय छोटी बात को भी अपने एजेंडे के अनुसार बढ़ाचढ़ा कर हिन्दुओं में ही परस्पर बैर उत्पन्न करने वाले लोग तब सामने नहीं आते हैं, जब आरोपी मुस्लिम होता है, फिर तो उनके एजेंडा भी साफ दिखाई देता है और प्रश्न तो उभरता ही है कि “तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है पार्टनर?”

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