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Sunday, November 27, 2022

एमईएनडी, एक ब्रिटिश कट्टर इस्लामिक संगठन जो ‘जिहाद’ के नाम पर हिन्दुओं पर नस्लीय हमले करवाता है

यूनाइटेड किंगडम के विभिन्न शहरों में पिछले दिनों कट्टरपंथी इस्लामवादियों द्वारा हिंदुओं और हिंदू मंदिरों पर हमलों में बड़े स्तर पर हिन्दू विरोध या ‘हिंदूफोबिया’ के दर्शन होते हैं। यह पहली बार नहीं है जब स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां हिंदुओं और उनके धार्मिक संस्थानों पर हमलों पर मूक रही हैं।

हिंदुओं के लिए स्थिति और बिगाड़ने के लिए स्थानीय मीडिया का एक वर्ग जानबूझकर तथ्यों को गलत तरीके से रिपोर्ट कर रहा है और पीड़ितों यानी हिंदुओं को अपराधी के रूप में दोषी ठहरा रहा है, जबकि अपने ही देश में कट्टरपंथी इस्लाम के बढ़ते खतरे से आंखें मूंद रहा है। वहीं स्थानीय इस्लामिक तत्वों ने इस अवसर को भुनाने का प्रयास किया है, ताकि वह हिन्दुओं को बदनाम कर सकें।

अंतरराष्ट्रीय मामलों पर नजर रखने और उनका विश्लेषण करने वाले नई दिल्ली स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर होलिस्टिक एंड इंटीग्रेटेड स्टडीज (सीएचआईएस) ने 22 सितंबर, 2022 को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है, “ब्रिटेन में हिंदूफोबिया के मामलों के एक गहन अध्ययन से पता चलता है कि मुसलमानों और अन्य विरोधियों ने हिंदू संस्कृति और हिंदुओं पर पिछले कुछ वर्षों में हमलों की संख्या बढ़ा दी है।

उदाहरण के लिए, कई अवसरों पर, हिंदू उत्सवों को बाधित किया गया है, उनके मंदिरों में तोड़फोड़ की गई है, उनके देवताओं का मजाक उड़ाया गया है, और धार्मिक प्रतीकों को भी नष्ट किया गया है। यह उस गहरे द्वेष और भय को दर्शाता है जो इस्लामवादी हिंदू सभ्यता के लिए रखते हैं। पिछले एक साल में ब्रिटेन में धार्मिक घृणा अपराधों में 9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है लेकिन हिंदू घृणा अपराधों में वृद्धि पर कोई स्पष्टता नहीं है। जैसा कि देखा जा रहा है, हिंदूफोबिया की भावना गंभीर रूप से बढ़ गयी है, लेकिन इसकी सटीक संख्या का अनुमान लगाना अभी संभव नहीं है।

एमईएनडी (मुस्लिम इंगेजमेंट एंड डेवलपमेंट) कर रही है हिन्दुओं पर नस्लीय हमले

ऐसी ही एक हिन्दू विरोधी संस्था है एमईएनडी (मुस्लिम इंगेजमेंट एंड डेवलपमेंट) जो ना मात्र हिन्दुओं का विरोध कर रही है, बल्कि इसने अब ऐसे हिन्दुओं पर भी हमले करवाना शुरू कर दिया है जो किसी हिन्दू संस्था से किसी भी प्रकार का सम्बन्ध रखते हों। एमईएनडी कथित रूप से एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो स्थानीय समुदायों के भीतर ब्रिटिश मुसलमानों को ब्रिटिश मीडिया और राजनीति में अधिक सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए सशक्त और प्रोत्साहित करने में सहायता करती है।

पिछले दिनों हुए हिंसक हमलो पर भी एमईएनडी ने वक्तव्य दिया था, और इसके लिए सारा ठीकरा हिन्दुओं के सर पर ही फोड़ा था। इस संस्था ने हिन्दुओं को क्रिकेट मैच के पश्चात मुसलमानो को भड़काने का दोषी बताया था, और साथ ही एक सिख व्यक्ति पर हमले का आरोप भी हिन्दुओं पर ही लगाया था। यह संस्था हिन्दुओं को द्वेष फैलाने वाला समझ बताती है, और अपने छद्म प्रचार के लिए मीडिया का भी उपयोग करती है।

एमईएनडी अब इंग्लैंड से बाहर की घटनाओं के लिए भी स्थानीय हिन्दुओं को दोष देना आरम्भ कर दिया है। अब यह लोग भारत में अल्पसंख्यकों के ‘कथित’ उत्पीड़न के लिए राजुल तेजुरा और एचएसएस यूके को दोषी ठहरा रहे हैं, वहीं माजिद को एक उद्धारकर्ता कह रहे हैं, जबकि माजिद वही व्यक्ति है जिसने हिंदुओं पर हमला करने के लिए बर्मिंघम से लीसेस्टर में भीड़ को उकसाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गलत सूचना को फैलाया था।

एमईएनडी अब हिन्दुओं के राजनीतिक सम्बन्धो को लेकर भी उन पर हमलावर है। अब वह राहुल तेजपुरिया पर भी हमले कर रहे हैं, उनका दोष मात्र यह है कि उन्होंने 2019 में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के फिर से चुने जाने के बाद एक समारोह का आयोजन किया था।

एमईएनडी के कट्टरवाद और आतंकवाद से सम्बन्ध

एमईएनडी को पहले आई-एंगेज के नाम से जाना जाता था। इसकी स्थापना सूफियान इस्लमेल ने की थी, जो एक जाने माने हिन्दू विरोधी माने जाते हैं। एमईएनडी को ब्रिटिश मुस्लिमों में ‘चरमपंथ को बढ़ावा देने’ के लिए जाना जाता है। जानी मानी हेनरी जैक्सन सोसाइटी ने एमईएनडी को “नागरिक स्वतंत्रतावादी के रूप में मुखौटा करने वाले इस्लामवादी” के रूप में वर्णित किया है।

सूफियान इस्माइल कभी मोअज्जम बेग के केज (सीएजीइ) संस्था के मुख्य कार्यकर्त्ता भी थे। इस संस्था केज को आतंकी संदिग्धों की वकालत करने के लिए और उनके कथित मानवाधिकारों और पुनर्वास के प्रयास करने के लिए जाना जाता है। नीचे दिए गए वीडियो में इस्माइल को आप एक आतंकवादी के पक्ष में बोलता हुए सुना जा सकता है।

एमईएनडी के पूर्व निदेशक, आजाद अली ‘केज’ के लिए संचार के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं। आजाद अली एक सिविल सेवक थे जिन्होंने इराक में ब्रिटिश सैनिकों की हत्या को उचित ठहराया था, वहीं उन्होंने यहां तक कहा कि 26/11 एक मुंबई आतंकी हमला नहीं था। आजाद अली इस्लामिक फोरम ऑफ फोरम (आईएफई) के प्रवक्ता हैं, जिसे जमात ए इस्लामी की यूरोपीय शाखा माना जाता है। आईएफई की स्थापना चौधरी मुईन-उद्दीन ने की थी, जो जेईआई बांग्लादेश की छात्र शाखा इस्लामी छात्र संघ के सदस्य थे। उन्हें बांग्लादेश वॉर क्राइम ट्रिब्यूनल ने अत्याचार करने के मामलों में सजा सुनाई थी।

एमईएनडी डॉ ओसामा अल तिकृति द्वारा स्थापित मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ ब्रिटेन (एमएबी) के साथ भी जुड़ा हुआ है, जो इराकी मुस्लिम ब्रदरहुड के पूर्व प्रमुख थे और इराक इस्लामिक पार्टी से संबंधित थे। ओसामा अल तिकरीति के बेटे डॉ अनस अल तिकृति एमएबी के पूर्व अध्यक्ष और कॉर्डोबा फाउंडेशन के संस्थापक थे।

Picture Source – https://twitter.com/HinduHate

अलकायदा के आतंकवादी अनवर अल अवलाकी ने 2002 में ब्रिटेन का दौरा करने के दौरान एमएबी, आईएफई और एफओएसआईएस के लिए व्याख्यान दिया था। अनस अल तिकरीत का सम्बन्ध रोशन सालिह की 5 पिलर्स, केज, इस्लामिक ह्यूमन राइट्स कमीशन (आईएचआरसी) के साथ-साथ सूफियान इस्माइल की मेंड के साथ भी रहे हैं।

कुल मिलकर यह कहा जा सकता है कि ब्रिटेन में हिन्दुओ के विरोध में कट्टर इस्लामिक संगठनों ने एक साथ मिल कर काम करना आरम्भ कर दिया है। यह संगठन कहने को समाज सेवा का कार्य करते हैं, लेकिन इनके सम्बन्ध बड़े बड़े आतंकवादी संगठनो से भी हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ब्रिटिश हिन्दुओं के लिए आने वाला समय बड़ा ही कठिन होने जा रहा है।

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