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Sunday, November 27, 2022

हिन्दुओं के तीर्थ बेट द्वारका पर अवैध कब्जा करने की पीएफआई-वक़्फ़ के प्रयास को प्रशासन ने किया नाकाम; अवैध इस्लामिक ढांचों को गिराया गया

1 अक्टूबर, शनिवार को देवभूमि द्वारका जिले के बेट द्वारका में सुबह सवेरे प्रशासन और पुलिस के कई दल एक बड़ी कार्यवाही के लिए आ चुकी थी। छह जिलों की पुलिस दल हथियारों और आंसू गैस जैसे साधनो से सज्ज हो राजस्व, मरीन, और वन विभाग के दलों के साथ अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंच गयी थी। शनिवार देर तक 21 जगहों पर चली कार्रवाई में प्रशासन को करीब 55 हजार वर्ग फीट जमीन से अतिक्रमण हटाने में सफलता मिली। इस जगह पर पीएफआई और वक़्फ़ बोर्ड ने अवैध कब्ज़ा किया हुआ था।

यह सारी सम्पत्तियाँ मुस्लिम बहुल इलाकों में थी और इनकी कीमत कई करोड़ों में बताई जा रही है। अत्यंत संवेदनशील माने जाने वाले बेट द्वारका में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई थी। प्रशासन ने सख्ती बरतते हुए इस क्षेत्र में जैमर का भी उपयोग किया जिससे किसी भी प्रकार की अफवाह फैलाने पर रोक लग सके। कार्रवाई में द्वारका जिले की पुलिस के अलावा राजकोट, पोरबंदर, सुरेन्द्रनगर, जामनगर, मोरबी जिले की पुलिस शामिल रही। कार्रवाई में विशेष रूप से लाई गई 5 जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटाना शुरू किया गया था।

क्यों हुई मुस्लिम इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही?

जिले के पुलिस अधीक्षक नितेश पांडेय ने बताया कि समुद्री सीमा की सुरक्षा और देश की आंतरिक सुरक्षा के संबंध में बेट-द्वारका में हुआ अतिक्रमण के संबंध में सर्वे कराया गया था। प्रशासन को यह जानकारी मिली थी कि पीएफआई और वक़्फ़ बोर्ड ने ढेरों सम्पत्तियों पर अवैध कब्ज़ा किया हुआ था। इसके बाद नियमानुसार सभी को नोटिस देकर स्थान खाली करने की समय सीमा बताई गई थी, जिसके पश्चात ही अतिक्रम हटाने के लिए कार्रवाई शुरू की गई थी। दुकानों और कच्चे-पक्के मकानों को तोडऩे का काम हनुमानदांडी और बालापुर क्षेत्र से शुरू किया गया।

प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे में यहां जिहादी तत्वों द्वारा बड़े स्तर पर अतिक्रमण होने की जानकारी मिली थी। बेट-द्वारका में अतिक्रमण के संबंध में पहले भी कई उच्चस्तरीय शिकायतें की जा चुकी थी। कार्रवाई से पूर्व पुलिस ने कई संदिग्ध जिहादियों को हिरासत में ले लिया था, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकी जा सके। प्रशासन ने ओखा से बेट के बीच चलने वाली फेरीबोट सर्विस को भी आपात उपयोग के अतिरिक्त अन्य उपयोग के लिए बंद कर दिया गया था।

पीएफआई और वक्फ कर रहे थे पाकिस्तान के सहयोग से हिन्दुओं के तीर्थ पर अवैध कब्ज़ा

प्रशासन के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों को सूचना मिली थी कि प्रतिबंधित इस्लामिक आतंकवादी संगठन पीएफआई बेट द्वारका में सक्रिय है। पीएफआई की सहायता वक्फ बोर्ड कर रहा था, और दोनों संगठन मजहबी प्रतिष्ठानों के नाम पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर रहे थे, और यहाँ खुल कर अवैध गतिविधियां चल रही थी।

गुजरात में हिन्दुओं के प्राचीन तीर्थ-स्थल ‘द्वारका’ के पास समुद्र में एक छोटा सा द्वीप, बेट द्वारका अक्सर पाकिस्तान और अन्य तस्करों द्वारा ड्रग्स, सोना, नकली मुद्रा और हथियारों की तस्करी के लिए एक मार्ग के रूप में उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि सुरक्षा एजेंसियां इस द्वीप पर नजर रख रही थीं। पिछले दिनों पीएफआई को केंद्र सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया है, तत्पश्चात ही यहाँ कार्यवाही हुई है।

यह कोई पहला मामला नहीं है जब जिहादी तत्वों ने हिन्दुओं के तीर्थ स्थलों पर कब्ज़ा करने का प्रयास किया हो। हम सैंकड़ो वर्षों से श्री राम जन्मभूमि, श्री कृष्ण जन्मभूमि, और काशी विश्वनाथ पर स्वामित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे ही देशभर में सैकड़ो हिन्दू तीर्थ हैं, जिन पर जिहादियों ने कब्ज़ा किया हुआ है, और अब यह द्वारका पर भी कब्ज़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।

क्या है बेट द्वारका?

द्वारका एक अति-महत्वपूर्ण हिन्दू तीर्थस्थल है, यह सर्वाधिक पवित्र तीर्थों में से एक तथा चार धामों में से एक माना जाता है। यह सात पुरियों में एक पुरी है, इसलिए यह द्वारका पुरी के नाम से प्रसिद्द है। यह नगरी गुजरात में समुद्र के किनारे पर बसी है, हिन्दू धर्मग्रन्थों के अनुसार, भगवान कॄष्ण ने इसे बसाया था और इसे श्रीकृष्ण की कर्मभूमि भी माना जाता है।

भेट का मतलब मुलाकात और उपहार भी होता है, इस नगरी का नाम इसी कारण भेट पड़ा, जो कालांतर में बेट द्वारका बन गया। ऐसी मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण की अपने मित्र सुदामा से भेट हुई थी। गोमती द्वारका से यह स्थान 35 किलोमीटर दूर स्थित है, यहाँ स्थित मंदिर में कृष्‍ण और सुदामा की प्रतिमाओं की पूजा होती है। मान्यता है कि द्वारका यात्रा का पूरा फल तभी मिलता है जब आप भेट द्वारका की यात्रा करते हैं।

मान्‍यता है कि सुदामा जी जब अपने मित्र से भेंट करने यहां आए थे तो एक छोटी सी पोटली में चावल भी लाए थे। इन्‍हीं चावलों को खाकर भगवान कृष्‍ण ने अपने मित्र की दरिद्रता दूर कर दी थी। इसलिए यहां आज भी चावल दान करने की परंपरा है। ऐसी मान्‍यता है कि मंदिर में चावल दान देने से भक्‍त कई जन्मों तक गरीब नहीं होते।

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