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Tuesday, August 16, 2022

आपरेशन ‘ब्लू स्टार’ की बरसी पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में कुछ लोगों द्वारा खालिस्तान के पक्ष में प्रदर्शन

पंजाब में जब से आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है, खालिस्तानी तत्वों का मनोबल कहीं अधिक बढ़ गया है। पिछले ही दिनों पंजाब सरकार ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के कारण 424 लोगो की सुरक्षा हटा दी थी, लेकिन अगले ही दिन प्रख्यात गायक सिद्धू मूसेवाला की नृशंस हत्या कर दी गयी, और सरकार को सुरक्षा वापस लौटानी पड़ी । आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी थी, और जिस बात का डर था, आज वही हुआ।

आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 38वीं बरसी पर अमृतसर के हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में खालिस्तान समर्थक लोगो ने अव्यवस्था फैला दी। उन्होंने ना सिर्फ उग्र प्रदर्शन किया, बल्कि कई अशोभनीय नारे भी लगाए। सूत्रों के अनुसार पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह, जत्थेदार और अकाल तख्त के साथ बंद कमरे में बैठक की थी, हलांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि मान और सिंह ने किस विषय पर बात की।

सूत्रों के अनुसार सुबह की अरदास के दौरान, अलक तख्त जत्थेदार ने 1984 के सैन्य अभियान के समय जान गंवाने वाले लोगो को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने भारतीय सेना को स्वर्ण मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार की भी निंदा की। अरदास के तुरंत बाद कई खालिस्तानी तत्व भिंडरांवाले के पोस्टर और तलवारें लेकर स्वर्ण मंदिर के बाहर जमा हो गए। उन्होंने पंजाब पुलिस, खुफिया कर्मियों और अर्धसैनिक बलों की उपस्थिति में खालिस्तान समर्थक नारे लगाए और भिंडरावाले की जय जयकार की।

आश्चर्य की बात है कि अमृतसर प्रशासन ने स्वर्ण मंदिर के चारों ओर धारा 133 लगा दी थी, और प्रशासनिक आदेशों के अनुसार किसी भी हथियार को ले जाना प्रतिबंधित था, लेकिन फिर भी सैंकड़ो खालिस्तानी तत्व हथियारों और आपत्तिजनक सामग्री के साथ वहां एकत्र हो गए थे।

यहाँ यह जानना आवश्यक है कि 5 जून को ही अमृतसर में एक खालिस्तान समर्थक रैली भी आयोजित की गई थी। शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) और दल खालसा सहित कई कट्टरपंथी सिख संगठनों के सदस्यों ने शहर में एक तथाकथित ‘स्वतंत्रता मार्च’ आयोजित किया। खालिस्तान के झंडे और तख्तियां लेकर रैली में सभी उम्र के सिखों ने हिस्सा लिया, उन्होंने ‘आजादी’ के समर्थन में नारे लगाए और सिखों के लिए ‘खालिस्तान’ एक अलग राज्य की मांग की।

कुछ ही दिन पहले आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने सिद्धू मूसेवाला की हत्या के बाद एक आपत्तिजनक बयान दिया था। उसने एक वीडियो संदेश के जरिए पंजाबी गायकों को धमकाया और उन्हें 6 जून को श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचने और खालिस्तान की आजादी के लिए प्रार्थना करने का आदेश दिया। ऐसा करने में विफल रहने पर उन्हें सिद्धू मूसेवाला के समान मृत्यु सामना करने के लिए तैयार रहने के लिए कहा था।

कवि कुमार विश्वास ने भी इस आपत्तिजनक प्रदर्शन पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें भारी संख्या में लोग नारेबाजी कर रहे हैं। जुलूस के साथ कुछ पुलिसकर्मी भी चलते दिख रहे हैं।

कुमार विश्वास ने इस जुलूस की निंदा करते हुए लिखा है,”लोग पूछते हैं कि इतना बड़ा देश बंटा कैसे था? ऐसी सुनियोजित साजिशों और हमारी ये सहने की आदतों के कारण। तब भी मुझ जैसे लोग पागल कहे जाते थे, आज भी। जब मैंने बोला तो लोगों ने नहीं सुना। देश की सारी पार्टियां चुप बैठी हैं और भारत मां के आंचल को फाड़ने की योजना बनाने वाला मुखर। आज का पंजाब।”

हैरानी की बात है कि सिखों के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल स्वर्ण मंदिर के बाहर खालिस्तानी तत्व इस तरह से बवाल कर रहे हैं, अमृतसर शहर में दिन दहाड़े इस तरह की रैलियां निकाली जा रही हैं, और सरकार एवं पुलिस मूकदर्शक बनी हुई हैं। इस विषय में लोग पहले ही आशंका व्यक्त कर रहे हैं कि पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति काफी चिंताजनक है, और ऐसे में खालिस्तानी तत्वों को बढ़ावा दे कर किसी अनिष्ट को बुलावा तो नहीं दिया जा रहा?

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