“पूर्वज नहीं बदल सकते, तो धर्म क्यों? धर्मांतरण करने वालों पर शंकराचार्य सदानंद सरस्वती का तीखा प्रहार ”, जागरण, मार्च 01, 2026
“द्वारिका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज ने रविवार को विश्व कल्याण आश्रम (पारलीपोस) में पत्रकारों से वार्ता के दौरान धर्मांतरण, राजनीति और न्याय व्यवस्था पर बेबाक राय रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जिन्हें अपनी परंपरा और धर्म का ज्ञान नहीं होता, वही लोग प्रलोभन में आकर धर्म परिवर्तन करते हैं।
धर्मांतरण रोकने के लिए कड़े कदम की मांग
शंकराचार्य जी ने कहा कि सुविधा और प्रलोभन की वजह से लोग मिशनरियों के चंगुल में फंस रहे हैं। उन्होंने इसके लिए सरकारी नीतियों में व्याप्त भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया।
न्यायिक व्यवस्था और संविधान पर विचार
देश की न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जगद्गुरु ने कहा कि भारत में न्याय मिलने में अत्यधिक विलंब होता है, जो स्वयं में एक अन्याय है। उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन कर न्यायिक व्यवस्था बदलनी चाहिए……”
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