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Wednesday, October 5, 2022

झारखण्ड में मनचले शाहरुख ने प्यार के नाम पर एक छात्रा अंकिता को जलाया, यह जलाना नहीं है, सांस्कृतिक अर्थात कल्चरल जीनोसाइड है!

झारखंड से एक दिल दहला देने वाली घटना आई है। जिसमें एक मुस्लिम ‘मनचले’ ने एक हिन्दू छात्रा को इसलिए जला दिया क्योंकि उसने उसके इश्क का प्रस्ताव नहीं माना था। यहाँ पर मीडिया इसे एकतरफा प्यार की संज्ञा दे रहा है, परन्तु यह एकतरफा प्यार नहीं है, यह एकतरफा प्यार कतई नहीं है, यह है तो बस हिन्दू लड़कियों पर किसी प्रकार से कब्जा!

किसी भी प्रकार हिन्दू लड़कियों की “कोखों” पर कब्ज़ा। इसे बाद में समझेंगे, पहले जानते हैं कि यह मामला क्या है।

मामला है झारखंड में दुमका का, जहाँ पर 19 वर्ष की एक लड़की का पीछा कोई शाहरुख करता था। शाहरुख पेशे से मजदूर है। वह अंकिता से एकतरफा इश्क करता था। क्या आपको लगता है कि सारी समस्या की जड़ एकतरफा इश्क है? नहीं! एकतरफा इश्क समस्या नहीं है, समस्या है हिन्दू लड़कियों का मुस्लिम आशिक को इंकार करना। क्योंकि यह एक वर्चस्व की जंग है, जिसमें हर हिन्दू लड़की एक निशाना है।

निकिता तोमर का भी यही मामला था, और दिल्ली में एयर होस्टेस का कोर्स कर रही एक लड़की का भी, जिसे आदिल ने चलती सड़क पर चाकू से हमका करके मार दिया था। झारखंड में जो कुछ भी अंकिता के साथ हुआ वह न ही पहला है और न ही आख़िरी! यह काफिरों की कोख और काफिरों के शरीर पर अधिकार की भावना है।

मीडिया के अनुसार अंकिता ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने उसके मोबाइल पर दस दिन पहले कॉल किया था और उसे दोस्त बनने के लिए कहा था। जब उसने उसकी बात नहीं मानी तो लड़की को आरोपी ने धमकी दी कि वह उसका खून कर देता, यदि वह उसकी बात नहीं मानेगी तो। अंकिता ने कहा कि उसने अपने घर पर बात की तो उसके पिता ने कहा कि वह शाहरुख़ के घरवालों से बात करंगे।

अंकिता ने बताया कि

“मंगलवार की सुबह, मुझे अपनी पीठ पर दर्द लगा और मुझे कुछ जलने की गंध आ रही थी। आंख खुली तो मैंने उसे भागते हुए पाया। मैं दर्द से चीखने लगी और अपने पिता के पास भागी, मुझे ऐसे देखकर मेरे माता-पिता ने आग बुझाई और मुझे अस्पताल ले गए”

अंकिता बहुत ही कठिनाई से बोल पा रही थी। क्योंकि जब उसे भर्ती किया गया था, तब तक वह 90% तक जल चुकी थी।

यह देखना बहुत ही दुखद है कि जहाँ यह मामला पूरी तरह से पहचान का मामला होना चाहिए, अर्थात लड़की की धार्मिक पहचान समाप्त करने वाला, वहीं मीडिया इसे मात्र सिरफिरे की करतूत, या एकतरफा प्यार तक सीमित कर देता है। यह एकतरफा प्यार तो है ही नहीं, क्योंकि इसमें प्यार है ही नहीं!

प्यार कभी भी इतना स्वार्थी नहीं होता कि जिसके साथ जीवन बिताने का सोचा जाए, उसकी ही हत्या कर दी जाए, या उसे ही जला दिया जाए, यह बहुत ही भयावह मंजर है। इसे कुछ भी नाम दिया जा सकता है मगर यह प्यार नहीं है।

मीडिया और सारा विमर्श इसे प्यार की ओर लेकर जाता है, और एक प्रकार से जो हिन्दुओं का सांस्कृतिक जीनोसाइड इस माध्यम से किया जाता है, उसका संकुचन कर देता है। यह घटनाएं कभी भी प्यार का हिस्सा नहीं थी और न ही हैं एवं न ही रहेंगी। यह इस बात का गुस्सा है कि आखिर ‘काफ़िर’ लड़कियों की इतनी हिम्मत!

इसी हिम्मत का दंड 19 यजीदी लड़कियों को भुगतना पड़ा था,

पाठकों को स्मरण होगी वह घटना जब आईएसआईएस के आतंकियों ने सेक्स स्लेव बनने से इंकार करने पर 19 यजीदी लड़कियों को जिंदा जला दिया था। मीडिया के अनुसार

‘उन्होंने आईएस आतंकियों के साथ सेक्स से इनकार कर दिया था इसलिए उन्हें मारा गया।’ एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जब 19 लड़कियों को जलाया गया तो सैंकड़ों लोग इसे होते देख रहे थे। इस वीभत्स सजा से बचाने के लिए कोई भी आगे नहीं आया।“

https://twitter.com/azzatalsaleem/status/872208043273887744

यह जो इंकार का दुस्साहस है, वही इन लड़कियों की मौत का कारण बनता है कि आखिर इंकार कर कैसे दिया? क्योंकि काफिर लडकियाँ तो माल-ए-गनीमत होती हैं। निकिता तोमर ने इंकार करने का दुस्साहस किया तो उसे सरे आम गोली मार दी गयी।

जो ऐसी हत्याएं होती हैं, वह कट्टरपंथी इस्लामी विस्तारवादी मानसिकता का प्रदर्शन करती हैं, जहाँ पर यह विकल्प दिया जता है कि या तो हमारी बात मानो या फिर मैं तुम्हें मार दूंगा। बस यही विमर्श है इसके अतिरिक्त कुछ नहीं। प्यार में सिरफिरे आशिक जैसी बातें इस विमर्श से ध्यान हटाने की चाल है। न ही निकिता वाले मामले में प्यार का लेनादेना था क्योंकि जब भी ऐसे मामले होते हैं तो उसमें लड़की की धार्मिक पहचान मिटाना पहली शर्त होती है, जैसा हम रोज ही देखते हैं।

यह हत्या होती है उस खीज की, जो उस एक काफिर की कोख को कब्जे में न ले पाने के चलते उपजती है। तभी मंदिरों के गर्भगृह पर आक्रमण किया जाता है और मंदिर के गर्भगृह पर कब्जे का प्रयास होता है जिससे उस गर्भ में अपना विमर्श स्थापित कर सकें!

एक एक लड़की, जो भी इस जाल का शिकार होती है, वह इसीलिए शिकार होती है क्योंकि संघर्ष यही है कि उसकी कोख से जो नया जन्म होगा वह किस विमर्श का होगा? कबीलाई तहजीब का या युगों युगों से सनातनी सभ्यता का! हर सभ्यता की लड़की उस सभ्यता को आगे ले जाने का माध्यम है, वह इसे अपनी कोख के माध्यम से करती है, जब वह अपनी ही संस्कृति के पुरुष से प्रेम करती है, वह नई संस्कृति को अपनी कोख में पल्लवित करती है!

और जो कबीलाई मानसिकता है वह इसी पर अपना अधिकार जमाने की कोशिश करती है! यही जंग है, यही सांस्कृतिक पहचान नष्ट करने का षड्यंत्र है!

फीचर्ड इमेज- twitter से साभार

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1 COMMENT

  1. हिन्दुओ के साथ जब कोई घटना घटती है तो यही जो धर्म की राजनीति करने वाली सरकार जो अपने आप को हिन्दुत्त्व की पार्टी बोलती है यही पार्टी के नेता मूक हो जाते है। जब ऐसी घटना को जब कोई अंजाम देता है तो अपराधी को बड़ी देर से रिरफ्तार किया जाता है । यदि कोई हिन्दू धर्म का व्यक्ति अपने धर्म के बचाव के लिए दो शब्द भी बोल दे तो उसे तुरंत गिरफ्तार करके जेल में डलवा दिया है। मैं क्या कहूं ऐसी अंधी बहरी सरकारो के लिए 🙏🏽🙏🏽🙏🏽

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