“जहाँ खामेनेई कर रहे थे शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक, उस जगह की पूरी जानकारी थी इजरायल-अमेरिका के पास: जानें किस तरह की प्लानिंग से उतारा मौत के घाट”, ऑपइंडिया, मार्च 01, 2026
“28 फरवरी 2026 की सुबह मिडिल ईस्ट के इतिहास में एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज हो गई, जिसने पूरे क्षेत्र की राजनीति, सुरक्षा और शक्ति-संतुलन को हिला दिया। यह हमला किसी सामान्य सैन्य कार्रवाई की तरह नहीं था, न ही यह अचानक लिया गया फैसला था। यह महीनों की खुफिया तैयारी, लगातार निगरानी, सिग्नल इंटरसेप्शन, सैटेलाइट ट्रैकिंग और बेहद गहरी रणनीतिक प्लानिंग का नतीजा था, जिसे मिलकर अंजाम दिया गया था इजरायल और अमेरिका द्वारा। इस ऑपरेशन का असली निशाना ईरान की इमारतें या सैन्य ढाँचे नहीं थे, बल्कि उसकी पूरी शीर्ष नेतृत्व संरचना थी यानी सत्ता का केंद्र, निर्णय लेने वाला दिमाग और कमांड सिस्टम।
महीनों की खुफिया तैयारी और एक ऐतिहासिक मौका
इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियाँ लंबे समय से एक ही मौके की तलाश में थीं, वह क्षण जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, राष्ट्रपति और शीर्ष सैन्य कमांडर एक ही स्थान पर, एक ही मीटिंग में मौजूद हों। यह साधारण जानकारी नहीं थी। इसके लिए हजारों घंटे की निगरानी, लगातार डिजिटल ट्रैकिंग, जासूसी नेटवर्क और अंदरूनी सूत्रों से मिलने वाली सूचनाओं का इस्तेमाल किया गया।
जैसे ही यह पुख्ता सूचना मिली कि तेहरान में एक अत्यंत गोपनीय बैठक होने वाली है, जिसमें ईरान की पूरी शीर्ष नेतृत्व एक साथ मौजूद होगी, उसी पल इस ऑपरेशन को हरी झंडी दे दी गई। रणनीति साफ थी, एक ही वार में पूरी कमांड चेन को तोड़ देना, ताकि ईरान की निर्णय लेने की क्षमता को गहरा झटका लगे। यह सिर्फ लोगों को मारने का ऑपरेशन नहीं था, बल्कि पूरे सिस्टम को अस्थिर करने की योजना थी…….”
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