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Monday, October 18, 2021

पंजाब में रूपनगर में रामलीला में व्यवधान, शिकायत दर्ज

पंजाब इन दिनों कई कारणों से चर्चा में है, और हाल फिलहाल समाचार यह है कि अब रामलीला का विरोध पंजाब की धरती पर हो रहा है। पंजाब में पिछले दिनों रूपनगर में रामलीला में जाकर सिख युवकों द्वारा उत्पात मचाया गया। और रामलीला संचालकों का यह आरोप है कि शिकायत करने पर भी पुलिस नहीं पहुँची। हालांकि आज दो आरोपितों के विरुद्ध मामला दर्ज हो गया है

दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार रूपनगर में श्री राम लीला मैदान में में श्री सनातन धर्म रामलीला कमेटी द्वारा रामलीला का संचालन किया जा रहा था। शनिवार रात को कुछ युवकों ने उसमें व्यवधान डाला और उन्होंने न केवल आयोजकों को गाली देना शुरू कर दिया बल्कि साथ ही उन्होंने प्रभु श्री राम के लिए भी अपशब्द कहे।

आयोजकों ने उन सिख युवकों को समझाने का प्रयास किया, परन्तु उन युवकों ने कमिटी के आयोजकों को भाजपा का एजेंट बताया और उन्होंने कुछ नहीं सुना। पूरे पंडाल में डर और दहशत का माहौल हो गया और काफी समय तक मंचन बंद रहा। इससे हिन्दुओं में और वहां उपस्थित प्रभु श्री राम के भक्तों में रोष और क्षोभ उत्पन्न हो गया।

हर वर्ष आयोजित होने वाली राम लीला में इस प्रकार के व्यवधान से आयोजकों में रोष है और उन्होंने कहा कि पुलिस को इस विषय में सूचित किया गया, परन्तु पुलिस ने उस समय कोई कदम नहीं उठाया। इतना ही नहीं कुछ कथित किसान भी किसान आन्दोलन के झंडे लेकर आ गए और उन्होंने किसान आन्दोलन के नारे लगाए।

हालांकि इस विषय में किसान जत्थेबंदियों से बात की गए तो उन्होंने अपना हाथ होने से इंकार कर दिया।

हिन्दू धर्म से अलग दिखाई देने की इच्छा कुछ सिखों में इस सीमा तक बढ़ गयी है कि अब वह हिन्दू भगवान का अपमान करने से भी नहीं चूक रहे हैं। किसान आन्दोलन के बहाने खालिस्तानी अलगाव पैर पसारता जा रहा है और हिन्दुओं के प्रति कटुता बढ़ती जा रही है। हिन्दुओं ने ऐसा क्या किया है कि उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार हो? कारण शायद ही समझ आए, परन्तु ऐसा हो रहा है।

हाल ही में सुखबीर सिंह बादल ने जब माँ चिंतपूर्णी के मंदिर के जाकर प्रार्थना की थी तो इस पर भी विवाद हुआ था और “रोजाना पहरेदार” नामक एक अखबार के सम्पादक ने अपने लेख में अपमानजनक टिप्पणी करते हुए माँ चिंतपूर्णी के लिए बेगानी माँ शब्द का प्रयोग किया था। उन्होंने लिखा था कि अपने पेओ नूं छड सुखबीर पहुंचेआ बेगानी मां के दरबार’।

तस्वीर : साभार opindia

इस घटना के बाद कई हिन्दू संगठनों ने विरोध करना आरम्भ कर दिया था। हिन्दू नेताओं ने कहा था कि वह सभी धर्मों का पूरा आदर करते हैं, परन्तु पंजाबी अखबार के संपादक ने माँ चिंतपूर्णी के विषय में अभद्र टिप्पणी की है।

उन्होंने विरोध प्रदर्शन किया था और साथ ही विरोध के बाद ही अखबार के सम्पादक के विरुद्ध शिकायत दर्ज हुई थी, हालांकि सम्पादक के पक्ष में सिख संगठन उतर आए थे।

किसान आन्दोलन के नाम पर अब रामलीला बंद कराना यह प्रदर्शित करता है कि यह आन्दोलन अब किसानों का न रहकर केवल और केवल सरकार और हिन्दू विरोध का रह गया है। लखीमपुर खीरी में भी यह घृणा देखने को मिली थी। जिस प्रकार से शुभम मिश्रा और शेष लोगों को लाठियों से मारा गया, वह अपने आप में यह बताने के लिए पर्याप्त है कि इस आन्दोलन में हिन्दुओं के प्रति घृणा अपने चरम पर पहुँच चुकी है।

ऐसा एक नहीं कई बार इस कथित किसान आन्दोलन में दिखा है, और कहीं न कहीं खतरा अब बढ़ता जा रहा है।

पंजाब से जुडी एक और खबर यह भी है कि पंजाब सहित तीन राज्यों में बीएसएफ के अधिकार में केंद्र सरकार द्वारा वृद्धि कर दी गयी है और अब बीएसएफ के पास यह अधिकार हो गया है कि वह 50 किलोमीटर तक वह तलाशी और गिरफ्तारी कर सकती है।

इसे लेकर पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गयी है क्योंकि कांग्रेस, अकालीदल और आम आदमी पार्टी तीनों ने ही इस कदम को पंजाब पर केंद्र के अधिकार के रूप में बताया है। कांग्रेस नेता सुनील जाखड ने तो पंजाब के मुख्यमंत्री पर ही इस आधार पर प्रश्नचिन्ह लगा दिए कि क्या उन्होंने केंद्र सरकार को आधा पंजाब सौंप दिया है? उन्होंने कहा कि पंजाब का कुल क्षेत्रफल 50,000 वर्ग मीटर है, उसमें से अब केंद्र सरकार के पास 25,000 वर्गमीटर तक बीएसएफ के अंडर आ गया है। पंजाब पुलिस के अधिकार कम हो गए हैं।

इससे पहले टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार ने ट्वीट करते हुए लिखा कि क्रोनोलोजी, 5 अक्टूबर को पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने गृहमंत्री से सीमाएं सील करने के लिए अनुरोध किया था, एक सप्ताह के बाद ही गृहमंत्रालय ने बीएसएफ का यह अधिकार बढ़ा दिया कि वह सीमा के भीतर 50 किलोमीटर तक खोज कर सकती है, तलाशी ले सकती सकती है, जब्ती कर सकती है और गिरफ्तार कर सकती है।

केंद्र सरकार के इस कदम के बाद पंजाब के राजनीतिक माहौल में गर्मी आना स्वाभाविक है! परन्तु हिन्दू समाज के साथ वहां पर क्या हो रहा है, वह देखना और उस पर कदम उठाना अत्यधिक आवश्यक है, क्योंकि जो भी हो रहा है, वह सामजिक कटुता ही उत्पन्न करेगा।

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