“ ‘मेरी हिंदू बेटी अब मुझे और मेरे बेटे को जान से मारना चाहती है’: पिता ने ऑपइंडिया से बयाँ किया दर्द, कहा- वसीम, इकरा और नेहा खान ने किया बेटी का ब्रेनवॉश; नमाज भी सिखाया”, ऑपइंडिया, जुलाई 08, 2026
“कल्पना कीजिए कि एक आदमी, जिसकी पत्नी नहीं है और वो माँ-बाप दोनों का फर्ज निभाते हुए अपनी 19 साल की बेटी और 17 साल के बेटे को संभाल रहा है, उसकी बेटी एक दिन ऐसे जिहादियों के संपर्क में आ जाती है, कि वो उसी पिता को जान से मारने के लिए आतुर हो जाती है। उस लड़की का ऐसा ब्रेनवॉश किया जाता है कि वो लोगों से कहती है कि उसके पिता और भाई को जहर दे दिया जाए ताकि वो धर्मांतरण कर ले। वो लड़की जो कभी मन से व्रत रखती थी, भगवान की पूजा करती थी, अब नमाज और हिजाब पहनना सीख रही है।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र के मैनापुर गाँव से ऐसा ही हैरान और परेशान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक ब्राह्मण हिंदू परिवार की 19 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर उसका धर्म परिवर्तन कराने और उसके जरिए पूरे परिवार को खत्म करने की एक गंभीर साजिश का खुलासा हुआ है।
यहाँ वसीम नाम के युवक, उसका परिवार, लड़की को दो सहेलियाँ इकरा खान और नेहा खान ने मिलकर युवती का इस कदर ब्रेनवॉश कर दिया है कि वह अपने ही पिता और भाई की जान लेने पर आमादा हो गई है। जब ऑपइंडिया की पत्रकार सौम्या सिंह ने पीड़ित पिता से बात की, तो उन्होंने अपनी बेटी के बदले व्यवहार, घर में मिले नमाज और हिजाब के सबूतों और परिवार को मिल रही धमकियों को लेकर अपनी गहरी चिंता जताई। उनकी आवाज से साफ समझा जा सकता था कि वे आज कितना बेबस महसूस कर रहे……,,”
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(Devanagari comment is not accepted, writing in English)
Thanks to Hindu organization महाकाली वाहिनी that bravely came forward to help aggrieved parents of minor Hindu girl who bacame victim of romance grooming and love jihad by motivated Mohammadans.
It is also a serious matter that mainstream media outlets and other agencies and even governmental agencies totally deny this open and blatant systematic abuse by Mohammadans. Hindu people in these “secular” organizations now need to join and support Hindu organizations, because this fight is best handled by putting organised pressure. Individual Hindus, otherwise may suffer from insecurity, fear and panic without organizational support, and may chose to keep quiet or run away, or may be driven away. This fight cannot be handled alone, it requires mutual organizational support.
The daughter is certainly in a dilemma: if she does not kill her father & brother, she will be pushed to a slow, agonizing death!
A shocking exposure of a grim story!