“ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैया जी जोशी कहते हैं, चिंतन के स्तर पर देश कश्मीर से कन्या कुमारी तक व्याप्त है , पर कृति करने के लिए मैं जहां खड़ा हूँ, जिस नगर में रहता हूँ वही मेरा देश है। जिस समाज में रहता हूँ, उसकी समस्या मेरी समस्या है। उसके सुख-दुख मेरे सुख-दुख हैं। जहां नागरिक इस वृहद-विचार के साथ रहते हैं , वहाँ का जीवन अधिक समृद्ध हो जाता है।
बुन्देलखंड के महाराजा छत्रसाल और छत्रपति शिवाजी के मध्य हुई मुलाकात को देखें : हुआ यूँ कि महाराजा छत्रसाल, देश को मुग़ल आतंक-अत्याचार से मुक्त करने के महान कार्य में को सफल बनाने में जुटे छत्रपति शिवाजी के पास इस आग्रह के साथ पहुंचे कि वो भी उनके सहयोगी बन कर उनके साथ रह कर कार्य करना चाहते हैं। ‘ ये अभियान पूरे देश में स्वराज्य स्थापना को लेकर है , कब तक चलेगा कुछ पता नहीं ?’- शिवाजी ये खूब जानते थे। वो ये भी जानते थे कि व्यक्ति केंद्रित , क्षेत्र विशेष में सिमटा हुआ कोई भी प्रयास टिकाऊ नहीं हो सकता । देश के सम्पूर्ण भू-भाग के सामूहिक प्रयास से ही इसे सफल बनाया जा सकता है ।
छत्रसाल को शिवाजी का जवाब था – ‘ मैँ जो यहाँ कर रहा हूँ , वही आप अपने स्थान पर रहकर करते हुए भी मेरे इस कार्य को आगे बढ़ाने में सहयोग कर सकते हैं। ’
छत्रसाल वापस अपने राज्य में लौट गए। शिवाजी की आत्म-निरपेक्ष, राष्ट्र-परक दूर दृष्टि और लक्ष्य की विशालता की अनुभूति उन्हें हो चुकी थी ; और अब उन्हें क्या करना है इसकी भी ! ”
सेवा भारती , सिद्धपुर (सीहोर) द्वारा संचालित विवेकानंद संस्कार केंद्र( फ्रीगंज , मंडी ) में संगठन के जिला समिति के सदस्य आयोजन के मुख्य वक्ता ने हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव की पावन स्मृति में उपरोक्त प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि शिवाजी का उद्देश्य सम्पूर्ण देश को विदेशी आक्रांताओं से मुक्त कर स्वराज्य की स्थापना करना था।
इस अवसर पर संस्कार केंद्र में आने वाले बालक-बालिकाओं सहित उनके अभिभावक उपस्थित रहे।
