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Tuesday, October 4, 2022

जेम्स ऑफ बॉलीवुड सहित विरोध करने वालों को बॉलीवुड गैंग बना रहा निशाना: लगा है ‘ब्रह्मास्त्र’ के बहाने बॉलीवुड का सब कुछ दाँव पर!

बॉलीवुड अब बुरी तरह से बौखलाया हुआ है। अब वह हर कीमत पर अपने विरोधियों को कुचल देना चाहता है। अब वह हर वह कदम उठा रहा है, जो कोई भी तानाशाह उठाता है। ब्रह्मास्त्र फिल्म, जो पहले ड्रैगन के नाम से बन रही थी और वह फिल्म एक पर्शियन कवि जलालुद्दीन रूमी पर आधारित थी। वही रूमी जो भारतीयों को गंदा और काला कहा करता था,

जेम्स ऑफ बॉलीवुड ने जब से बॉलीवुड की फिल्मों के विषय में विस्तार से बताना आरम्भ किया है कि कैसे वह हिन्दूओं के प्रति घृणा से भरी हुई हैं, तब से वह बॉलीवुड के निशाने पर है। परन्तु बॉलीवुड जो पूरी तरह से उर्दूवुड ही है, जिसके लिए उर्दू ही सर्वेसर्वा है। उनके लिए सूफियाना संगीत ही संगीत है, फेमिनिज्म से फिल्मों के विषय को बर्बाद करना है। इस फिल्म में हालांकि उन्होंने शीर्षक बदल लिया, पूरी थीम बदल दी, मगर गाने, संवाद वही हैं:

पंरतु ब्रह्मास्त्र को लेकर इतना बौखलाए क्यों हुए हैं? क्यों बॉयकाट करने वालों को निशाने पर लिया जा रहा है और क्यों केआरके को इस प्रकार हिरासत में लिए जाने पर जश्न मनाया जा रहा है? क्या इससे लगता है कि वह वास्तव में डरा हुआ है, ब्रह्मास्त्र में सब कुछ दाँव पर लगा हुआ है? करण जौहर का नाम, कपूर और भट्ट खानदान के “चश्मेचिरागों” का कैरियर आदि आदि! परन्तु बॉलीवुड के ऐसे लोग को जो चाहते हैं कि यह पूरा हिन्दू घृणा से भरा हुआ उद्योग जो परोसे हिन्दू वही देखे,

और जब हिन्दू अपनी बात कहे तो उसपर आरोप लगाए जाएं? यहाँ तक कि जेम्स ऑफ बॉलीवुड के twitter हैंडल को लेकर प्रश्न उठा रहे हैं, जबकि वह खुद ही फंसे जा रहे हैं:

बॉलीवुड यह समझ नहीं रहा है कि लोग हिन्दू घृणा को नहीं देखना चाहते हैं। लोग केआरके की गिरफ्तारी पर भी प्रश्न उठा रहे हैं!

लाल सिंह चड्ढा के समय में देखा था कि कैसे कमाल आर खान ने एडवांस बुकिंग की असलियत बताई थी, तो क्या इस बार कमाल आर खान को जानबूझकर फंसाया जा रहा है? और शिकायतें की जा रही हैं? ऐसा लोगों का दावा किया जा रहा है। इन्टरनेट पर लोग कह रहे हैं कि एक ओर सलमान खान लोगों को मारने के बाद भी फ्री है तो वहीं केआरके को जेल में भेजा जा रहा है!

लोग यह कह रहे हैं कि केआरके को ब्रहमास्त्र को बचाने के लिए ही गिरफ्तार किया गया है

बॉलीवुड का बॉयकाट किसी प्रकार का व्यक्तिगत विरोध नहीं बल्कि हिन्दू घृणा के प्रति सामूहिक प्रतिकार है

बॉलीवुड को बॉयकाट करने का जो ट्रेंड है, वह किसी भी प्रकार से और किसी भी व्यक्ति के लिए व्यक्गित नहीं है। किसी की रोजी रोटी न ही बॉलीवुड से चलती है और न ही ऐसा है कि बॉलीवुड नहीं होगा तो लोग भूखों मरेंगे। बल्कि मनोरंजन के नाम पर हिन्दू धर्म के प्रति जो बॉलीवुड ने घृणा फैलाई है, उसकी कोई थाह नहीं है।

बॉलीवुड ने जो सांस्कृतिक प्रदूषण किया है, उसे हटाने में कितना समय लगेगा यह नहीं पता है। आरम्भ से ही एक विशेष विचारधारा वाले लोगों का वर्चस्व बॉलीवुड पर रहा, परन्तु जहाँ पहले हिन्दू घृणा कम थी या फिर संकेतों में थीं, वह समय के साथ वामपंथी एवं कट्टर इस्लामी विचारधारा के संगम के साथ और भी तेज होती गयी।

धीरे धीरे हिन्दुओं के प्रति घृणा बॉलीवुड की फिल्मों का केन्द्रीय विषय बन गया और हिन्दू-धर्म सुधार उनका उद्देश्य बन गया! खुद आकंठ डूबे रहे पापों में, उनके निजी जीवन अंडरवर्ल्ड के साए में रहे, और उन्होंने कहा कि वह समाज सुधार के लिए फ़िल्में बना रहे हैं।

राजनीतिक एजेंडा के अनुसार फ़िल्में बनने लगीं, जैसा कबीर खान ने खुद स्वीकार किया था कि बजरंगी भाई जान में चिकन वाला गाना केवल राजनीतिक एजेंडे के चलते ही डाला गया था। यह सभी को पता है कि आम हिन्दू गाय के विषय में क्या सोचता है? उसके बाद भी बीफ खाने को महिमामंडित किया गया और ब्रह्मास्त्र को हिन्दू फिल्म कहकर प्रचारित करने वाले रणवीर कपूर खुद बीफ खाते हुए पाए गए और अपनी पहचान पेशावरी बताते हुए पाए गए

बॉलीवुड से उन हिन्दू लड़कियों के लिए न्याय की आवाज नहीं आती है जो मुस्लिम कट्टरपंथ का और लव जिहाद का शिकार होती हैं

लोगों के मन में बार बार यह प्रश्न उठता है कि बॉलीवुड से कभी कोई स्वर हिन्दू हितों के लिए क्यों नहीं उठता है? हिन्दुओं को अपमानित करने के लिए कई बार अयोध्या के मुद्दे उठाए गए, किसी न किसी कारण से 2002 के दंगों को उठाया जाता रहा, परन्तु कश्मीरी हिन्दुओं सहित किसी भी ऐसे मामले को नहीं उठाया गया जिसमें हिन्दू पीड़ित था! यहाँ तक कि कश्मीर पर जो भी फ़िल्में बनीं उनमें “हिन्दू भारत” द्वारा मुस्लिम कश्मीर पर अत्याचार के चलते मुस्लिमों का आतंकवादी बनना दिखाया गया, परन्तु किसी भी फिल्म में कश्मीरी हिन्दुओं पर हुए अत्याचार नहीं दिखाए गए।

और जिस फिल्म में दिखाए गए और जो फिल्म पिछले वर्ष की सबसे सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी, अर्थात कश्मीर फाइल्स तो उसे बॉलीवुड वालों ने बहिष्कृत कर दिया। फिल्मफेयर अवार्ड्स में उस फिल्म का ऐसा बहिष्कार किया गया कि एक भी व्यक्ति को उसमें आमंत्रित ही नहीं किया गया।

आखिर क्या कारण है जो बॉलीवुड इस हद तक हिन्दुओं के प्रति घृणा से भरा है! और कठुआ काण्ड में हिन्दुओं पर शर्म करने वाला बॉलीवुड, उन तमाम लड़कियों पर नहीं बोल रहा है, जिन्हें लव जिहाद के चक्कर में मारा जा रहा है! अंकिता को जलाकर मारने के मामले पर भी वह मौन रहा है और जब एक ओर हिन्दू लड़कियों को एक संगठित जाल में फंसाकर मारा जा रहा है, उस समय पर अंतरंगी रे जैसी फ़िल्में हिन्दुओं को खलनायक दिखा रही थीं!

इस समय भी किसी ने यह नहीं कहा है कि अंकिता को न्याय मिलना चाहिए यहाँ तक कि नुपुर शर्मा का समर्थन करने पर सर तन से जुदा के नारे लगाने पर भी किसी ने यह नहीं कहा कि हिन्दुओं के जीवन की सुरक्षा होनी चाहिए!

यह जो प्रतिकार है, वह इतने वर्षों तक हिन्दुओं के प्रति उस घृणा का प्रतिकार है, जो उनके ही धर्म को लेकर घोली जाती रही और हिन्दुओं के ही पैसों से उन्हें अपमानित किया जाता रहा! अब हिन्दू यह सहने के लिए तैयार नहीं हैं! वह कह रहे हैं, कि नहीं अब नहीं!

और यही कारण है कि अब ब्रह्मास्त्र को लेकर हर तरह के दाँव चले जा रहे हैं! देखना होगा कि क्या इस बार यह चाल सफल होती है या फिर हिन्दुओं की एकता जीतती है!   

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