हमें क्या …यह सनातन समाज का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है मुगलो की गुलामी से लेकर अंग्रेजो की तानाशाही सहने तक का यह सबसे बड़ा कारण था जो आज भी सनातन समाज की मानसिकता में विध्यमान है । इतिहास सब जानते हैं तो उस पर क्या ही चर्चा की जाए लेकिन वर्तमान को देखते हुए भविष्य में क्या होने वाला है यह देखकर भी समाज मौन है जो की पीड़ादायक है ।व्यापरियों के व्यापार छीने गए , घर की अश्मिता को लूटा गया , न बेटी सुरक्षित थी न सम्मानजनक रोटी थी मजहबी जिहाद ने हिन्दुओ को कभी भी उस स्थान पर रहने नहीं दिया जहाँ उनकी संख्या ज्यादा थी इसी पीड़ा को कुंडा विधायक राजा भैया ने सार्वजनिक रूप से क्या कहा इस्लाम से ज्यादा सनातनी समाज ही प्रश्न उठाने लगा । बात सनातन की है अकेले क्षत्रिय कुल में जन्मे रघुराज प्रताप सिंह की नहीं वैश्य कुल में जन्मे भामाशाह को हमने शायद विस्मृत कर दिया जब उन्होंने धर्म रक्षा हेतु महाराणा प्रताप के लिए अपने धन भंडार खोल दिए थे, हम शायद ब्रह्मण कुल में जन्मे बाजीराव पेशवा को भी भूल चुके जो सनातन के नाम पर प्रत्येक जाती और प्रत्येक राज्य के लिए मजहबी कटटरपंथ से लड़े, हम शायद महादलित समाज के वीर आदिवासी भील योद्धाओं को भी भूल चुके जिन्होंने सनातन समाज के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया था, हम उन दलित समाज के धर्म योद्धाओं को भी भूल चुके हैं जो संत रविदास और महर्षि बाल्मीकि की जयकार का उद्घोष करते हुए न सिर्फ कटटरपंथियो से लड़े बल्कि प्रभु राम मंदिर आंदोलन में अपने प्राणो का भी बलिदान कर दिए ।
राजा भैया जो अपने राजनितिक जीवन में आरम्भ से लेकर आज तक विजयी हैं उन्होंने सनातन एवं संविधान की रक्षार्थ बात क्या कह दी मजहबी कटटरपंथियों से ज्यादा हिन्दू ही जातिगत विभाजन की बात करने लगे आखिर राजा भैया को क्या आवश्यकता थी सनातन रक्षा की बात करने की उनकी राजनीति तो दशकों से बढ़िया चल रही है । एक सत्य कहें जो सच्चे सनातन प्रहरी होते हैं वे अपने पूरे जीवन निर्भीक होकर कार्य करते हैं चाहे जीवन रहे या मिले मृत्यु, चाहे यश मिले या अपयश का विष , चाहे संघर्ष मिले या स्वजनों का षड्यंत्र वो कभी रण का त्याग नहीं करते बल्कि सब प्रभु का प्रसाद मानकर अपना पुरुषार्थ करते रहते हैं लेकिन धर्म उन्हें कभी क्षमा नहीं करता जो मौन धारण कर लेते हैं जो परुषार्थ करने वालो का साथ नहीं देते ।
आज यही कारण है इस्लामिक तंत्र निरंतर मजबूत हो रहा है उनका धन , बल , समय और बुद्धि किसी भंडारे , कथा , भजन संध्या , वृक्ष रक्षा , प्रकर्ति रक्षा , गौ रक्षा में नहीं लगता बल्कि सामूहिक रूप से इस्लाम को मजबूत करने में लगता है और सनातनी हिन्दू समाज बाकी सब चीजों में लगा रहेगा पर जब बात सनातन को मजबूत करने की हो , मुखर सनातनियों के साथ खड़े होने की हो तो वही पुरानी बात हमे क्या …..
प्रत्येक सनातन प्रहरी हिन्दू तो होगा पर प्रत्येक हिन्दू सनातन प्रहरी बने यह सबसे ज्यादा आवश्यक है अतः जातिगत मतभेद को जन्म न देकर राजा भैया जैसे सशक्त सनातन प्रहरी का हर सम्भव साथ दें क्यूंकि सनातन की लड़ाई लम्बी और चुनौतियों से भरी हुई है यदि हमने आज अपने धर्म प्रहरियों का साथ नहीं दिया तो न हमारी रोटी बचेगी न बेटी जरा एक बार कश्मीर केरल और पश्चिम बंगाल को स्मरण अवश्य कर लेना ।
— दिव्य अग्रवाल
