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Tuesday, November 30, 2021

दीपावली झूठे और हिन्दू विरोधी अकादमिक विमर्श पर एक करारा तमाचा है!

आज दीपावली है और आज ही के दिन प्रभु श्री राम अपना चौदह वर्ष का वनवास समाप्त कर वापस अयोध्या लौटे थे। प्रभु श्री राम के अयोध्या आगमन को हम आज भी उसी उत्साह और भक्ति से स्मरण करते हैं। प्रभु श्री राम, धर्म के जीवंत प्रतीक हैं। वह विश्व की आत्मा हैं। जहाँ धर्म है (रिलिजन नहीं), वहां राम हैं। जहाँ भाई अपने भाई के लिए प्रेम भाव से भरा हुआ है, वहीं राम हैं। जहाँ व्यक्ति अन्याय का विरोध करने के लिए उस युग के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से संघर्ष करने का प्रण करता है, वहीं राम हैं।

जहाँ पुत्र पिता के वचनों का पालन करने के लिए अपना अधिकार त्याग देता है, वहीं राम हैं। राम युगों युगों से हैं और युगों युगों तक रहेंगे। राम का नाम मिटाने का प्रयास आज से आरम्भ नहीं हुआ है, बल्कि वह भी सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा है। परन्तु राम का विरोध करने वाले आज कहाँ है, यह भी देखे जाने की आवश्यकता है। प्रभु श्री राम हमारे अन्तस में समाए हैं, वह कोई बाहरी नहीं हैं, जिन्हें आलम्बित कर दिया है, बाहर से किसी का आरोपण नहीं हुआ है, बल्कि प्रभु श्री राम हमारी चेतना में युगों युगों से समाए हुए हैं।

प्रभु श्री राम के आज अयोध्या आगमन की यात्रा हर हिन्दू की यात्रा है। हर हिन्दू राम नवमी पर उनके जन्म का उत्सव मनाता है, हर हिन्दू प्रभु श्री राम के चौदह वर्ष के वनवास को लेकर उसी प्रकार अश्रु बहाता है, जैसे उस समय बहाए गए थे।

प्रभु श्री राम को उनकी जन्मभूमि से ही बाहर करने के जो षड्यंत्र किए गए, उनसे न ही इतिहास अछूता है और न ही जन मानस! मानस के राम को मिटाने के षड्यंत्र किए गए। आततायी आए, इस्लामी आक्रमणकारियों ने सबसे पहले हिन्दुओं के राम को ही तोड़ने का प्रयास किया। क्योंकि राम चेतन हैं, राम जड़ होना नहीं सिखाते, राम प्रेम सिखाते हैं तो साथ ही अन्याय का विरोध करना भी सिखाते हैं। राम सिखाते हैं, प्रतिरोध करना। वह प्रेम के कर्तव्यों एवं कर्तव्यों के प्रेम को समझाते हैं। राम ही हैं जो बताते हैं कि शक्ति के साथ ही क्षमा धर्म का पालन हो सकता है।  प्रभु श्री राम का समस्त जीवन ही विश्व के लिए आदर्श है। परन्तु समय के साथ प्रभु श्री राम को आदर्श रूप से हटाने का प्रयास हुआ। और एक बार नहीं बार बार, प्रभु श्री राम का अपमान किया गया।

एक ओर इस्लाम और ईसाई पंथों का इतिहास खोजने का कोई प्रयास नहीं हुआ, तो दूसरी ओर प्रभु श्री राम का जन्म कहाँ हुआ, या वह सत्य थे या नहीं, इसे अकादमिक विमर्श का एक अनिवार्य अंग बना लिया एवं बार बार हिन्दू आस्थाओं पर प्रहार किया गया।  हिन्दू राम की पूजा न कर पाएं, इसके निरंतर प्रयास किए गए और रामचरित मानस जैसे महाकाव्य को होमर के इलियाड या ओडिसी के समानांतर रख दिया गया।

एक ओर थी हमारी प्रभु श्री राम की जीवनगाथा, जो जीवंत थी और जिसने हिन्दुओं के मध्य एक साहस का संचार किया था, जिसने प्रभु श्री राम के जीवन चरित्र को इतनी सरल और सहज भाषा में व्यक्त किया था, कि साधारण हिन्दू के भीतर आक्रान्ता मुगलों के सम्मुख सिर उठाने की शक्ति आ गयी थी। उस महाग्रंथ को अकादमिक विमर्श का हिस्सा बना लिया एवं प्रभु श्री राम को उन लोगों के विमर्श का विषय बना दिया, जिनके लिए वह मिथक थे।

https://www.hindujagruti.org/news/66114.html

जीवंत धर्म प्रभु श्री राम को कभी अकादमिक विमर्श तो कभी संस्कृति मानकर धार्मिक आदर्श से दूर करने के प्रयास हुए। कभी कहा गया कि यह कहीं प्रमाण नहीं है कि यही अयोध्या महाराज मनु की बसाई अयोध्या है! परन्तु यह प्रमाणित करने में महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण को संज्ञान में नहीं लिया गया।

https://thefederal.com/opinion/evolutionary-logic-and-history-contradict-belief-rama-was-born-in-ayodhya/

वह राम जिनके पावन नाम से महर्षि वाल्मीकि आदि कवि बन गए! आदि कवि वाल्मीकि, जो प्रभु श्री राम के ही समकालीन थे, उनके द्वारा बताए गए विवरण को किनारे रखकर कभी यह प्रमाणित करने का प्रयास किया गया कि प्रभु श्री राम तो थे, परन्तु यह अयोध्या नहीं! परन्तु प्रभु श्री राम को अकादमिक विमर्श का हिस्सा बनाने वाले स्वयं ही आज कहाँ हैं, यह देखने की आवश्यकता है।

दीपावली इसी लिए हर्ष का पर्व है क्योंकि यह हमारे प्रभु श्री राम के चौदह वर्ष के वनवास काटकर वापस आने का पर्व है। यह दीपमालाएं इसलिए अपने सौन्दर्य से मन मोहती हैं, क्योंकि इनमें प्रभु श्री राम के आगमन का सौन्दर्य समाया हुआ है। हिन्दुओं का यह पर्व फेस्टिव सीजन नहीं है, वह धार्मिक पर्वों से भरा हुआ। प्रभु श्री राम की विराटता इसी बात से समझी जा सकती है कि जो बार बार मंदिर तोड़ते थे, वह प्रांत आज खंडहरों में ही जीवित है और प्रभु श्री राम को आदर्श मानने वाले हिन्दू आज भी भव्यता से पर्व मना रहे हैं।

सोमनाथ पर भगवा आज भी फहरा रहा है और अब शीघ्र ही उसी अयोध्याजी में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर समस्त हिन्दुओं की ही विजय के प्रतीक में ही नहीं निर्मित होगा बल्कि साथ ही वह उस आततायी मजहब को भी एक उत्तर है कि विध्वंस चाहे कितना हो, प्रभु श्री राम का आगमन ही प्रकाश लाएगा!

आज वही प्रकाश पर्व है, अयोध्या जी में दीप जल रहे हैं, और विदेशों से लोग प्रभु श्री राम की भव्यता देखकर परिचित हो रहे हैं फिर से प्रभु श्री राम की महिमा से! यह प्रभु श्री राम के नाम की शक्ति है, यह हिन्दुओं की शक्ति है!

दीपावली और राममंदिर निर्माण समस्त झूठे अकादमिक विमर्श पर एक तमाचा है, जिसने अब तक ईसाइयत और इस्लाम और वामपंथ के साथ मिलकर हिन्दुओं के साथ अन्याय किया है!

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