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Saturday, March 2, 2024

तमिलनाडु में ईसाई आतंक गृह : संस्थापक और कर्मचारियों द्वारा मानसिक रूप से बीमार लोगों को प्रताड़ित करना, नशीले पदार्थ देना और बलात्कार शामिल है

ईसाई गृह अन्बु जोथी आश्रम

तमिलनाडु में “मानसिक रूप से अस्थिरों” के लिए एक ईसाई गृह को सभी प्रकार की अवैध गतिविधियों में लिप्त पाया गया। बचाए गए लोगों ने खुलासा किया है कि घर के कर्मचारियों और संचालकों ने उन्हें शारीरिक एवं मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, भूखा रखा और उनका बलात्कार किया। ईसाई दंपति,पीड़ितों पर लगाम लगाने के लिए उन‌ पर बंदर छोड़ देते थे। यह संदेह है कि वे अवैध अंग कटाई उद्योग में भी शामिल हैं। 

तमिलनाडु के विल्लुपुरम में एक ईसाई संस्थान, जिसका हिंदू प्रतीत होता, नाम अन्बु जोथी आश्रम है, को मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों की देखभाल करने के नाम पर, प्रताड़ित करते पाया गया। सलीम खान नाम के एक व्यक्ति ने 2021 में अपने चाचा जफरुल्लाह को इस संस्थान में भर्ती कराया। फिर वह अमेरिका चला गया और एक साल बाद लौटा।लौटने पर जब वह संस्थान में अपने चाचा से मिलने गया तो उन्हें गायब पाकर सन्न रह गया।

उसने अपने चाचा को ढूंढने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। अदालत ने विल्लुपुरम पुलिस को जफरुल्लाह को ढूंढने का निर्देश दिया। जब पुलिस उसे खोजने गई और एक मेडिकल टीम के साथ ‘आश्रम’ का निरीक्षण कर रही थी तो कर्मचारियों ने उन दो बंदरों को उन पर छोड़ दिया जिन्हें ईसाई दंपति ने उस घर के पीड़ितों को प्रताड़ित करने के लिए पाल रखा था। कई पुलिस कर्मचारी और मेडिकल टीम के सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

 अगली बार जब वे फिर से पूरी सावधानी और तैयारी के साथ गए तो उन्होंने पीड़ितों को जेल जैसे कमरों में बंद,अलग-अलग स्तरों की चोटों के साथ पीड़ित पाया।कथित तौर पर बेहोश होने पर पीड़ितों को नशीला पदार्थ पिलाया जाता और उनके साथ बलात्कार किया जाता।वहीं रहने वाली दो उत्तर भारतीय महिलाओं ने महिला आयोग की टीम को, उन्हें नशीला पदार्थ खिलाकर दुष्कर्म करने की बात बताई। उन्होंने बताया कि जो सहयोग नहीं करते थे उन्हें एक अंधेरे कमरे में बंद कर दिया जाता था।

कैदियों को लोहे की छड़ों और पाइप आदि से पीटा जाता था और कर्मचारियों ने उन्हें आतंकित करने के लिए दो बंदर भी रखे थे जो उन पर छोड़ दिए जाते थे। निरीक्षण के बाद पीड़ितों को अन्य घरों में भेज दिया गया और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

 इन खुलासों के बाद कई लोगों ने शिकायत की है कि संस्था में भर्ती उनके रिश्तेदार गायब हैं। छापे के दौरान पुलिस को पता चला कि जुबीन,तमिलनाडु, केरला, कर्नाटक और राजस्थान में इस तरह के कई और संस्थान चलाता है। अनजान कारणों से गृह के पीड़ितों को अन्य संस्थानों में भेज दिया जाता था।

 पुलिस को वहां मिले रिकार्डों से पता चला कि पंद्रह पीड़ितों को बेंगलुरु स्थित होम में भेजा गया था लेकिन वे वहां नहीं मिले। संचालकों  द्वारा यह आरोप लगाया गया कि  वे बाथरूम की खिड़की तोड़कर फरार हो गए थे।

 विल्लुपुरम के उलुंदुरपेट की एक तैंतीस वर्षीय महिला को उस घर में भर्ती कराया गया था। कुछ महीनों में वह ठीक हो गई  और उसने वहीं रहने वाले एक व्यक्ति से, जो कि अब स्वस्थ हो गया था, शादी कर ली ।

 जुबिनऔर उसकी पत्नी मारिया उस समय राजस्थान स्थित संस्थान गए हुए थे। महिला ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार को बताया कि जब वे लौटे और उन्हें इस शादी के बारे में पता चला तो मारिया ने उनका मंगलसूत्र छीन लिया और उस के पति को पुडुचेरी के पास कोट्टाकुप्पम स्थित संस्थान में भेज दिया गया और उस महिला को विल्लुपुरम में एक संस्थान में भेज दिया गया। कोट्टाकुप्पम गृह के पीड़ितों ने भी उन पर हुए शारीरिक यातनाओं और बलात्कार जैसे घृणित दुष्कर्मों का खुलासा किया है।

 जुबिन बेबी और उसकी पत्नी मारिया केरल के एर्नाकुलम के रहने वाले हैं। जुबिन नेअपने शुरुआती वर्षों में एक ‘निजी घर’ में काम किया और 2005 में बारह पीड़ितों के साथ विल्लुपुरम घर की स्थापना की।शुरुआती चरण में इसे एक छोटे से किराए के घर में चलाया जाता था परन्तु बाद में इसे लोहे की  खिड़कियों और गेट के साथ एक पूर्ण विकसित सुधार घर के रूप में विकसित कर दिया गया जिसमें पीड़ितों को जंजीरों में जकड़ कर प्रताड़ित किया जाता था। जुबिन ने कुछ एजेंट लगाए हुए थे, जो निराश्रित, मानसिक रूप से बीमार और गरीब लोगों को उसके पास लाते थे इसके बदले वह उन्हें कुछ पैसे देता था। उन्होंने कुछ साल पहले लाइसेंस के लिए आवेदन किया था लेकिन इसे खारिज कर दिया गया था क्योंकि उनके पास पर्याप्त कर्मचारी, मेडिकल टीम, काउंसलर आदि नहीं थे।

 अधिकारियों ने 2022 में आवेदन को खारिज कर दिया था क्योंकि उनके पास संस्थान निवासियों की पहचान दिखाने के लिए उचित दस्तावेज, स्वच्छता प्रमाण पत्र, और उचित आहार की कोई योजना नहीं थी। तथाकथित संस्थान पिछले सत्रह वर्षों से बिना वैध लाइसेंस के स्वतंत्र रूप से संचालित हो रहा है। जुबीन को पहले कोयंबटूर में ऐसे ही एक संस्थान में, शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह से स्वस्थ लोगों को, बंद कर के रखने के लिए गिरफ्तार किया गया था ।

 कुछ अन्य ‘मानवाधिकार कार्यकर्ताओं’ के साथ उन्होंने सड़कों, बस स्टैंड, और रेलवे स्टेशन से कुछ लोगों को उठाया और उन्हें मानसिक रूप से बीमार बताया।

फिर जबरदस्ती उनके सिर मुंडवा दिए गए, उनके कपड़े बदले गए, उनकी संपत्ति छीन ली गई और उन्हें मानसिक रुप से बीमार लोगों की तरह पेश किया गया और एक घर में बंद कर दिया गया। जब स्थानीय लोगों ने उनकी पीड़ित आवाजें सुनी तो संबंधित अधिकारियों को सूचित किया। निरीक्षण के दौरान ही पता चला कि इस इमारत में सभी को उनकी मर्जी के खिलाफ रखा जा रहा था और शारीरिक शोषण किया जा रहा था।

 अन्बु जोथी आश्रम के यूट्यूब चैनल ने लोगों को दफनाने के वीडियो पोस्ट किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस तरह के दफनाने को अधिकृत करने वाले पुलिस के नकली दस्तावेज घर के संचालन में मददगार साबित हुए हैं।आशंका जताई जा रही है कि जुबीन और उसकी पत्नी अवैध अंग कटाई और उसके व्यापार में शामिल हो सकते हैं। 2018 में कांचीपुरम स्थित सेंट जोसेफ मरणासन्न  रोगियों के अस्पताल में और अन्य जगहों पर,बिना उचित दस्तावेज के,अपने परिसर के अंदर बने कंक्रीट तहखानों में निराश्रितों को दफनाए जाने की भी खबर मिली है।

ये घटना मीडिया में सुर्खियों में रही लेकिन संस्था के संस्थापक फादर थॉमस के बचाव में कैथोलिक बिशप आगे आए। जांच के दौरान कई विसंगतियां पाई गई और उस धर्मशाला को कुछ समय के लिए बंद भी कर दिया गया लेकिन चर्च के दबदबे और भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से उसे फिर से क्रियाशील कर दिया गया।अक्टूबर 2022 में, जब यहां के पीड़ितों ने भुखमरी और शारीरिक शोषण की शिकायत की,तब यह फिर से खबरों में आ गया ।

चूंकि ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं, तो कई लोगों ने मौजूदा मुद्दे की सीबीआई जांच की मांग की है। डीजीपी शैलेंद्र बाबू ने मामले को सीबी-सीआईडी को स्थानांतरित करने का आदेश दे दिया है. जुबिन,उसकी पत्नी मारिया और छह अन्य लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने चार दोषियों को गिरफ्तार कर लिया है। मद्रास हाई कोर्ट ने मामले की स्थिति रिपोर्ट मांगी है। इसी बीच,जैसा कि डीएमके सरकार का, ऐसे मामलों में ईसाइयों का बचाव करने का इतिहास रहा है, इसीलिए तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के.अन्नामलाई ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मामले को, सीबीआई को देने का निर्देश देने की मांग की है।

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