“ब्रिटेन में इस्लामोफोबिया की नई परिभाषा ने बढ़ाई भारतीयों की चिंता, क्यों डर रहे हिंदू और सिख?”, न्यूज़ 18, मार्च 22, 2026
“ब्रिटेन की लेबर सरकार इस्लामोफोबिया को मुस्लिम विरोधी शत्रुता के रूप में दोबारा परिभाषित करने और एक एंटी-इस्लामोफोबिया जार (Tsar) नियुक्त करने के फैसले ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है. हिंदू और सिख समुदाय से जुड़े आलोचकों और अल्पसंख्यक समूहों का मानना है कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगा सकता है और परोक्ष रूप से देश केा ईशनिंदा कानून की तरफ धकेल सकता है. यही वजह है कि बड़े स्तर पर इसे लेकर विरोध की आवाजें अब उठने लगी हैं. इसे वोट-बैंक के लिए उठाया गया कदम बताया जा रहा है.
नई परिभाषा और कानूनी चुनौतियां
ब्रिटेन के फ्री स्पीच यूनियन ने इस परिभाषा के खिलाफ कानूनी मोर्चा खोल दिया है. उनके साथ नेटवर्क ऑफ सिख ऑर्गनाइजेशन (NSO), क्रिश्चियन इंस्टीट्यूट और विमेन पॉलिसी सेंटर भी शामिल हैं.
· तर्क: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नफरत फैलाने वाले भाषण के खिलाफ पहले से ही कड़े कानून मौजूद हैं. नई परिभाषा इतनी व्यापक है कि यह इस्लाम की वैध आलोचना को भी अपराध की श्रेणी में ला सकती है…….”
पूरा लेख न्यूज़ 18 पर पढ़ें
