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Wednesday, August 17, 2022

“भारत में बीवी और बच्चों को डर लगता है” कहने वाले आमिर खान को क्या वास्तव में डर लगा? लोगों से कहा “प्लीज़ मेरी फिल्म का बॉयकाट न करें।”

जैसे जैसे आमिर खान की फिल्म “लाल सिंह चड्ढा” के प्रदर्शन की तिथि निकट आती जा रही है, वैसे वैसे ही लोगों की उत्सुकता बढती जा रही है। रोज ही twitter पर लाल सिंह चड्ढा ट्रेंड हो रही है, और सबसे मजेदार यही है कि संभवतया पहली बार ऐसा हो रहा है कि आमिर खान की कोई फिल्म आ रही है और लोग उसे फ्लॉप करवाने के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं।

twitter पर #BoycottLaalSinghChaddha ट्रेंड हो रहा है। लोग आमिर खान के पुराने वक्तव्य याद कर रहे हैं। दरअसल आमिर खान ने जब यह कहा था कि उनकी बीवी और बच्चों को भारत में रहने से डर लगता है और असुरक्षा का अनुभव होता है, लोग तभी से उनसे गुस्सा है, परन्तु अधिकाँश गुस्सा है फिल्म पीके से।

पीके फिल्म हिन्दी फिल्म इतिहास की ऐसी फिल्म कही जाएगी जिसमें हिन्दू देवताओं का इतना अपमान हुआ हो। वैसे तो थोडा थोडा हिन्दू विरोधी तत्व आमिर खान अपनी लगभग हर फिल्म में डालते आए थे, परन्तु फिर भी पीके फिल्म एक ऐसी फिल्म थी, जिसने हिन्दू देवी देवताओं के अपमान की हर सीमा पार कर दी थी।

मात्र एक हिन्दू लड़की और पाकिस्तानी मुस्लिम लड़के का प्यार दिखाने के लिए हिन्दुओं को हर मोड़ पर अपमानित किया। उसने मंदिर में जाकर चप्पलों में ताला डाला जैसे कि मंदिरों में लोग चप्पल चोरी करने आते हैं। उसके बाद यह न समझते हुए कि दानपात्र दरअसल सरकार के हैं और मंदिर के नहीं, उसने मंदिर के दानपत्र पर प्रहार किया।

और उसके बाद जब वह पेशाब कर रहा है, उस समय उसकी अटैची में भगवान जी के स्टीकर लगे हुए हैं। और उसमें हिन्दुओं को हर प्रकार से लालची दिखाया कि महात्मा गांधी की तस्वीर की कोई कद्र नहीं है, बस रूपए की कद्र है। और यह सब कर कौन रहा है, हिन्दू दुकानदार। अब बेचारा हिन्दू दुकानदार जो चीजें बेच रहा है, उसके पैसे भी न मांगे।

और उस पर महादेव के अपमान का जो दृश्य है, वह इतना शर्मनाक है कि उसे देखकर ही क्रोध उत्पन्न हो जाता है। जब पीके फिल्म को लेकर हिन्दू न्यायालय की शरण में गए थे तो यही कहा गया था कि जिन्हें फिल्म नहीं देखनी है, वह न देखें। दिल्ली उच्च न्यायालय ने ही कहा था कि इस फिल्म में कुछ गलत नहीं है और यहाँ तक कि उच्चतम न्यायालय ने ही यह कहा था कि अगर किसी को फिल्म पसंद नहीं है तो वह न देखें।

फिल्म न देखना यह दर्शकों के ही हाथ में है और यह उनका अधिकार है।

और यही तो फिल्म की अभिनेत्री करीना कपूर ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि हमें स्टार दर्शकों ने ही तो बनाया है और किसी ने नहीं। किसी ने फ़ोर्स तो किया नहीं है कि आप फिल्म देखने जाए ही जाएं। मत जाइए न।

उच्चतम न्यायालय यह कहते हैं कि फिल्म पसदं नहीं तो देखने न जाएं और करीना कपूर ने भी कहा कि दर्शकों ने ही तो हमें स्टार बनाया है, तो मत जाओ देखने, ऐसे में लोग कह रहे हैं कि  लाल सिंह चड्ढा को देखने नहीं जाएंगे तो समस्या क्या है?

लोगों ने सोशल मीडिया पर ट्रेंड किया और फिर यह सामने आया कि लोगों के दिल में इस फिल्म को लेकर कितना गुस्सा है? वैसे आमिर खान की कई बातें और लोगों को याद आ रही हैं, जैसे उनका हर हीरोइन के हाथ पर थूकना।

लोगों ने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लाल सिंह चड्ढा अच्छी या बुरी फिल्म है, मुझे इसलिए नहीं यह फिल्म देखनी है कि यह उसे इकोसिस्टम से बनी फिल्म है जो हिन्दुओं से घृणा करता है और सर तन से जुदा को फंड करता है।

उर्दूवुड मेरी कब्र नहीं खोद सकता है।

लोग पीके फिल्म को लेकर वीडियो बनाकर पोस्ट कर रहे हैं कि आमिर खान की एक फिल्म देखने से बेहतर है कि पैसे गरीब को दान कर दिए जाएं

लोग दक्षिण की फिल्मों से तुलना कर रहे हैं कि कैसे दक्षिण भारत का सिनेमा हिन्दू देवी देवताओं का आदर करता है तो एक ओर बॉलीवुड है जो उन्हें अपमानित करता है:

लोग आमिर खान के सत्यमेव जयते शो की उस बात का भी उल्लेख कर रहे हैं कि शिव लिंग पर दूध चढ़ाने की कीमत 20 रूपए है, अगर यह पैसे गरीब बच्चों को दिए जाएं तो

लोग पीके फिल्म को लेकर वीडियो बना रहे हैं:

लोगों के दिल में आमिर और करीना के अतीत को लेकर बहुत क्रोध है और फिल्म पीके के कारण यह क्रोध बहुत गुना है। लोग महादेव के अपमान को भुला नहीं पाए हैं और यही कारण है कि सोशल मीडिया पर हो रहे इस विरोध के चलते आमिर खान भी डर गए हैं और अब वह लोगों से अपील कर रहे हैं कि वह उनकी फिल्म “लाल सिंह चड्ढा” का विरोध न करें, क्योंकि कुछ लोग सोचते हैं कि वह देश से प्यार नहीं करते, परन्तु वह देश से बहुत प्यार करते हैं। प्लीज़ उनकी फिल्म का बॉयकाट न किया जाए, और उनकी फिल्म देखी जाए।

यह बॉलीवुड का वह चेहरा है जो अपनी जरा सी आर्थिक हानि से डर गया है, परन्तु जो अभी तक वह हिन्दुओं के साथ खेल खेलता हुआ आया है, उसके विषय में उसे तनिक भी ग्लानि नहीं है कि उसने एक ऐसे प्राचीन एवं सबसे सहिष्णु धर्म का अपमान निरंतर किया है और एक एजेंडे के अंतर्गत बदनाम किया है, जिसने अपनी धरती पर सभी को शरण दी है,जो चींटी तक में अपने प्रभु का दर्शन कर लेता है। जिसका मूल मन्त्र ही सर्वे भवन्तु सुखिनः का रहा है, जहां पर हर सम्बन्ध के लिए आदर्श है, जो सहज प्रहार नहीं करता, जो सभी को प्रेम देना जानता है और उसकी इसी विशेषता के चलते उसकी ही अस्मिता पर बारम्बार प्रहार किए गए।

खान लॉबी से पहले भी बॉलीवुड ने जमकर हिन्दुओं को नोचा खसोटा है, अब सूचना के इस दौर में लोग जान गए हैं कि आखिर क्या खेल हुआ है उनके साथ। अब वह कह रहे हैं कि हमारी मर्जी होगी तभी देखने जाएंगे, नहीं तो नहीं।

हिन्दुओं से घृणा करने वाले बॉलीवुड ने हिन्दुओं का उपहास उड़ाती हुई फ़िल्में बनाईं और उसके बाद यह आशा व्यक्त की कि लोग इस घृणा को देखने आएँगे, जब लोगों ने प्रतिकार आरम्भ किया तो हिन्दुओं को ही कोसा गया, उन्हें ही असहिष्णु कहा गया और घृणा फ़ैलाने वाला कहा गया।

परन्तु आज तक घृणा किसने फैलाई है, इस पर बॉलीवुड के हिन्दू विरोधी गैंग को विचार करना ही होगा, और आमिर खान जैसे लोग जो भारत से पहले अपने मजहब को कहीं न कहीं रखते हैं और तुर्की में जाकर फोटो शूट कराते हैं, उनके विरुद्ध लोगों के दिल में गुस्सा और भी तेजी से बढ़ा है।

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