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Thursday, August 11, 2022

आजमगढ़ और रामपुर में खिला कमल, सपा के गढ़ में पंचर हुई साइकिल!

उत्तरप्रदेश की राजनीति में आज जिन दो लोकसभा सीटों के परिणामों पर सब लोग टकटकी लगाए बैठे थे, वह पूरी तरह से खलबली मचाने वाले प्रमाणित हुए। आजमगढ़ और आजम के गढ़ अर्थात रामपुर में भारतीय जनता के प्रत्याशी जीते हैं।

सोशल मीडिया पर प्रचारित हो रहा है कि न ही रहा आजमगढ़ और न ही रहा आजम का गढ़! यह चुनाव साधारण चुनाव नहीं थे और न ही यह उपचुनावों जैसे उपचुनाव थे। यह चुनाव समाजवादी पार्टी के अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण थे एवं साथ ही यह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व के लिए भी महत्वपूर्ण थे।

कहा जा रहा था कि जनता में बुलडोजर की कार्यवाही के प्रति गुस्सा है, एवं जिस प्रकार से नुपुर शर्मा तथा नवीन जिंदल को लेकर पार्टी के भीतर कार्यवाही की गयी थी, उससे भी कहीं न कहीं ऐसा माना जा रहा था कि एक बड़ा वर्ग भारतीय जनता पार्टी से कुपित है और हो सकता है कि वह उसे मत न दे। फिर भी तमाम अनुमानों को धता बताते हुए रामपुर एवं आजमगढ़ दोनों में जिस प्रकार से यह जीत हुई है, वह तमाम राजनीतिक पंडितों को अचरज में डालने वाली है।

आजमखान एवं अखिलेश यादव का आत्मविश्वास

सपा नेता आजमखान एवं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव को यह पूरा विश्वास था कि समाजवादी पार्टी ही यह दोनों सीटें जीतेगी। परन्तु जिस प्रकार से नुपुर शर्मा प्रकरण को लेकर प्रदेश में हिंसा और आगजनी की गयी थी, उसने कहीं न कहीं हिन्दू मतों को एकजुट कर दिया। आजमगढ़ में तो अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेन्द्र यादव समाजवादी पार्टी की ओर से प्रत्याशी थे। तो वहीं रामपुर में भारतीय जनता पार्टी के घनश्याम लोधी ने सपा के असीम राजा को लगभग 42,000 मतों से पराजित किया:

निरहुआ की जीत पर अजित अंजुम ने ट्वीट किया कि

रामपुर में आज़म खान के होते हुए एसपी उम्मीदवार का हारना और बीजेपी का जीतना क्या कहता है ?

इस पर कथित निष्पक्ष पत्रकारों ने अपने अनुसार वही टिप्पणियाँ कीं, जो की जा सकती थीं जैसे निष्पक्ष पत्रकार वसीम अकरम त्यागी ने लिखा कि अब्दुल्ला आजम खान की ट्विटर टाइमलाइन देखनी चाहिए। वहां मतदान के रोज़ की वीडियो हैं, वहां पुलिस ने इतना ख़ौफ बैठाया कि सपा का वोटर मतदान के लिये घर से नही निकल पाया।

कई लोगों ने कहा कि मुस्लिमों ने तो सपा को वोट दिया, परन्तु यादवों ने भाजपा को वोट दिया है।

परन्तु फिर भी यह बात समझ से परे है कि भारत माता को डायन कहने वाले एवं न जाने कितनी जमीन को जबरन कब्जाने वाले आजम खान कथित सेक्युलर पत्रकारों में इतने लोकप्रिय क्यों है कि यह लोग मानकर ही चल रहे थे कि रामपुर और आजमगढ़ दो ऐसे क्षेत्र हैं, जहां से समाजवादी पार्टी कभी हार ही नहीं सकती है।

अपनी जीत को निरहुआ ने जनता की जीत बताते हुए ट्वीट किया कि आजमगढ़वासियों आपने कमाल कर दिया है। यह आपकी जीत है। उपचुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही जिस तरीके से आप सबने भाजपा को प्यार, समर्थन और आशीर्वाद दिया, यह उसकी जीत है। यह जीत आपके भरोसे और देवतुल्य कार्यकर्ताओं की मेहनत को समर्पित है।

इस पर लोगों ने अजित अंजुम की वर्ष 2019 के चुनावों की क्लिपिंग चलानी आरम्भ कर दी, जिसमें जोशीले निरहुआ का उपहास अजित अंजुम ने उड़ाया था,

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे अजित अंजुम निरहुआ का उपहास उड़ाते हुए दिखाई दे रहे हैं। तो वहीं कुछ लोगों ने उनका बहुत पुराना वीडियो साझा करते हुए लिखा कि निरहुआ चले संसंद:

एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सपा में भाजपा को हराने की क्षमता नहीं

वहीं इन दो प्रतिष्ठित सीटों पर सपा की हार को लेकर एआईएमआईएम के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने तंज कसा है। बीबीसी के अनुसार  “रामपुर और आज़मगढ़ चुनाव के नतीजे से साफ़ ज़ाहिर होता है कि सपा में भाजपा को हराने की न तो क़ाबिलियत है और ना क़ुव्वत। “मुसलमानों को चाहिए कि वो अब अपना क़ीमती वोट ऐसी निकम्मी पार्टियों पर ज़ाया करने के बजाये अपनी खुद की आज़ाद सियासी पहचान बनाए और अपने मुक़द्दर के फ़ैसले ख़ुद करे।”

इन दोनों ही सीटों पर विजय को योगी आदित्यनाथ ने दूरगामी संदेश देने वाली जीत बताया और लिखा कि “डबल इंजन की भाजपा सरकार की आजमगढ़ व रामपुर में डबल जीत प्रदेश की राजनीति में 2024 के चुनाव के लिए दूरगामी संदेश दे रही है।

लोकसभा चुनावों में उत्तरप्रदेश एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में रामपुर एवं आजमगढ़ दोनों ही ऐसे क्षेत्रों की जीत जो सपा एवं मुस्लिम राजनीति का एक बड़ा केंद्र माना जाता है, वहां पर भारतीय जनता पार्टी की जीत हिन्दुओं के मध्य आई उस जागरूकता को भी बताती है जो बार बार जुम्मे की नमाज के बाद पैदा हुई हिंसा के कारण उत्पन्न हुई है और साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि इस बार रामपुर एवं आजमगढ़ के हिन्दुओं ने निर्भय होकर मत दिया है!

यह भी कहा जा सकता है कि अब भारतमाता को डायन कहने वाली राजनीति का दौर समाप्त होने को है!

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