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Sunday, May 26, 2024

वंदे भारत ट्रेन पर पथराव – पश्चिम बंगाल सरकार ने दोषियों पर कार्यवाही करने के स्थान पर बंगाल भाजपा अध्यक्ष और पत्रकारों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की

कोई भी अपराध होने पर सरकार को क्या करना चाहिए? अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही करनी चाहिए या अपराध के बारे में सूचना देने वालो के विरुद्ध कार्यवाही करनी चाहिए? आप में से अधिकाँश लोग कहेंगे कि अपराधियों के विरुद्ध होनी चाहिए। यह तार्किक और विधि सम्मत बात है, लेकिन लगता है पश्चिम बंगाल की सरकार इसके विपरीत सोच रखती है, और यह उनके कार्यों से लगता भी है। हम बात कर रहे हैं पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में वन्दे भारत ट्रैन पर हुए पत्थरबाजी की घटनाओं की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 दिसंबर को गुजरात से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये वंदे भारत एक्सप्रेस का उद्घाटन किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 दिसंबर को मां हीरा बेन को मुखाग्नि देने के बाद पश्चिम बंगाल को पहली वंदे भारत एक्सप्रेस की सौगात दी थी। वंदे भारत ने 1 जनवरी से अपनी यात्रा शुरू की है, यह लगभग 550 किमी की दूरी तय करती है। यह हावड़ा से चल कर अपने गंतव्य स्थान न्यू जलपाईगुड़ी तक पहुंचने में साढ़े सात घंटे से थोड़ा अधिक समय लेती है।

दुर्भाग्य की बात हैं कि उद्घाटन के पश्चात ट्रैन पर पत्थरबाजी की कुछ घटनाएं हो चुकी हैं। पिछले हफ्ते हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी के मार्ग पर इस ट्रैन पर पत्थरबाजी हुई थी, जिससे ट्रैन को कुछ क्षति हुई थी, सौभाग्य से किसी यात्री को कोई हानि नहीं हुई थी। इस समाचार को समाचार पत्रों और सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया, और इस प्रकार की घटनाओं पर चिंता भी जताई गयी।

इन घटनाओं को रोकने के लिए कोई व्यवस्था करने और दोषियों पर कोई भी कार्यवाही करने के स्थान पर पश्चिम बंगाल सरकार ने इस घटना को प्रसरिती करने के लिए भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार और कई समाचार पत्रों और पत्रकारों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की है। ऐसा बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार इस घटना से कुपित है, और उनके अनुसार इन घटनाओं से राज्य की बदनामी हो रही है । एक अधिकारी के अनुसार यह घटना जब हुई तब ट्रैन बिहार से होकर गुजर रही थी, इसलिए इसका दोष पश्चिम बंगाल पर लगाना अनुचित है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले कहा था कि राज्य में घटना होने की फर्जी खबर फैलाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यहाँ जानकारी के लिए बता दें, कि अज्ञात बदमाशों ने इससे पहले भी उत्तर बंगाल के मालदा में वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव किया था। यह घटना मालदा जिले के कुमारगंज में उस समय हुई जब हावड़ा-न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन अपने दूसरे दिन की यात्रा कर रही थी। रेलवे के अनुसार इस पथराव से कोच सी-13 के दाहिनी ओर का एक दरवाजा क्षतिग्रस्त हो गया था।

वन्दे भारत पर पथराव ने लिया राजनीतिक मोड़

केंद्रीय पंचायत राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल सोमवार रात कोलकाता पहुंचे थे। वंदे भारत एक्सप्रेस पर हमले पर उन्होंने कहा कि उन्होंने भी इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में जानकारी प्राप्त की है। देश को विकास के पथ पर आगे ले जाने के लिए ऐसी ट्रेनें चलाई जा रही हैं और इन पर किसी भी राज्य में पथराव नहीं होना चाहिए। जिस राज्य में ऐसी घटनाएं हो रही हैं, उन्हें इस पर नियंत्रण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन से बंगालियों को लाभ मिल रहा है, ऐसे में यह पथराव क्यों?

घटना को लेकर बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा, “बंगाल को उत्तर से दक्षिण को जोड़ने के लिए वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर की सख्त आवश्यकता है। जब सड़कों और एयरपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की बात आती है, तो ममता बनर्जी लगातार बुरा प्रदर्शन कर रही हैं । अब वह वंदे भारत को भी सुरक्षित नहीं कर सकती हैं! उन्हें शर्म आनी चाहिए।”

बता दें राज्य में हाल ही में शुरू की गई सातवीं बंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव की शिकायतें मिली हैं। सोमवार को भी यात्रियों के एक समूह ने हावड़ा से न्यू जलपाईगुड़ी जाने वाले रास्ते में मालदा के प्रवेश द्वार पर बंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव की शिकायत की थी। हालांकि, यह साफ नहीं हो पाया है कि पत्थर उस दिन फेंका गया था या कुछ दिन पहले। लेकिन बार-बार पथराव की इस घटना को लेकर राजनीतिक दबाव बनना शुरू हो गया है, और ममता सरकार की इस कार्यवाही से यही लग रहा है कि वह विपक्ष और मीडिया को एक अनकही चेतावनी दे रही हैं।

रेलवे कर रहा है पथराव की घटनाओं को रोकने का प्रयास

वन्दे भारत ट्रैन पर पथराव की घटनाओं के मामले की जानकारी देते समय ईस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने मीडिया से कहा था कि यह एक सामाजिक बुराई है। रेलवे लगातार अभियानों को चलाकर इसको हल करने के लिए अपने स्तर पर सर्वोत्तम प्रयास करता रहा है। रेलवे सुरक्षा बल भी नियमित रूप से अभियान चला कर स्थानीय लोगों से ट्रेनों पर पत्थर नहीं फेंकने की अपील करते रहते हैं, और ऐसे नियमित जागरुकता अभियानों के कारण ऐसी घटनाओं की संख्या में कमी भी आई है।

जहां तक इस घटना की बात है, तो इसके बारे में पुलिस को जानकारी दी गई और अब वह रेलवे सुरक्षा बल की सहायता से इस मामले की जांच कर रही है। यह पूरी तरह से कानून और व्यवस्था का विषय है, जिसमे राज्य सरकार ज्यादा उत्तरदायी होती है।

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