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Monday, October 25, 2021

बांग्लादेश में माता रानी के पंडालों पर हमले और दुर्गा पूजा को सेक्युलर बनाने का प्रपंच

बांग्लादेश में पिछले दो तीन दिनों से हिन्दुओं पर हमले हो रहे हैं। इस बार इनकी व्यापकता अधिक है तथा दुर्गा पूजा के कई पंडाल इस वर्ष तोड़ दिए गए हैं। पूरे देश में दुर्गा पूजा के पंडालों को तोडा जा रहा है।  अभी हाल ही में बांग्लादेश हिन्दू यूनिटी काउंसिल ने एक ट्वीट किया है, जिसमें उनकी यह पीड़ा समझी जा सकती है, जिसमें एक मुस्लिम बाहुल्य देश में हिन्दुओं की पीड़ा समझी जा सकती है।

उन्होंने ट्वीट किया कि प्रिय प्रधानमंत्री। अगर बांग्लादेश के मुस्लिम नहीं चाहते हैं तो बांग्लादेश के हिन्दू पूजा नहीं करेंगे पर कम से कम हमले तो रुकवाइये। हिन्दुओं को बचाइये तो। अभी तक हमले हो रहे हैं, प्लीज़ सेना भेजिए। पूजा मंडपों में बांग्लादेश की सेना भेजिए।

यह देखना अत्यंत पीड़ादायक है कि हिन्दुओं को उनकी ही धरती पर पूजा करने का अधिकार नहीं है। क्या बांग्लादेश में रहने वाले हिन्दू इंसान नहीं हैं।

बांग्लादेश में दो दिनों से जो रहा है, वह पूरा विश्व देख रहा है और कथित शांतिप्रियों की यह धृष्टता भारत में भी एक बड़ा वर्ग आराम से देख रहा है, जो तालिबानियों को अपना आदर्श मानता है। बांग्लादेश से आने वाले वीडियो भयावह है और वहां के हिन्दुओं की दुर्दशा की कहानी कह रहे हैं। एडवोकेट गोबिंद चन्द्र ने कई ट्वीट करते हुए वहां की स्थितियों का विवरण किया है।

इससे पहले बांग्लादेश हिन्दू यूनिटी काउंसिल ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि हम एक ट्वीट में नहीं बता सकते हैं कि पिछले चौबीस घंटों में क्या हुआ है। बांग्लादेश के हिन्दू कुछ लोगों के असली चेहरे देख चुके हैं। हमें नहीं पता कि आने वाले कल में क्या होगा। मगर बांग्लादेश के हिन्दू कभी भी वर्ष 2021 की दुर्गापूजा नहीं भूल पाएंगे।

जैसा कि प्राय: देखा जाता है और यह कट्टर इस्लामियों की एक प्रवृत्ति होती है कि वह अचानक से ही कुरआन के अपमान का आरोप लगाकर पूरे समुदाय को निशाना बनाते हैं। ऐसा ही बांग्लादेश में दुर्गापूजा के अवसर पर हुआ प्रतीत हो रहा है।

एक यूजर ने वीडियो साझा करते हुए लिखा कि गोपनीय तरीके से पंडाल में घुसकर कुरआन को भगवान के चरणों में रखकर कोमिला में ननुआ दिघी के तट पर पूजा मंडप को तोड़ रहे हैं। माँ की प्रतिमा को नदी में फेंक दिया है

इसी घटना का एक वीडियो हिन्दू वौइस् ने भी कल साझा करते हुए लिखा था कि मुस्लिम भीड़ ने कोमिला बांग्लादेश में 9 दुर्गा पूजा मंडप नष्ट कर दिए हैं। और सैकड़ों की संख्या में मुस्लिमों ने आज सुबह हमला कर दिया था, अभी तक हमला चल रहा है। हिन्दू डरे हुए हैं। पुलिस भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम हुई है।

क्या पहले से किसी ने इसकी योजना बनाई थी? क्या हिन्दुओं के खिलाफ इतना जघन्य कार्य करने के लिए पहले से कोई तैयारी की गयी थी, यह प्रश्न एक फेसबुक पोस्ट से उठे, जिसे बांग्लादेश हिन्दू यूनिटी काउंसिल ने भी साझा किया था।

एक रोचक बात और देखने को मिली थी कि एक हैशटैग बनाया गया था। #DurgaPuja4All। इस हैशटैग के माध्यम से हिन्दुओं को विशेषकर संस्कृति के प्रति जागरूक हिन्दुओं को कट्टर प्रदर्शित करने की योजना सी प्रतीत होती है, क्योंकि कई ट्वीट से ऐसा ज्ञात हुआ। एक यूजर asifrahman ने ट्वीट करते हुए लिखा कि

हम बांग्लादेश में दुर्गापूजा के पंडाल तोड़े जाने की निंदा करते हैं। मेरा भगवान तुम्हारे भगवान से बेहतर है, यह भक्त कल्चर है, इसे अपना न बनाइये!

अर्थात, कुछ मुट्ठी भर लोगों ने दुर्गा पूजा को एक सेक्युलर त्यौहार बनाते हुए उसे उत्तर प्रदेश और शेष देश से अलग करते हुए स्वयं को एक विशेष रूप में प्रस्तुत किया था। इन लोगों की प्रोफाइल एक विशेष प्रकार की प्रोफाइल थी क्योंकि उनमें उत्तर भारत के प्रति एक विशेष हिकारत का भाव था।

इतना ही नहीं इन सभी प्रोफाइल्स में कथित किसान आन्दोलन के प्रति प्रेम था। और उसमें लखीमपुर खीरी का भी उल्लेख था, और हाँ कथित जूता पंडाल भी यही था

यह देखना अपने आप में दुखद है कि कैसे माँ की आराधना न करने वालों को सेक्युलरिज्म के नाम पर माँ के पंडाल में प्रवेश करवाया जा रहा है।  जो माँ पर विश्वास करेगा वह कभी उत्तर, दक्षिण, बंगाल आदि में विभाजित नहीं होगा और न ही इस प्रकार की धृष्टता करेगा कि #DurgaPuja4All चलाकर हिन्दुओं के उस वर्ग को अपना शिकार बनाए जो कट्टर इस्लाम के आक्रमण को झेल रहा है।

इस ट्रेंड ने कितनी हानि की है, उसका अनुमान stories of bengali hindus के इस ट्वीट से दिख जाता है, जिसमें उन्होंने लिखा है: #DurgaPuja4All हैशटैग एक क्रूर मजाक है। कई एकाउंट्स जिन्होनें बहुत गंभीर होकर इस हैशटैग का प्रयोग किया, उन्होंने हर साल होने वाले हमारे लोगों पर हमलों और तोड़फोड़ को धो दिया। हमें अभी तक एक भी वर्ष ऐसा नहीं लगता है, जब हमारी पूजा बिना किसी हमले के हुई हो!

अब एक प्रश्न यह उठता है कि क्या भाजपा और आरएसएस का विरोध करने के लिए एक वर्ग हिन्दू देवी देवताओं का प्रयोग भी अपनी राजनीति के लिए कर रहा है और जिसके कारण हिन्दुओं का दुःख नहीं दिख नहीं रहा है, हिन्दू पिट रहा है, मर रहा है, दुर्गा माँ के पंडाल नष्ट हो रहे हैं और लिबरल उत्तर भारत के हिन्दुओं के प्रति घृणा से भरे होकर #DurgaPuja4All का ट्रेंड चला रहे हैं!

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