“आरफा खानम और निवेदिता मेनन! लव जिहाद के बहाने हिंदू महिलाओं को नीचा दिखाने का षड्यन्त्र”, विश्व सेवा केंद्र, जून 06, 2026
“लव जिहाद को नकारने वालों को यह शब्द समझ नहीं आता है। लव जिहाद उसी घटना को कहा जाता है, जिसमें मुस्लिम पुरुष अपनी मजहबी पहचान बदलकर या छिपाकर या फिर जिस समुदाय की लड़की को टारगेट करना है, उसकी पहचान को अपनाकर लड़की को अपने प्यार के जाल में फंसाता है। इसे फिर से समझें, कि लड़का अपनी मजहबी पहचान को छिपाकर गैर मुस्लिम पहचान धारण करके उस समुदाय की लड़की को फंसाता है और जब लड़की उसके जाल में फंस जाती है या फिर कहें कि उसके साथ धोखे से शारीरिक संबंध बना लेती है तो फिर उस लड़की पर इस्लामिक कन्वर्जन का दबाव डाला जाता है।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण है पहचान का बदलना
लव जिहाद में सबसे महत्वपूर्ण यह है कि लड़की को पूरी तरह से पहचान बदलकर फंसाया जाता है। प्रसिद्ध खिलाड़ी तारा शहदेव का उदाहरण सामने है, जिसमें उन्हें कैसे सुनियोजित तरीके से नाम बदलकर रकीबुल खान ने रंजीत बनकर फंसाया था। उनके सामने शादी के अगले दिन तक सामने ही नहीं आने दिया था कि वह रंजीत नहीं, बल्कि रकीबुल है। ऐसे एक नहीं कई मामले हैं, और आज भी सामने आ रहे हैं, जिनमें मुस्लिम युवक पहले अपना नाम बदलता है, कलावा भी पहनता है, मंदिर भी जाता है और इस तरह से लड़की को अपने जाल में फंसाता है। वह हिन्दू होने की हर चाल चलता है और फिर वह इसी पहचान के साथ बहला फुसला कर मंदिर में या कहीं और शादी भी करता है। जब उसका असली चेहरा और असली पहचान सामने आती है, तब लड़की विरोध करती है। क्योंकि उसे छले जाने का एहसास होता है। प्यार में सब कुछ चलता है, परंतु धोखा नही। जिस रिश्ते की नींव ही धोखे पर हो, तो उसका आगे क्या होगा, यह समझना ही आवश्यक होता है। लव जिहाद में लड़की किसी मुसलमान लड़के से प्यार नहीं करती है, इसे खासतौर पर समझना होगा।
लव जिहाद में लड़की एक ऐसे लड़के से प्यार और शादी करती है, जो हिन्दू है, जो उसके साथ मंदिर जाता है, जो उसके साथ सोमवार का व्रत रखता है और जो उसके साथ हिन्दू बनकर हर कदम पर साथ देने का वादा करता है। वह किसी मुस्लिम लड़के से प्यार या शादी नहीं करती है। उसके साथ छल होता है, वह छली जाती है, और वह भी प्यार के नाम पर! हरिद्वार में जब कोई अजहर अहमद राहुल बनकर हिन्दू लड़की से शादी करता है, तो वह महिला अजहर अहमद से नहीं बल्कि राहुल से प्यार करती है और राहुल के साथ जीने मरने की कसमें खाती है और जैसे ही उसे पता चलता है कि वह राहुल नहीं है तो वह उसे छोड़ देती है। वडोदरा में इकबाल परमार जब प्रतीक पटेल बनकर किसी लड़की को फंसाता है तो वह लड़की इकबाल से नहीं बल्कि प्रतीक से प्यार करती है। वाराणसी में शराफ़ रिजवी ने तो नाम और पहचान बदलकर कई राज्यों में 12 लड़कियों से शादी की थी और उन सभी पर इस्लामिक कन्वर्जन का दबाव डाला था……..”
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