“विचार: कॉरपोरेट जगत की ‘द केरला स्टोरी’”, जागरण, अप्रैल 14, 2026
“उस अजमेर कांड का तो स्मरण होगा ही, जो 1992 में घटित हुआ था और जिसके खुलासे ने देश को हिलाकर रख दिया था। अजमेर में करीब सौ छात्राओं को ब्लैकमेल कर उनका लंबे समय तक यौन शोषण किया गया था। एक छात्रा संग दुष्कर्म के बाद उसके अंतरंग फोटो लेकर उसकी अन्य सहेलियों को चंगुल में फंसाया गया और फिर एक घिनौना सिलसिला कायम हो गया। यह मामला उजागर होने के बाद कई छात्राओं ने आत्महत्या कर ली थी।
छात्राओं को ब्लैकमेल कर उनका यौन शोषण करने वाले अजमेर के ख्वाजा गरीब नवाज के खादिम एवं उसके साथी थे और उनकी हैवानियत की शिकार छात्राएं हिंदू थीं। बाद में अजमेर जैसे और भी कांड कई शहरों में सामने आए। एक तो पिछले साल अजमेर के ही विजयनगर में सामने आया, जिसमें हिंदू लड़कियों के यौन शोषण के साथ उनका जबरन मतांतरण कराने की कोशिश की गई। एक अन्य मामला भोपाल में सामने आया। यहां के एक कालेज की कई हिंदू छात्राओं को मुस्लिम लड़कों ने हिंदू नाम से प्यार के जाल में फंसाकर ब्लैकमेल किया और फिर वे उन्हें इस्लाम कुबूल करने के लिए मजबूर करने लगे।
देश में अजमेर जैसे कितने कांड हो चुके हैं, उनकी गिनती करना कठिन है, लेकिन यह समझ लीजिए कि लंदन के ग्रूमिंग गैंग की तरह भारत में जगह-जगह जिहादी सोच वाले युवकों के ऐसे ग्रूमिंग गिरोह सक्रिय हैं, जो दूसरे मजहब की लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने और उनका यौन शोषण करने के बाद उन्हें इस्लाम स्वीकार करने को विवश करते हैं। कई इस्लामिक दावा सेंटर वस्तुतः ग्रूमिंग गैंग ही हैं। ये सबको इस्लामी परचम तले लाने के लिए इतने अधिक जुनून से भरे हैं कि कुछ वर्ष पहले एक दावा सेंटर नोएडा के मूक-बधिर छात्रों का ब्रेनवाश कर मतांतरण करने में लगा हुआ था……”
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