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Wednesday, October 5, 2022

झारखंड में दुमका में फिर से नाबालिग लड़की की हत्या: अरमान अंसारी गिरफ्तार: परन्तु कारण कब विमर्श में आएँगे?

झारखंड में फिर से एक लड़की की हत्या के चित्र मीडिया में छाए हैं। अचानक से ही उस झारखंड से वनवासी समाज से लड़कियों की जिहादियों द्वारा की जा रही हत्याओं का समाचार आने लगा है, जो कल तक मिशनरी का गढ़ रहा था! ऐसा क्या हो रहा है या हुआ है, उसके विषय में भी पड़ताल ही करनी ही होगी, परन्तु इन दिनों जिस प्रकार से वहां की लडकियां निशाने पर हैं, वह अपने आप में हैरान और परेशान करने वाला है। वह दुःख में भरने वाला है।

अंकिता की हत्या के बाद एक और लड़की की ह्त्या के प्रयास के बाद आज फिर से एक बच्ची लटकी हुई पाई गयी है। अंतत: यह हो क्या रहा है? और यह किसके संकेतों पर हो रहा है? यह किस मानसिकता के चलते हो रहा है? कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है या फिर समझ में आ तो रहा है, परन्तु राजनीति के चलते सब मौन बैठे हैं। राजनीतिक समीकरण बनाने के चक्कर में मौन हैं सब!

जो जानकारी निकल कर आ रही है उसके अनुसार एक वनवासी लड़की को अरमान अंसारी ने हत्या के बाद पेड़ पर लटका दिया है!

आजतक के अनुसार

रंगलिया के कोचीया डगाल की रहने वाली युवती दुमका के जामा स्थित अपनी मौसी के घर काम करती थी। इस दरम्यान अरमान अंसारी नाम के एक मुस्लिम युवक ने उसे प्रेमजाल में फंसाया और उसे गर्भवती कर दिया। जब आरोपी पर शादी का दबाव बनाया तो एक साजिश के तहत युवती की हत्या कर दी गई।

मुफस्सिल थाना पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 376, 302 समेत पॉस्को एक्ट और SC-ST एक्ट के तहत केस दर्ज कर आरोपी अरमान को गिरफ्तार कर लिया है। 

क्या इस मामले में भी बांग्लादेशी संगठन अंसार उल बांग्ला का हाथ है? क्योंकि अंकिता के मामले में इस संगठन का नाम सामने आया था, और अंकिता की हत्या का आरोपी नईम इसी संगठन से प्रभावित बताया जाता है।

भास्कर के अनुसार

यह संगठन गैर मुस्लिम लड़कियों से शादी कर उन्हें इस्लाम धर्म कबूल करने के उद्देश्य से काम करता है। इस संगठन से जुड़े लोग सरहदी क्षेत्र में सक्रिय हैं। गुरुवार को भास्कर की पड़ताल में कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। दुमका में एक नाबालिग को जिंदा जलाकर मार देने की घटना के बाद दुमका के डंगालपाड़ा, सानीडंगाल, जरुवाडीह और बंदरजोड़ी में कई ऐसी लड़कियां मिलीं, जिनकी सिसकियां सुनने वाला कोई नहीं है। इन लड़कियों को पहचान बदलकर प्यार की जाल में फांसा गया। फिर, निकाह कर धर्मांतरण कराया गया है। ऐसी स्थिति पाकुड़, गोड्डा, साहिबगंज और जामताड़ा में भी है।

झारखंड पहले मिशनरियों के निशाने पर था, परन्तु अब अचानक से ही वह जिहादियों के निशाने पर आ गया है। इसमें स्थानीय लड़कियों पर खतरा अचानक से आ गया है। या फिर यह योजना कई वर्षों से चल रही होगी! अचानक से तो उछाल आ नहीं सकता है? यदि अचानक नहीं हुआ है तो फिर क्या पहले छूट पुट घटनाओं को नही देखा गया, नहीं समझा गया?

भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार यह अचानक नहीं हुआ है, उन्होंने दो मामले बताए हैं। एक मामले में  दुमका की सानी डंगाल मोहल्ला की रहने वाली युवती ने कहा था कि उन दोनों में प्यार हुआ, मगर बाद में पता चला कि वह उसके धर्मका नहीं है। मगर उसके पास शादी के अलावा चारा नहीं था और अब तो शादी में दस साल बीत गए हैं। अब बच्चे भी स्कूल जाने लगे हैं।

दूसरे मामले में भी यही हुआ, दुमका गांधी मैदान के निकट रहने वाली एक युवती के पिता ने कहा कि आठ साल पहले मेरी बेटी हम सबको छोड़कर चली गई थी। उसे जब सच्चाई का पता चला, तब तक देर हो चुकी थी। ऐसी ही घटनाएं बंदरजोड़ी मोहल्ले में भी हुई हैं, लेकिन लोकलाज के कारण सबकी जुबां खामोश हैं।

ऐसा नहीं है कि अचानक से हुआ होगा। ऐसी एक घटना कई वर्ष पहले हुई थी, जिसने बताया था कि कैसे लव जिहाद का कार्य संगठित तरीके से हो रहा है। और वह घटना थी राष्ट्रीय स्तर पर रायफल शूटर तारा शाहदेव की रंजीत कोहली उर्फ़ रकीबुल हसन के साथ छल से शादी, और जिसमें सरकारी अधिकारी तक सम्मिलित होने की बात की गयी थी, चार न्यायिक अधिकारियों के भी रकीबुल हसन के सब संबंध होने की भी बात सामने आई थी। तारा शाहदेव की कहानी भी झकझोरने वाली थी और तारा शाहदेव ने भी यह मांग उठाई थी कि झारखंड में लव जिहाद के खिलाफ क़ानून बने!

रांची में हिंदू जागरण मंच और नेशनल शूटर तारा शाहदेव ने तत्कालीन राज्यपाल को लव जिहाद के लिए क़ानून की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा था

परन्तु दुर्भाग्य की बात है कि आठ साल पहले हुए इस मामले से किसी ने सबक नहीं लिया, जिसमें एक राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी को ही निशाना बनाते हुए इतना बड़ा खेल रचा गया था। इसी वर्ष फिर से इस मामले की सुनवाई चालू हुई है और जिसमें पीड़िता तारा शाहदेव के भाई ने कहा था कि तारा शाहदेव की शादी का प्रस्तावक हाईकोर्ट के तत्कालीन रजिस्ट्रार (विजिलेंस) मुश्ताक अहमद बना था।

हालांकि तारा शाहदेव को वर्ष 2018 में तलाक मिल चुका है और वह अपना जीवन फिर से आरम्भ कर चुकी हैं। फिर भी जब वर्ष 2014 में यह मामला सामने आया था और यह भी सामने आया था कि कैसे रकीबुल हसन का साथ अधिकारी एवं न्यायिक अधिकारी दे रहे थे, पद का दुरूपयोग कर रहे थे, तो भी इस विषय को विमर्श का विषय क्यों नहीं बनाया गया?

झारखंड में दुमका में उस बच्ची के साथ जो हुआ है, वह न ही पहला मामला है और न ही अंतिम! यह पूरी तरह से उस जाल को बताता है जिसमें न केवल तारा शाहदेव जैसी नामी लडकियां जानबूझकर फंसाई जाती हैं, बल्कि अब आम लड़कियों को ब्रेनवाश करके फंसाया जाने लगा है, फिर राह से हटाया जाने लगा है!

इस जाल को समझना है और बच्चियों को समझाना है, क्योंकि लव जिहाद ऐसा विषय है जो राजनीति के भेंट चढ़ता रहेगा, परन्तु लड़कियों को इस प्रकार चारा नहीं बनाया जा सकता है! इन हत्याओं को और कारणों को विमर्श में लाना ही होगा!

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1 COMMENT

  1. Law & Order problem has always been an issue holding Bihar & Jharkhand to the backseat. Govt. should deploy more effective police force, increase police and security personnel in the remote corners of these two states. The dearth of police security adds fuel to these criminal activities.

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