“बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ ABVP जेएनयू का उग्र विरोध, कट्टर इस्लामिक आतंक का पुतला दहन”, सुदर्शन न्यूज़, दिसंबर 21, 2025
“बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हो रहे अमानवीय अत्याचार, हिंसा और हत्या की घटनाओं के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, जेएनयू इकाई द्वारा जोरदार प्रतिवाद दर्ज किया गया। हाल ही में बांग्लादेश में कट्टर इस्लामिक तत्वों द्वारा निर्दोष हिंदुओं को जिंदा जलाए जाने और नृशंस हत्याओं की घटनाओं ने पूरे मानव समाज को झकझोर कर रख दिया है। घटना पड़ोसी देश बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में घटी। पीड़ित का नाम दीपु चंद्र दास था। वह एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करता था और उसी इलाके में किराए के मकान में रहता था।
पुलिस के मुताबिक, रात करीब 9 बजे कुछ लोग पीड़ित के घर में घुस गए। पैगंबर मुहम्मद के अपमान के आरोप में दीपु को भीड़ ने पकड़ा, बुरी तरह पीटा और बेरहमी से हत्या कर दी। इतने पर भी मन नहीं भरा तो इस्लामिक कट्टरपंथियों ने शव को पेड़ से बांधा और आग लगा दी। इसी के विरोध में अभाविप जेएनयू ने उग्र इस्लामिक कट्टरता के प्रतीकात्मक पुतले का दहन कर अपना आक्रोश व्यक्त किया। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।
यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिन घटनाओं में निर्दोष नागरिकों को धर्म के आधार पर निशाना बनाया जा रहा है, उन पर जेएनयू के वामपंथी संगठन पूरी तरह मौन हैं। ये वही संगठन हैं जो फिलिस्तीन और ग़ाज़ा जैसे मुद्दों पर दिन-रात प्रदर्शन, नारेबाज़ी और सभाएँ आयोजित करते हैं, लेकिन जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार की बात आती है, तो उनकी तथाकथित मानवाधिकार की आवाज़ अचानक ख़ामोश हो जाती है। यह चयनात्मक संवेदनशीलता और राजनीतिक पाखंड का स्पष्ट उदाहरण है….”
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