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Friday, September 30, 2022
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Bharat to tap in on the growing US vegan market through non-meat exports

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vegan

In a bid to cash in on the booming vegan market in the US, Bharat has started exporting plant-based meat. The commerce ministry confirmed that the first consignment from Nadiad in Gujarat’s Kheda district was exported to California on September 22.

“With the growing popularity of vegan food products in developed countries, the plant-based food products have a huge export potential in the international market due to the high nutrient value of the vegan food products. The first shipment that was exported to the US from Nadiad has vegan food products like momos, mini samosas, patties, nuggets, spring rolls, burgers,” the ministry said.

A report by Sputnik News notes:

According to recent studies, the global vegan food market is set to grow to around $22 billion by 2026, with the US and Europe contributing the largest share. Indian businesses entered this segment only recently, with an eye on accelerating demand for vegan food…

…Recent market research conducted by London-based Technavio suggests that the vegan food market is expected to grow to $21.46 billion by 2026, with an annual growth of 12.25 per cent.

Around 40 per cent of the total vegan food requirements would originate from the US and Canada, while substantial growth is also expected in China and Japan.

APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) is working toward promoting vegan meat without affecting the conventional animal-based meat export market confirmed its Chairman M Angamuthu. The organization plans to export a variety of vegan food products to Australia, Israel, New Zealand and other countries.

(Featured Image Source: ToI)

राजा अज एवं इन्दुमती के दाम्पत्त्य प्रेम की कहानी: आज आवश्यकता है ऐसी कथाओं की

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आज जब दाम्पत्त्य प्रेम तमाम तरह की शर्तों एवं उलाहनों में दबकर रह गया है, एवं न्यायपालिका, विधायिका, एनजीओ, साहित्य, मीडिया सभी हिन्दू पुरुषों को एक खलनायक के रूप में प्रस्तुत करने लगे हैं, विवाह की वैधता पर ही जैसे प्रश्न चिह्न उठाने लगे हैं तो ऐसे में कई बार आवश्यक है कि हम पढ़ें हमारे धार्मिक उल्लेखों में किस प्रकार से दाम्पत्त्य प्रेम का वर्णन है। एवं दाम्पत्त्य प्रेम ही वह कड़ी है जो वैवाहिक संबंधों को बनाए रख सकती है, शेष कुछ नहीं!

आज पढ़ते हैं राजा अज एवं उनकी पत्नी इन्दुमती के दाम्पत्त्य जीवन की कहानी, जिसे वैद्य यशोदा देवी ने अपनी अद्भुत पुस्तक विवाह विज्ञान में इसलिए बताया है ताकि लोग वामपंथी जाल में न फंसे। परन्तु लोग फंस रहे हैं क्योंकि हिन्दू जीवन के इतने सुन्दर रूप को सहज लेने की प्रवृत्ति कम होती जा रही है।

कौन थे राजा अज?

सबसे पहले तो लोगों को यह पता ही नहीं होगा कि आखिर राजा अज कौन थे? राजा अज का इतिहास क्या है? राजा अज राजा दशरथ के पिता थे। यशोदा देवी ने महादेव एवं माँ पार्वती, प्रभु श्री राम एवं माता सीता तथा राजा अज एवं रानी इंदुमती के प्रेम से भरे जीवन के माध्यम से दाम्पत्त्य प्रेम की व्याख्या की है। महादेव एवं पार्वती तथा प्रभु श्री राम एवं माता सीता की कहानी हम सभी को ज्ञात है, परन्तु राजा अज की कहानी से लोग अनजान हैं।

यशोदा देवी लिखती हैं कि महाराजा रामचन्द्र के बाबा अर्थात अज का विवाह अत्यंत सुन्दर राजकुमारी इंदुमती से हुआ था। इन्दुमती और राजा अज का उल्लेख उन्होंने कालिदास के रघुवंशम महाकाव्य से किया है। इसमें लिखा है कि राजा अज और इन्दुमती के दशरथ नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। और एक दिन इन्दुमती सहित राजा अज वन विहार के लिए गए थे उसी समय गोकर्णनाथ जी को वीणा सुनाने के लिए नारद जी आकाश मार्ग से जा रहे थे। पवन के लगने से उनकी वीना के ऊपर से फूलों की माला उड़कर इन्दुमती के हृदय पर गिरी और रानी उसके लगते ही मर गयी।

रानी की मृत्यु के उपरान्त राजा अज की व्याकुल मनोस्थिति का वर्णन दाम्पत्त्य प्रेम की पराकाष्ठा है

कालिदास लिखते हैं कि

वपुषा करणोंज्झितेन सा निपतन्ति पतिमप्ययातयत

ननु तैलनिषेकबिन्दुना सह दीपाचिरुपैति मेदिनीम

अर्थात इन्द्रियों के छोड़े हुए शरीर से गिरती हुई उसने पति को भी गिराया, टपकते हुए तेल की बूँद के संग दीपक की लोय भी धरती पर गिरती है।

इधर पत्नी की देह निर्जीव हो रही है और उधर राजा अज जैसे निष्प्राण हुए जा रहे हैं। इस समय कालिदास उस विरह की पीड़ा को लिखते हैं कि दोनों स्त्री पुरुषों के सेवकों का महारुदन होने लगा एवं राजा की मूर्छा तो दूर हो गयी, परन्तु वह उसी प्रकर स्थित रही कारण कि आयु के शेष रहने पर ही औषधि आ उपाय फल देता है। और फिर राजा ने चेतना दूर हो जाने से बिना तार चढ़ी वीणा के समान उस प्रिया को “अतिप्रेमी” ने उठाकर उचित अंक (गोदी) में रखा!

यहाँ पर पति की पीड़ा कितनी भावुक करने वाली है। पढ़ते ही हृदय बींध जाता है, पाठक उस पीड़ा को अनुभव करता है, जिससे होकर राजा अज गुजर रहे हैं। यह साधारण पीड़ा नहीं है, यह आयुपर्यन्त रहने वाली पीड़ा है। परन्तु इस पीड़ा को आज के समय समझने वाला वर्ग कम ही है।

अब आगे उनका विलाप थम नहीं रहा है। कालिदास लिखते हैं कि

मनसापि न विप्रियं मया कृतपूर्व तव किम जहासि माम

ननु शब्द्पति: क्षितेरहं त्वयि में भावनिबंधना रति:

अर्थात अज विलाप करते हुए कहते हैं कि मैंने पहले कभी मनसे भी तेरा विप्रिय नहीं किया, फिर तू मुझे त्यागन करती है। पृथ्वी का पति तो मैं नाममात्र से हूँ, परन्तु मन की प्रीति तो तुझमें ही है!”

फिर आगे अज अपनी प्रिया इन्दुमती को बुद्धि देने में सहायक के रूप में बताते हुए विलाप करते हैं कि

गृहणी सचिव: सखी मिथ: प्रिय शिष्या ललिते कहा विधौ

करुणाविमुखेन मृत्युना हरता त्वां किन न में हृतम!

अर्थात तू मेरी भार्या, बुद्धि देने में सहायक, एकांत की सखी, गान आदि ललित कलाओं की मेर्री प्रिय शिष्या थी, तुझे कठोर मृत्यु ने हर बता मेरा क्या नहीं हर लिया?

कालिदास रघुवंश- अष्टम सर्ग

कालीदास ने इस कथा को जिस प्रकार लिखा है, वह दाम्पत्त्य प्रेम की वह कहानी है, जिसे आजके भौतिक समय में, छोटे छोटे विषयों को लेकर सम्बन्ध विच्छेद के युग में पढ़ा जाना चाहिए, इन्हें कहानियों में गुंथा जाना चाहिए, जिससे प्रेम की यह कहानियां जीवन के हर क्षण में रच बस जाएं!

होता यह है कि हमारी लड़कियों के सामने प्रेम कहानियों के नाम पर लैला मजनू, शीरी फरहाद, सोहनी महिवाल, रोमियो जूलियट आदि की कहानियां आती हैं, जिनमें मिलन तो है ही नहीं। है तो बस या तो मिलन से पहले का ही विरह! कहीं पूर्णता है ही नहीं, कर्तव्य बोध है ही नहीं!

राजा अज एवं इन्दुमती की कहानी में प्रेम है, विरह है, तो वहीं कर्तव्यबोध भी है, कि राजा अज का कर्तव्य अपने पुत्र एवं जनता के प्रति है! वह राजा दशरथ का पालनपोषण करते हैं, दूसरे विवाह का उल्लेख प्राप्त नहीं होता है, अत: जो यह आक्षेप लगाते हैं कि भारत में अनिवार्य बहुविवाह रहा था, उन्हें प्रभु श्री राम एवं उनके ही परिवार के राजा अज की कथा कम से सुननी चाहिए।

हमारी लड़कियों एवं लड़कों के सम्मुख दाम्पत्त्य की मधुर कथाओं को लाने का उत्तरदायित्व कथाकारों का है, ताकि वह प्रेम के वास्तविक रूप को समझें एवं छोटे छोटे झगड़ों को लेकर न्यायालय में न चले जाएं, जहाँ पर वह एक दूसरे ही षड्यंत्र का शिकार हो जाते हैं!

तभी यशोदा देवी ने भी विवाह विज्ञान पर लिखने से पूर्व भूमिकाओं में तमाम प्रेम कहानियों का उल्लेख किया है, जिससे लोग प्रेम एवं कर्तव्य को समझ सकें!  तभी वामपंथी विमर्श में से वह गायब हैं!

CBI’s ‘Operation Garuda’ to dismantle illicit drug trafficking network

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CBI

The Central Bureau of Investigation (CBI) on Thursday said that they have launched a multi phase ‘Operation Garuda’ to disrupt, degrade and dismantle drug networks with international linkages through rapid exchange of criminal intelligence on drug trafficking and coordinated law enforcement actions across international jurisdiction through Interpol.

A senior CBI official said that the global operation was initiated in close coordination with Interpol and Narcotics Control Bureau (NCB) for combating smuggling of illicit drugs and psychotropic substances, with special focus on the Indian Ocean Region.

“Drug trafficking networks with international linkages require law enforcement cooperation across international jurisdiction.

“In Operation Garuda, CBI led a global operation to target drug networks with international footprints for action against handlers, operatives, production zones and support elements,” the official said.

The CBI and the NCB have been closely coordinating with all the states and UTs police agencies for information exchange, analysis and development of operational information.

During the Operation Garuda, searches, seizures and arrests were carried out across multiple States in India. Apart from the CBI and the NCB, eight states/UT police, including Punjab, Himachal Pradesh, Gujarat, Maharashtra, Tamil Nadu, Delhi and Manipur also participated in this operation.

During this special operation by the NCB and several state police forces, including Punjab, Delhi, Himachal Pradesh, Manipur, Maharashtra, around 6600 suspects were checked, 127 new cases registered and around 175 persons, including six absconders/proclaimed offenders were arrested.

Illicit drugs and psychotropic substances, including 5.125 kg heroin; 33.936 kg ganja, 3.29 kg charas, 1365 gm mephedrone, 33.80 smack, around 87 tablets, 122 injections and 87 syringes of Buprenorphine, 946 tablets Alpazolam, 105.997 Kg Tramadol, 10 gm Hash oil, 0.9 gm Ecstacy pills, 1.150 kg opium, 30 kg Poppy Husk, 1.437 kg intoxicant powder and 11,039 pills/capsules, were recovered.

(The story has been published via a syndicated feed)

MNS campaigns against halal, calls it largest terror funding mechanism

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halal

Raj Thackeray-led MNS (Maharashtra Navnirman Sena) has launched a “Say No to Halal” campaign. The party highlighted that the halal industry is the largest terror funding mechanism. It also says Hindus have lost their revenue and livelihood to the Islamic industry.

“The importance of halal meat has risen so much that the jhatka meat business has suffered heavily. This mechanism is also targeting vegetarian foods and non-meat-consuming people”, notes a party release. Maharashtra Navnirman Vyapari Sena President Yashwant Killedar has written an open letter asking people not to consume halal meat.

“In a way, we are funding terror at our own expense. We should stop this in Maharashtra by saying No to Halal. We require people to create a movement around this cause, and we request people to join this cause,” Killedar’s letter says. While urging people to join the campaign, he also stated that halal was a cruel Islamic method of slaughtering animals.

Killedar highlighted that non-Muslims consume jhatka meat. The fast-growing halal industry is affecting jhatka meat sellers who are largely drawn from Hindu Khatik and Valmiki communities. It is important to put an end to this business in Maharashtra and hence we want the masses to support us. We also need volunteers to make this campaign a success.

People are unaware they are supporting and sponsoring terrorism by spending their hard-earned money on such products. “Furthermore, it is not just meat but Jamat Ulema-e-hind’s hold and footprint is increasing even in products such as chips, biscuits, lipsticks, and chocolates among others”, stated Yashwant Killedar. In a video message, MNS leader Siddharth Mohite said the party was opposed to non-Muslims being forced to consume halal products.

The party had earlier protested against the use of loudspeakers in mosques. “I don’t oppose one’s right to pray, but the loudspeakers on the mosques must be removed. I request the government to get them removed. Otherwise, I tell this right now, we will put double loudspeakers to chant Hanuman Chalisa right in front of those mosques. Which religion mentions loudspeakers? Was there any loudspeaker when your religion was invented?”, the MNS chief said in his speech.

A similar campaign has been launched in neighbouring Karnataka by Hindu organizations. It has come to light that several hotels in Bengaluru have replaced the word halal with jhatka on their name boards. Protesting organizations have appealed to the public to say no to meat served using the Islamic slaughtering method.

HinduPost had earlier highlighted how minority domination/tyranny is being unleashed in Bharat through halal certification. This is nothing but an attempt to impose upon non-Muslims a deeply troubling and rooted in Islam rule. This is violative of both the SC/ST Act and Articles 14 & 25 of the Constitution.

In his article titled “The Most Intolerant Wins: The Dictatorship of the Small Minority,” Nassim Nicholas Taleb explains how a small minority dominates over the food choices of a majority of the population with whom they cohabit a place. Essentially, economics would dictate a company to choose Halal because a consumer of non-Halal food may eat Halal; the opposite is not true. Therefore, companies would prefer getting a Halal certification to avoid loss of business.

And Bharat has not escaped this dictatorship of the minority as well. An article in Swarajya points out that although Muslims are just 15% of the country’s population, a significantly higher proportion of Halal meat is being sold in Bharat and the number is only rising every year.

It is essential to point out that Islamic certification isn’t limited to meat alone and is now being extended to other products as well. Hindu society at large must understand the implication of such certification and the need to raise our voices against such religious discrimination.

Kerala HC asks PFI to deposit Rs 5.20 cr for damage during bandh

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The Kerala High Court on Thursday directed the Popular Front of India (PFI) to deposit a sum of Rs 5.20 crore as compensation for the damage caused during the September 23 bandh called to protest the arrest of their leaders.

A division bench of Justices A.K. Jayasankaran Nambiar and C.P.Mohammed Nias took suo-motu proceedings against the PFI and directed all the lower courts in the state not to give bail without compensation.

Proceedings should be taken to confiscate personal assets of all those who indulged in the destruction if they fail to pay for the damage.

The court also directed to set up a Claims Commission, which will deal with all the matters of paying the compensation to those who have suffered a loss.

As per the directions, the amount has to be paid in two weeks time with the Additional Chief Secretary, Home Department, towards the damages estimated by the state as well as the KSRTC, arising from the destruction caused to public and private property in the state.

It also directed the state government to make PFI general secretary Abdul Sathar an additional accused in all cases.

As many as 487 cases were registered with 1,992 people arrested and 687 taken into preventive custody, the government informed the court.

“Whenever the word hartal is said, it has a different meaning among the citizens. People are living in perpetual fear. What does a common man have to do with this? Common man suffers, and for what? Not supporting an ideology of yours ?,” asked the Court.

This strong court directive came after the state, as directed by the Centre, came out with an order asking the Kerala Police to go forward in taking the appropriate steps which includes locking up of all the offices of the banned organisations besides freezing of bank accounts of such organisations.

(The story has been published via a syndicated feed)

प्रतिबन्ध से पूर्व एनआईए के छापों से तिलमिलाई थी पीएफआई, तमिलनाडु में भाजपा और आरएसएस के सदस्यों पर किये गए 20 पेट्रोल बम हमले

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Picture Source - Hindu Post

बीते दिनों पीएफआई पर भारत सरकार द्वारा प्रतिबन्ध से पहले पीएफआई पर एनआईए के ताबड़तोड़ छापों और इनके काडर और सभी प्रमुख नेताओं की गिरफ्तारी के बाद इस्लामिक जेहादियों और उनके समर्थक सकते में थे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। परन्तु इस किंकर्तव्यविमूढ़ता के वातावरण में पीएफआई के सामने मात्र एक ही विकल्प बचा था, आरएसएस और भाजपा के लोगों पर हमले करना, और वही उन्होंने किया भी।

प्रतिबन्ध के बाद न्यायालय से भी पीएफआई को झटका लगा है

पीएफआइ पर केंद्र सरकार द्वारा 5 साल का प्रतिबन्ध लगाए जाने के पश्चात अब संगठन को एक और झटका लगा है। केरल उच्च न्यायालय ने आज पापुलर फ्रंट आफ इंडिया को केरल बंद के दौरान हुए नुकसान को लेकर 5 करोड़ से अधिक का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। पीएफआइ ने अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में 23 सितंबर को केरल बंद बुलाया था जिसमें कई जगह तोड़फोड़ की गई थी।

कहाँ की गयी थी तोड़फोड़?

प्राप्त सूचना के अनुसार जिहादी तत्वों ने तमिलनाडु में आरएसएस और भाजपा के कार्यालयों और उनके सदस्यों की संपत्तियों पर पेट्रोल बम से हमले किए। हिंदू संगठनों के सदस्यों को भी इस्लामवादियों ने निशाना बनाया और उनके वाहनों को भी आग लगा दी। राज्य भर में इस प्रकार की लगभग 20 घटनाएं दर्ज की गई हैं, वहीं पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर 2 एसडीपीआई सदस्यों सहित 15 लोगों को गिरफ्तार किया है।

पीएफआई पर एनआईए के छापों के पश्चात केरल से भी व्यापक हिंसा की खबरें आईं, वहीं आरएसएस, भाजपा और अन्य हिंदू संगठन के सदस्यों को 24 सितंबर से कट्टर इस्लामवादियों के हमलों का सामना करना पड़ा। पुलिस के अनुसार मोलोटोव कॉकटेल, पेट्रोल और डीजल से भरे पैकेट भाजपा, आरएसएस सदस्यों और हिंदू कार्यकर्ताओं के आवासों, संपत्तियों और वाहनों पर फेंके गए थे। ‘द कम्यून’ समाचार पत्र ने कोयंबटूर, इरोड, सलेम, रामनाथपुरम, डिंडीगुल, कन्याकुमारी और चेन्नई में ऐसे 13 हमलों की खबर दी है।

एक घटना में इरोड में भाजपा के एक पदाधिकारी की फर्नीचर की दुकान पर पेट्रोल और डीजल से भरे पैकेट फेंके गए, लेकिन सौभाग्य से उनमें आग नहीं लगी और किसी भी प्रकार की हानि नहीं हुई। वहीं रामनाथपुरम में इस्लामवादियों ने अस्पताल के अंदर खड़ी भाजपा समर्थक डॉक्टर की कार में आग लगा दी थी।

तिरुप्पुर में जिहादियों ने मोलोटोव कॉकटेल को एक व्यापारी के घर के अंदर फेंक दिया गया था, क्योंकि उन्हें लगा यह एक भाजपा के पदाधिकारी का घर था। ऐसा बताया जा रहा है कि इस घर में कुछ समय पहले तक भाजपा का एक पदाधिकारी किराए पर रहता था, और इसी कारण जिहादियों ने बदला लेने के लिए घर पर हमला कर दिया।

एक अन्य घटना में तूतीकोरिन में भाजपा के एक पदाधिकारी की बस पर पेट्रोल से भरी बोतलें फेंकी गईं थी। सौभाग्य से यह बोतल किसी यात्री को नहीं लगी और किसी भी प्रकार की जान माल की हानि नहीं हुई थी। कोयंबटूर में भाजपा पदाधिकारियों की एक कपडे की दुकान सहित 2 दुकानों पर हमला किया गया थी। ऐसा देखने में आया है कि आरएसएस/भाजपा सदस्यों को नुकसान पहुंचाने की उत्सुकता में, यह लोग अस्पतालों, दुकानों और परिवहन वाहनों जैसे स्थानों पर हमले कर रहे थे और जनता की सुरक्षा को खतरे में डाल रहे थे।

लेकिन कहीं न अखीं तमिलनाडु में भाजपा/आरएसएस विरोधी द्रमुक सरकार कानून व्यवस्था और जनता की सुरक्षा के बारे में बहुत चिंतित नहीं दिख रही था क्योंकि भाजपा द्वारा बार-बार कार्यवाही करने का निवेदन करने के पश्चात भी सरकार ने अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए उचित उपाय नहीं किये हैं। सबसे अधिक हमलों का सामना करने वाले कोयंबटूर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और ऐसी और घटनाओं को रोकने के लिए चौकियों की संख्या को भी बढ़ा दिया गया।

पुलिस ने पेट्रोल पंप स्वामियों ने यह भी कहा है वह बोतलों में भरने के लिए कहने वालों को ईंधन न बेचें। हालांकि इस निर्देश को आलोचना का सामना भी करना पड़ा था, क्योंकि जिहादी तत्व अपने दोपहिया वाहनों से ईंधन निकाल कर भी उसका उपयोग बम की तरह कर सकते था। पुलिस ने राज्य में अब तक 15 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

एसडीपीआई के सलेम जिला अध्यक्ष सैयद अली (42) को आरएसएस सलेम शहर के पदाधिकारी वीके राजन के आवास पर हमले के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई की, जिसमें आरोपियों को रविवार देर रात 1.40 बजे राजन के घर पर मिट्टी के तेल से भरी बोतल फेंकते हुए दिखाया गया था। सलेम में एसडीपीआई के वार्ड अध्यक्ष के. खादिर हुसैन को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया गया था। दोनों अपराधियों को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।

Help poor Hindus this Durga Puja!

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Image Source: Hindustan Times

As we celebrate the annual Hindu festival season starting with Durga Puja and going on till Deepawali, it is also time to think of our less privileged Hindu sisters and brothers and bring some cheer in their lives too.

One such initiative has been started by Shri Devdutta Maji, President of social service organization Singha Bahini, a well-known face in West Bengal who has always stood as a rock to help poor and persecuted Hindus of the state and region.

Shri Maji has started a crowd-funding drive during this festival season to raise funds to help poor Hindus and help them practice their Dharma –

“Requesting your generous support to bring smiles to the poorest of the poor of Bengal’s Hindu community this Durga Puja / Navaratri / Dussehra and Kali Puja / Deepawali. These people are on the frontline of Bengal’s battle against rising adharmik forces.

This fundraiser is aimed at the poor, marginalised population who find it impossible to make ends meet. They happen to be the footsoldiers of Dharma in troubled Bengal.

Durga Puja / Navaratri / Dussehra evokes religious fervour that brings immense joy for every Hindu. It is the soul of our existence. Durga embodies Shakti, the destroyer of adharma. She also represents the love and compassion of the Mother. It also commemorates the victory of Prabhu Shri Ram over the Evil.

My team and myself have  taken up an initiative to start a mass movement to reach out to the poorest Hindus. They are the brave ones who fight fearlessly and even lay their lives down for the defence of Hindu Dharma. It is in them that Ma Durga resides. It is in them that the survival of our Hindu civilisation rests.

But ironically, they are the most vulnerable lot. They need to be protected and supported by the educated, well-off Hindus.

With this donation drive, we intend to meet the following objectives:

1. Distributing new clothes, food and other essentials among the poorest in at least 11 of the state’s 24 districts and more than 10,000 individuals.

2. Supporting and training pujaris/priests across caste and gender.

3. Carrying out Dharma Jagaran in challenging areas.

Please contribute for your very own people and for this important civilisational cause.

Jai Ma Durga,

Devdutta Maji

(Social Activist & President of SINGHABAHINI)”

 

Please contribute generously by donating here – https://www.crowdkash.com/campaign/3166/support-poorest-of-the-poor-hindus-of-west-bengal-during-the-auspicious-days-of-navratri-durga-puja-dashehra-and-kali-puja-deepawali

Pakistan’s Habib Bank aided, abetted Al Qaeda: Report

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Pakistan’s largest bank, Habib Bank Limited (HBL), faces secondary liabilities in a terror financing case in the US in which the plaintiffs had alleged that it aided and abetted Al Qaeda terrorism and joined a conspiracy to launch attacks that killed or injured 370 people, a media report said on Thursday.

Judge Lorna G. Schofield observed that bank faces the liabilities under the Justice Against Sponsors of Terrorism Act as a party that “aids and abets, by knowingly providing substantial assistance, or who conspires with the person who committed such an act of international terrorism”, Dawn news quoted the Bloomberg report as saying.

The Bloomberg report quoted the judge as saying that the plaintiffs in three consolidated cases “sufficiently” alleged that the attacks were planned or authorised by a ‘Foreign Terrorist Organisation’ such as the Al Qaeda or syndicates Lashkar-e-Taiba, Jaish-e-Mohammad, the Afghan Taliban, including the Haqqani Network, and the Tehreek-i-Taliban Pakistan.

“The plaintiffs sufficiently allege that the bank knew its customers were integral to al-Qaeda’s overall campaign of terrorism, carried out directly and by proxy, which is sufficient to allege general awareness.

“The complaints also show that the bank knowingly and substantially helped al-Qaeda and its proxies evade sanctions and engage in terrorist acts, which satisfies the eknowing assistance’ requirement,” the judge said.

Judge Schofield said the allegations were sufficient to show that HBL “joined in a conspiracy to commit the attacks”.

However, she turned down the plaintiffs’ claims of primary liability because none of the alleged banking services provided by HBL “were themselves acts of international terrorism”, the report added.

Prior to this, HBL had agreed to pay a fine of $225 million, the largest ever imposed upon a Pakistani bank by regulatory authorities, in 2017 for various violations of New York’s regulatory provisions, Dawn news reported.

The bank had also agreed to surrender its licence to operate a branch in New York and unwind its operations there.

The branch had been operational since 1978.

In a strongly worded release issued at the time, the Department of Financial Services (DFS) of New York State had harshly castigated the bank and added that it “will not stand by and let Habib Bank sneak out of the US without holding it accountable for putting the integrity of the financial services industry and the safety of our nation at risk”.

HBL had become the target of an enforcement action by DFS for 53 separate violations allegedly committed between 2007 and 2017.

(The story has been published via a syndicated feed with a modified headline)

नवरात्र: हिन्दू धार्मिक पर्व है, सांस्कृतिक प्रयोग नहीं! श्रद्धा नहीं तो गरबा में आने का औचित्य क्या?

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हिन्दुओं के हर पर्व को धार्मिक से हटाकर सांस्कृतिक किए जाने का कुप्रयास आज से नहीं न जाने कब से चला आ रहा है। हर पर्व को धार्मिक से हटाकर मुगलों तक सीमित कर दिया जाता है। जैसे रक्षाबंधन का पर्व, जिसे उस हुमायूं के साथ जोड़ दिया जाता है, जो जानते बूझते रानी कर्णावती की सहायता के लिए नहीं गया था, जिससे यह इल्जाम न आए कि काफिर के लिए उसने एक मुस्लिम का विरोध किया।

हालांकि इस बात को लेकर भी मतभेद हैं कि क्या रानी ने वास्तव में हुमायूं से सहायता मांगी थी? ऐसे ही होली, दीपावली आदि को मात्र वहीं से बताने का कुप्रयास किया जाता है, जब से मुगलों ने कथित रूप से मनाना आरम्भ किया।

तथा प्रभु श्री राम से लेकर माँ दुर्गा तक सभी की धार्मिक पहचान विलुप्त करके मात्र उन्हें सांस्कृतिक आयाम तक सीमित करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। यही कारण है कि उनके साथ हर कोई मजाक करके निकल जाता है। चाहे वह उसे माने या न माने, उसका उपहास उड़ाता है! इन दिनों माता रानी की पूजा के दिन चल रहे हैं। हिन्दुओं में इन दिनों माता रानी की आराधना में गरबा नृत्य किया जाता है।

गरबा की धूम रहती है! परन्तु गरबा को समझना होगा, गरबा कोई साधारण या आम नृत्य न होकर देवी की पूजा के लिए किया जा रहा नृत्य है। यह श्रद्धा का विषय है। नवरात्र में नौ दिनों तक दुर्गा माता के नाम कुछ लोग व्रत रखते हैं, कुछ एक बार भोजन ग्रहण करते हैं तो कुछ लोग निराहार रहते हैं! अपनी अपनी श्रद्धा के अनुसार लोग व्रत रखते हैं, आराधना करते हैं।

इसी प्रकार गरबा है। यह पूरी तरह से माँ की आराधना का नृत्य है, परन्तु समस्या यह है कि भारत में जो लिब्रल्स हैं, वह गरबा को मात्र एक नृत्य के रूप में देखते हैं। उन्हें यह भी जुंबा आदि कोई डांस फॉर्म लगता है, जबकि यह पूर्णतया भक्ति का माध्यम है, यह कोई प्रेम नृत्य नहीं है, या फिर यह प्रेमी प्रेमिका के मध्य किया जाने वाला नृत्य नहीं है, जो इसके लिए लिब्रल्स इतने हाय तौबा मचाएं, परन्तु होता यही है कि जैसे ही हिन्दुओं के संगठन यह नियम बनाते हैं कि केवल हिन्दू ही गरबा खेलने आएँगे तो लिब्रल्स का रोना आरम्भ हो जाता है!

क्या किसी और मजहब के मजहबी जलसों में कोई गैर मजहबी भाग ले सकता है? क्या उनके यहाँ कोई गैर मजहबी जाकर लड़कियों के साथ नाच सकता है? यदि नहीं तो ऐसा क्यों होता है कि गरबा खेलने की उन्हें बहुत बेचैनी होती है और वह भी हिन्दू नाम रखकर? ऐसा क्यों होता है? ऐसा क्या कारण है? क्या हिन्दू लडकियां वास्तव में उनके इस तरह झूठ बोलने का कारण हैं? ऐसा इसलिए क्योंकि इंदौर से सात ऐसे लड़के गरबा पंडाल में पकड़े गए, जो झूठी पहचान के साथ भीतर आए थे और लड़कियों की वीडियो बना रहे थे, वह वहां पर लड़कियों की फोटो निकाल रहे थे।

भास्कर के अनुसार

“उनकी हरकतें देखकर वहां मौजूद बजरंग दल के सदस्यों को उन पर शक हुआ। जिसके बाद उन्होंने उनका नाम पूछा और आईडी दिखाने को कहा। सभी युवकों ने अपने नाम गलत बताए। आईडी मांगने पर भी नहीं दिखाई। इसके बाद उन युवकों को पुलिस के हवाले कर दिया। सभी के खिलाफ प्रतिबंधात्मक धाराओं में केस दर्ज किया गया है।“

गरबा चूंकि हिन्दुओं का नृत्य है, जिसमें माता के लिए श्रद्धा ही महत्वपूर्ण होती है, और जो समुदाय माता को मानता ही नहीं है, जो प्रतिमा को बुत मानता है, वह कैसे गरबा कर सकता है? कैसे वह भक्ति गीतों में डूब सकता है? यही प्रश्न जब हिन्दू संगठन उठाते हैं तो उन्हें ही दोषी ठहरा दिया जाता है, यह कहा जाता है कि वह असहिष्णुता दिखा रहे हैं। परन्तु प्रश्न यही है कि क्या हिन्दू समुदाय को यह भी अधिकार नहीं है कि वह अपने धार्मिक क्रियाकलापों में यह सुनिश्चित कर सके कि कोई अहिंदू न आए?

यह स्वाभाविक अधिकार है! क्यों किसी समुदाय को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि उसके आयोजन में कौन आए, वह इसे निर्धारित कर सके?

इस बात को लेकर कट्टरपंथी मुस्लिम निशाना साध रहे हैं, कि बजरंग दल और विहिप के लोग कैसे कैसे मार रहे हैं? जबकि सरकार ने पीएफआई को प्रतिबंधित किया है

लोगों ने सोशल मीडिया पर यह कहा भी कि मुस्लिम युवक गरबा में धार्मिक कारणों से नहीं बल्कि हिन्दू लड़कियों पर गलत नजर के कारण प्रवेश करते हैं, इसलिए बजरंग दल के नेताओं के लिए आदर!

https://twitter.com/bubblebuster26/status/1575307093409955840

यूजर्स ने इस बात को भी उठाया कि मुस्लिम महिलाएं गरबा में नहीं आतीं क्योंकि वह हराम होता है, परन्तु मुस्लिम युवक आते हैं

इन घटनाओं के बाद से लोगों ने एक बार फिर से हिन्दू धार्मिक असहिष्णुता की बातें करनी आरम्भ कर दी हैं, परन्तु फिर से प्रश्न वहीं पर उठकर आता है कि आखिर जो गरबा मुस्लिम युवकों के लिए आकर्षक हैं, वह मुस्लिम युवतियों के लिए आकर्षक क्यों नहीं होती है?

लिब्रल्स यह बात क्यों नहीं समझते हैं या जानबूझकर नहीं समझते हैं कि हिन्दुओं के भी धार्मिक अधिकार हैं? न ही वह चाहते हैं कि हिन्दू अपने धार्मिक संस्कारों के अनुसार अपने बच्चों के विवाह आदि कर पाएं, न ही वह हिन्दुओं को कोई त्यौहार मनाने देना चाहते हैं, वह चाहते हैं कि हिन्दू समुदाय अपनी जड़ों से पूरी तरह से कट कर अब्राह्मिक गुलाम बन जाए!

Will the Nehru-Gandhis dare to act against Gehlot?

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Rajasthan CM Ashok Gehlot with Congress President Sonia Gandhi

Gehlot’s open defiance of the Congress high command when his MLAs refused to meet the state-in-charge Ajay Maken individually poses a new challenge to the Nehru-Gandhis crumbling citadel. 

The Congress first family doesn’t have the spunk to punish Gehlot even after a call for party discipline by Mallikarjun Kharge and the obvious displeasure of state in charge Ajay Maken.

This was evident when a sham disciplinary action has been proposed against the 3 MLAs who met Maken at the behest of Gehlot thus making them the scapegoat and trying to hoodwink everyone into thinking that action has been taken.

The Nehru-Gandhis dare not touch Gehlot as he has the backing of 85 to 90 MLAs  out of 108 in the Congress  and upsetting him would be upsetting the Congress  applecart in Rajasthan  which is the only notable northern state left in the Congress  kitty. Gehlot is unwilling to vacate the CM chair in favor of Sachin Pilot whom he has openly called a traitor.

There were reports that Sonia Gandhi was upset with Gehlot’s behavior after Ajay Maken filed his report but Sonia could not muster the strength to take disciplinary action against the veteran leader as the numbers were with Gehlot  & Rajasthan is probably the last straw that the Gandhis are clutching onto apart from Chattisgarh given their self-goal & humiliation in Punjab coupled with losses in Madhya Pradesh and UP.

So what will eventually play out in Rajasthan will be a face-saver where the status quo would be restored with Gehlot emerging unscathed and his henchmen being punished as a face-saver for Nehru-Gandhis. 

The Nehru-Gandhis have a penchant for inviting trouble as they did with so much finesse in Punjab and earlier in Madhya Pradesh. Rajasthan had already seen a face-off in 2020 between the two protagonists of the Congress who have no love lost between them so what was the need to push Gehlot’s name for the sham presidential election when his animosity for Pilot is well known. 

With Gehlot not budging from the CM chair, the Congress high command will have to put forth some other dummy for the presidential race to take on Tharoor if they have to stick with the one man, one post theory. 

Meanwhile Pilot will have to be placated again but for how long will Sachin Pilot withstand the stick & carrot treatment being meted out to him for the past 4 years is anybody’s guess. Will he go the  Scindia way and does he have the numbers to topple the Gehlot government, only time will tell.

After being called a traitor by his bete noire  Pilot’s options must be narrowing down quickly as he sees the ground slipping from under the Nehru-Gandhis.