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Wednesday, October 5, 2022
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“आदिपुरुष फिल्म से जुड़े सभी लोग सनातनी है!” मनोज मुन्तशिर! क्या यह दावा “सैफ अली खान” के लिए भी है?

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कथित रूप से हिंदूवादी कवि जो, मुख्यतया फिल्मों में ही लिखते हैं, और जिनपर कविता चोरी का भी आरोप लगा था, जिसके उत्तर में उन्होंने बहुत ही बेकार तर्क दिया था, और जिन्होनें अभी विक्रम वेधा फिल्म आने से पहले यह तक अपील की थी कि “हम राष्ट्रवादियों” को हर फिल्म का बहिष्कार नहीं करना चाहिए,। अब वही मनोज मुन्तशिर एक नए दावे के साथ सामने आए हैं, और यह दावा है कि “फिल्म आदिपुरुष में, सभी लोग सनातनी हैं एवं प्रभु श्री राम में श्रद्धा रखते हैं, विश्वास रखते हैं!”

हालांकि इससे पहले उन्होंने सैफ अली खान के उस वक्तव्य का बचाव भी किया था, जिसमें सैफ अली खान ने कहा था कि “आदिपुरुष में रावण को ह्यूमेन दिखाया गया है!” उन्होंने कहा था कि अब तक रावण को केवल बुरा ही दिखाया जाता था, मगर इसमें रावण के कई शेड्स दिखाए जाएंगे:

मनोज मुन्तशिर को ऐसा लगता है कि जैसे वह बॉलीवुड में हिन्दुओं के खेवनहार बन गए हैं। वह जो कहेंगे लोग उनकी बात मानेंगे, वह जो कहेंगे, आम हिन्दू उसे मानेगा! वह जो कहेंगे आम हिन्दू उसके पीछे आँखें मूंदकर चल देगा! मनोज मुन्तशिर पहले ही हिन्दुओं को उन आम लोगों का रोजगार खाने वाला बता चुके हैं, जिनका रोजगार बड़ी बड़ी सिनेमा चेन पहले ही खा चुकी हैं, जिन लोगों को मल्टीप्लेक्स वालों ने पहले ही बेरोजगार कर दिया है, उनके काम के बहाने मनोज मुन्तशिर उन हिन्दुओं को अपराधी घोषित कर चुके हैं, जो हिन्दू उनके साथ तब भी खड़ा रहा, जब उनकी कविता साफ अनुवाद की गयी दिख रही थी।

मनोज मुन्तशिर उसी बॉलीवुड उद्योग का हिस्सा हैं, और कहीं न कहीं ऐसा लगता है कि वह बहती गंगा में हाथ धो रहे हैं। मनोज मुन्तशिर के गाने “तेरी मिट्टी में मिल जावां” को जब सम्मान नहीं मिला था, तो निश्छल हिन्दू समाज की भावनाएं मनोज मुन्तशिर के साथ जुड़ गयी थीं और उन्होंने मनोज मुन्तशिर की इस अनदेखी और उपेक्षा को स्वयं के साथ हुई उपेक्षा के रूप में ले लिया था। और जब उन्होंने इतिहास को लेकर कहा था, तो हिन्दुओं को लगा था कि मनोज मुन्तशिर के बहाने कोई उनका पक्ष रखने वाला तो फिल्म उद्योग में है।

फिर उनपर चोरी का आरोप लगा। उस चोरी के आरोप में दम होते हुए भी इसलिए दम नहीं था क्योंकि बड़े बड़े कवि भी ऐसी हरकत करते पाए गए थे और उनकी चोरी पर प्रगतिशील खेमा चुप रहा था। हमने भी मनोज मुन्तशिर की बात करते हुए यह लिखा था कि यदि मनोज मुन्तशिर की बात हो रही है, तो फिर पाश आदि सभी की बात हो! खैर, संभवतया मनोज मुन्तशिर इस समर्थन को यह मान बैठे कि वह कुछ भी कहते और करते रहेंगे, और हिन्दू उनकी बात मान लेंगे!

जब वह पहले हिन्दुओं द्वारा किए गए बॉयकाट के चलते सिनेमा हॉल के बंद होने का रोना रो रहे थे, तब भी हमने लिखा था कि क्या वास्तव में इसी कारण सिनेमा हॉल बंद हो रहे हैं? क्या वास्तव में हिन्दू उत्तरदायी है? नहीं! उत्तरदायी तो वह हिन्दू विरोधी कंटेंट है, जिसके चलते लोग जाना ही नहीं चाहते हैं।

जैसे कश्मीर फाइल्स ने हिन्दुओं का नैरेटिव डिजिटल रूप से स्थापित कर दिया है, ऐसा क्या मनोज मुन्तशिर ने किया है? ऐसा कुछ भी कालजयी उन्होंने नहीं लिखा है, बल्कि वह तो बॉलीवुड के उन्हीं लोगों के साथ कार्य कर रहे हैं, जो पूरी तरह से हिन्दू विरोधी नैरेटिव बना रहे हैं।

खैर, बात अभी के उनके वीडियो की, फिर से सुनते हैं कि उन्होंने क्या कहा है?

जब मनोज मुन्तशिर कह रहे हैं कि इस फिल्म में जो भी है, उसकी प्रभु श्री राम में आस्था है, तो आइये सैफ अली खान का वह वीडियो देखते हैं, जिसमें वह प्रभु श्री  राम के विषय में यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि वह राम को नहीं मानते तो वह अपने बेटे का नाम राम कैसे रख सकते थे, और तैमूर कुछ हिंसक प्रवृत्ति का था, जो उस समय हो सकता था

अब मनोज मुन्तशिर बताएँगे कि क्या यह संभव है कि ऐसा हो? क्या तैमूर जैसे हिन्दुओं के कातिल को महान योद्धा बताने वाला सैफ अली खान, सनातनी मूल्यों में आस्था रखने वाला है? या फिर कौन है? क्या यह कहने वाला व्यक्ति कि एक मुस्लिम होने के नाते मैं अपने बेटे का नाम राम नहीं रख सकता, सनातनी हो सकता है? प्रभु श्री  राम में आस्था रखने वाला हो सकता है?

शायद मनोज मुन्तशिर अब एक प्रमाणपत्र देने वाली फैक्ट्री बन गए हैं! तभी वह सैफ अली खान जैसे लोग, जो खुद को मुस्लिम फर्स्ट मानते हैं, और प्रभु श्री राम के प्रति असहजता अनुभव करते हैं, उन्हें सनातनी मूल्य वालों का प्रमाणपत्र दे सकते हैं! वह सब कर सकते है, वह उस कृति सेनन को सनातनी मूल्यों वाला बता सकते हैं, जो टुकड़े टुकड़े गैग का समर्थन करती है और जब उस गैंग का विरोध किया जाता है, वह राजनीतिक एजेंडा बन जाता है!

समस्या यह नहीं है कि सैफ अली खान या कृति सेनन जैसे लोग हिन्दू विरोधी विचार रखते हैं, समस्या मनोज मुन्तशिर जैसे प्रमाणपत्र देने वालों की फैक्ट्री से है, जो विक्रम वेधा की रिलीज से पहले यह प्रमाणपत्र देते हुए दिखाई दिए थे कि हिन्दुओं के बॉयकाट के चलते आम आदमी मारा जा रहा है, वह मूंगफली वाला और समोसा वाला मर रहा है, जो वहां पर आने वाले दर्शकों पर ही निर्भर है! परन्तु मनोज साहब, यह नहीं बता पाए कि आखिर हिन्दू अपने सांस्कृतिक अपमान को देखने के लिए पैसा खर्च क्यों करे?

क्या मनोज मुन्तशिर ने ऐसा कुछ भी कार्य किया है, जो कहा जाए कि हिन्दू नैरेटिव है? और यदि यह नहीं भी किया है तो क्या उन्होंने हिन्दू विरोधी कलाकारों का विरोध किया है? क्या वह खुलकर उस नैरेटिव के विरोध में आए जो हिन्दुओं को नष्ट कर रहा है?

मनोज मुन्तशिर खुद भी शिल्पा शेट्टी के साथ कई बार आ चुके हैं, जिनके पति राज कुंद्रा पर क्या आरोप हैं, यह सभी को पता ही है।

फिर भी मनोज मुन्तशिर अब जिस प्रकार से सनातनी होने का प्रमाणपत्र देने की फैक्ट्री बन रहे हैं, वह कितना उचित है, यह पाठक स्वयं निर्धारित करें!

2G Scam: CBI files first charge sheet, names DMK MP A Raja as mastermind

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Source: economictimes.

The Central Bureau of Investigation (CBI), in its first charge sheet on 2G scam, accused former Union Minister and DMK leader A Raja of being the ‘master mind’ of the conspiracy in relation to the scandal.

Corporate companies — Reliance Telecom, Swan Telecom, and Unitech Wireless along with eight persons are charged as co-accused in the case. Former telecom secretary Siddhartha Behura, Unitech chief Sanjay Chandra, DB Realty boss, its MD Vinod Goenka, and Swan Telecom MD Shahid Balwa are named in the charge sheet.

The 2008-2G case is an alleged corrupt sale of telecommunications bandwidth to selected organisations at prices that understated the real market value of the asset.

The sale is claimed to have occurred when Raja headed the Telecommunications and IT Ministry; it has been considered the largest political corruption case in modern Indian history, amounting to around Rs 1.76 lakh crore.

On December 21, 2017 , a Delhi court acquitted all accused, including Raja and DMK Rajya Sabha member Kanimozhi in the 2G spectrum allocation case.

Special Judge O.P. Saini said the CBI and the Enforcement Directorate had failed to provide sufficient evidence to prove the charges against 33 persons named in the case and the court has “absolutely no hesitation in holding that the prosecution has miserably failed to prove any charge against any accused”.

In his 1,552-page judgment, the judge said it was actually confusion caused by “various actions and inactions” of the Department of Telecommunication (DoT) that snowballed into a “huge scam seen by everyone where there was none”.

He said many facts in the prosecution’s “well choreographed chargesheet” were found to be incorrect. “All the accused are acquitted.”

The court also let off 19 accused, including Raja and Kanimozhi, in a related money laundering case probed by the Enforcement Directorate.

(The story has been published via a syndicated feed with a modified headline.)

3 Jaish terrorists killed in gunfight in J&K’s Shopian

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Jammu and kashmir LeT terrorist encounter
Representative image (Image Source: DNA)

Three Jaish-e-Mohammed (JeM) terrorists were killed in a gunfight with the security forces in the Drach area of South Kashmir’s Shopian district, officials said on Wednesday.

This is the second encounter in Shopian in less than 12 hours. An encounter was also underway in the Moolu area of Shopian.

“Three local terrorists linked with proscribed terror outfit JeM killed in encounter at Drach Shopian. Second encounter at Moolu is in progress,” Jammu and Kashmir Police quoting Additional Director General Police Kashmir zone Vijay Kumar tweeted.

The gunfight started after a joint team of police and security forces got an input about the presence of terrorists in that area.

After security forces cordoned off the area, terrorists hiding there started firing drawing retaliation by the security forces.

There have been a series of encounters between the terrorists and security forces across Kashmir in the recent past in which many terrorists have been eliminated.

One terrorist was killed in an encounter between terrorists and security forces in the Baskuchan area of South Kashmir’s Shopian district on Sunday.

(The story has been published via a syndicated feed.)

Paid ads in US newspapers – latest tactic for anti-Bharat propaganda by Jamaat/ISI front orgs

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Pakistan

A recent ad in the garb of ‘appeal’ on Bharat’s human rights by Islamist fronts affiliated with Jamaat/ISI is most naked attempt so far. An article on the signatories:

ICNA, founded by Jamaat members in the US. Notably, ICNA via its fronts such as ICNA CSJ caters to Pakistan’s narratives of genocide, Islamophobia on Kashmir.

Exposed in our Report: Op Tupac

IAMC has been exposed for its anti-Bharat pursuit. From lobbying to sharing fake news for stoking communal unrest in Bharat. Its founder Shaik Ubaid was Jamaat protégé at ICNA.

Exposed in our Report: USCIRF- an Organization of Particular concern

Hindus for Human Rights (HfHR) formed as a Hindu-sounding front to legitimize the purported ‘concern’ of Jamaat and Pak backed entities on Bharat. HfHR co-hosted ‘India Genocide Summit 2022’ (#IndiaOnTheBrink) event with Jamaat/ISI nexus of JFA & IAMC

Exposed in Report: Op Tupac

American Sikh Council (ASC) an umbrella group that supported Khalistani ISI-operative Bhajan Singh Bhinder’s boycott calls of Bharatiya officials in the US. Bhinder’s aide Amrik Singh was member of both ASC & OFMI shut.

Expose in Report:

American Muslim Institution (AMI) and Association of Indian Muslims of America (AIMA) are both led by the former IAMC member Kaleem Kawaja. To put on record Kaleem Kawaja has been a vocal Taliban sympathizer.

International Society for Peace & Justice (ISPJ) is yet another of these fronts that joins forces where Jamaat, Pak and MB nexus meet. ISPJ works in direct tandem with IAMC, JFA (Jamaat front), CAIR (MB front) to achieve a common quest.

This was not the first time these Pak, Jamaat & MB fronts got together for a common quest. They have previously targeted & sought blacklisting of India on grounds of religious freedom through USCIRF reports.

Time and again these groups that are laden with Pak, Jamaat/MB nexus use platforms like New York Times (NYT) with huge reader base in their pursuit to destabilize Bharat. Such slander attempts can be delegitimized only if their lineages are constantly called out.

(This article has been compiled from the tweet thread originally tweeted by DisInfo Lab (@DisinfoLab) on October 2, 2022.)

क्या केरल पुलिस अवैध तरीके से पीएफआई आतंकियों की सहायता कर रही है?

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Picture Source - KSRTC Bus vandalized in Kerala (Images courtesy freejournalpress.com)

कट्टर इस्लामिक आतंकी सगठन पीएफआई पर पिछले दिनों केंद्र सरकार ने कड़ी कार्यवाही की है, इस संगठन को ना सिर्फ प्रतिबंधित कर दिया गया है, बल्कि इसके सैंकड़ो कार्यकर्ताओं और इसके सम्पूर्ण नेतृत्व को भी गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्यवाही के पश्चात केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों ने भी पीएफआई को प्रतिबंधित कर दिया है। देश भर में पीएफआई के जिहादियों को पकड़ा जा रहा है, वहीं उनकी सम्पत्तियों को भी जब्त किया जा रहा है।

ऐसे में अगर आपको यह पता लगे कि किसी राज्य की पुलिस खुलेआम पीएफआई का समर्थन कर रही है, तो आपको कैसा लगेगा?

पीएफआई का गढ़ रहा है केरल, और इस संगठन पर प्रतिबन्ध लगाने के पश्चात भी केरल पुलिस कथित तौर पर पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का समर्थन कर रही है, और उसने पीएफआई के विरुद्ध कार्रवाई को अवरुद्ध कर दिया है। केरल पुलिस में ऐसे कई तत्व हैं, जो पीएफआई के सदस्यों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही को संभव ही नहीं होने दे रहे हैं। एक सूचना के अनुसार एक पुलिस अधिकारी ने पीएफआई द्वारा किये गए केरल बंद के समय हिंसा के लिए उत्तरदायी लोगों की खुलकर सहायता की थी।

पीएफआई ने अपने ऊपर प्रतिबन्ध लगने के पश्चात राज्य में बंद का आयोजन किया था, जिसमे व्यापक स्तर पर हिंसा भी की थी। पीएफआई के सदस्य हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं में संलिप्त थे, यही कारण था कि केरल उच्च न्यायालय ने भी पीएफआई को हानि पहुंचाने के लिए आर्थिक दंड देने का आदेश दिया था।

सूत्रों से यह भी पता चला है कि केरल पुलिस ने लगभग छह महीने पहले पीएफआई के मार्शल-आर्ट शिविर पर छापा मारा था, लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी, और मामले को दबा दिया गया था। यहाँ यह जानना महत्वपूर्ण है कि पीएफआई ने केरल राज्य में जगह जगह इस तरह के मार्शल आर्ट शिविर खोले हुए हैं, जहाँ मुस्लिम युवाओं को आत्मरक्षा के नाम पर आतंकवाद का प्रशिक्षण दिया जाता है।

इस तरह के शिविरों में केरल और अन्य राज्यों के लगभग 200 आतंकियों ने भाग लिया था। पीएफआई ने अगस्त के अंत में एक शस्त्र-शिविर भी आयोजित किया था, लेकिन केरल पुलिस ने कथित तौर पर इस घटना का भी संज्ञान नहीं लिया, ना ही किसी प्रकार की कार्यवाही की।

पिछले कुछ महीनों में केरल में नशा और सोने की तस्करी के मामलों में कमी आई है, लेकिन पुलिस ने अभी तक इस तरह की घटनाओं में लिप्त संदिग्ध जिहादियों को गिरफ्तार नहीं किया है, ना उनके हथियार ही जब्त किये हैं। वहीं दूसरी ओर पीएफआई की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) अभी तक किसी भी प्रकार के प्रतिबंध से अछूती है। एसडीपीआई पर प्रतिबंध लगाने से सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट शासन प्रभावित हो सकता है, क्योंकि दोनों संगठनों का एक अकथित गठबंधन है और वह कई क्षेत्रों में साझा शासन भी करते हैं। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने केरल पुलिस को इन आतंकियों पर शिकंजा कसने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाने का आदेश दिया है।

पेरुम्बवूर पुलिस ने पिछले शुक्रवार को पीएफआई द्वारा घोषित हड़ताल के दौरान केरल राज्य (केएसआरटीसी) की एक बस में तोड़फोड़ करने वाले पीएफआई के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है। ऐसा बताया जाता है कि कलाडी पुलिस थाने से संबद्ध वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (सीपीओ) सी.ए. जियाद पेरुंबवूर पुलिस थाने पहुंचे और तीनों आतंकवादियों को आवश्यक सहायता प्रदान की।

स्टेशन पर अन्य पुलिस अधिकारियों ने उसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन ज़ियाद ने उन्हें इस मामले से दूर रहने की चेतावनी दे दी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जब जियाद के विरुद्ध शिकायत मिली, तब यह मामला सामने आया और तुरंत ही एनआईए अधिकारियों को भी सोचित किया गया। प्राप्त सूचना के अनुसार इस पुलिसकर्मी से पूछ्ताछ की गयी और उसका मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्य भी जब्त कर लिए गए हैं।

यहाँ यह जानना महत्वपूर्ण है कि सीपीओ जियाद का इस्लामी अपराधियों की सहायता करने का इतिहास रहा है। दो वर्ष पहले पेरुम्बवूर पुलिस स्टेशन में काम करते हुए जियाद ने बंदूक के साथ पकड़े गए एक कुख्यात गैंगस्टर की सहायता की थी। तब अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुए उसे परावुर थाने स्थानांतरित कर दिया गया था, और लगभग तीन महीने पहले उसे वापस कलाडी स्टेशन भेज दिया गया था, लेकिन उसके व्यवहार में कोई भी सुधार नहीं देखा गया।

यहाँ हैरान करने वाली बात यह है, कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर को ही कलाडी के आदि शंकर जन्म भूमि क्षेत्रम (ऋषि और दार्शनिक की जन्मस्थली) का दौरा किया। यह ज्ञात नहीं है कि ज़ियाद तब हमारे प्रधानमंत्री के संपर्क में आया था या नहीं, और ऐसे देशविरोधी व्यक्ति को प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सम्मिलित करना कितना खतरनाक हो सकता है, यह कोई स्वयं भी अनुमान लगा सकता है।

इससे पहले खुफिया रिपोर्टों में पुष्टि की गई थी कि इस्लामी आतंकवादियों ने केरल पुलिस में गहरे स्तर तक घुसपैठ कर ली है। ऐसे तत्व पाचा वेलिचम (ग्रीन लाइट) नामक एक समूह का प्रबंधन और नियंत्रण करते हैं। यह अधिकारी पीएफआई आतंकवादियों से जुड़ी जांच में हस्तक्षेप करते हैं और आतंकियों को कानूनी कार्यवाही से बचाने में सहायता भी करते हैं।

पीएफआई और एसडीपीआई नेताओं ने पिछले ही दिनों एक विरोध प्रदर्शन किया था, जब अनस नाम के एक पुलिसकर्मी ने पुलिस डेटाबेस से संघ परिवार के नेताओं की निजी जानकारियां लीक कर दी थीं। सूचना लीक करने वाले थोडुपुझा करिमन्नूर पुलिस स्टेशन के सीपीओ अनस को निलंबित कर दिया गया था, लेकिन वह किसी प्रकार आपराधिक अभियोजन की कार्यवाही से बच गए थे। इस मामले में यह आरोप है कि पीएफआई और एसडीपीआई को केरल पुलिस के नेतृत्व से गुप्त सहायता मिली थी।

जुलाई में कोट्टायम के कांजीरापल्ली स्टेशन से जुड़ी सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) रामला इस्माइल ने न्यायालयों और केरल पुलिस के विरुद्ध पीएफआई के नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट साझा किए थे। उसी महीने मुन्नार पुलिस स्टेशन के तीन पुलिसकर्मियों की आतंकी संगठनों को जानकारी देने के आरोप में जांच की गई थी। वहीं मुन्नार पुलिस थाने में कंप्यूटर के माध्यम से आतंकी संगठनों को गुप्त जानकारी देने के आरोप में इडुक्की जिले के पुलिस अधिकारी पीवी अलियार, पीएस रियास और अब्दुल समद की जांच की जा रही है।

11 मई को केरल अग्निशमन और बचाव सेवा के कर्मी जीशाद बदरुद्दीन को आरएसएस कार्यकर्ता श्रीनिवासन की हत्या में भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था। आरएसएस के पलक्कड़ जिले के शिक्षण प्रमुख पूर्व ब्रिगेडियर श्रीनिवासन की पीएफआई के आतंकवादियों ने 16 अप्रैल को हत्या कर दी थी। केरल फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आपदा राहत अभियानों के नाम पर पीएफआई कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया और अप्रैल में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शनों का आयोजन भी किया।

अपनी अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीति के लिए कुख्यात मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, जो केरल का गृह मंत्रालय भी संभालते हैं, उन पर यह प्रश्न तो उठता ही है, कि वह ऐसी घटनाओं और अपराधियों के प्रति हमेशा ही आंखें क्यों मूंद लेते हैं? उपरोक्त अधिकारियों में से किसी के भी विरुद्ध उचित और सार्वजनिक कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। केरल पुलिस प्रतिबंधित संगठन के कार्यकर्ताओं के विरुद्ध उनकी देशद्रोही गतिविधियों के लिए निर्णायक कार्रवाई करने के लिए ना तो तैयार है, और ना ही उन्हें ऊपर से ऐसे आदेश ही मिलते हैं।

इससे पहले पुलिस स्पेशल ब्रांच ने बताया था कि केरल पुलिस के कई थानों में पीएफआई के सदस्य तैनात हैं। आज यह परिस्थिति है कि प्रतिबन्ध लगने के पश्चात भी पीएफआई के आतंकियों को पुलिस खुलकर सहायता कर रही है। यह बड़ी ही गंभीर परिस्थिति है और अगर इस पर राज्य सरकार और प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी तो इस्लामिक आतंकवाद केरल में बड़े स्तर पर फ़ैल सकता है।

Three Iranians arrested for theft in Telangana

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assault

Three Iranian nationals have been arrested in Telangana’s Medak district on charges of theft, police said. They were found allegedly involved in three cases of theft through attention diversion.

The accused have been identified as Davalu Kareem (26), Evaji Nadar (54) and Binyaz Brahman (35), all residents of Iran’s capital city Tehran.

A police official said the Iranians had arrived in India on a tourist visa and the visa of one of them had expired a month ago.

The police seized Rs 95,000, $850 and Iran Riyals 30,50,000 from them.

According to Medak district Superintendent of Police, Rohini Priyadarshini, the trio committed theft at three shops after diverting the attention of shop owners while showing them Iranian currency for exchange the same with the Indian currency.

The arrests were made on Sunday by the police while investigating two complaints of theft received from owners of a chicken shop in Ramayampet and a gas agency in Chegunta.

Three police teams, constituted to probe the theft, scanned the CCTV footage after it was found that the accused went around in a car in different places in Medak district on October 1. On October 2, police traced the car and picked up three suspects for questioning. The SP said the accused confessed to the thefts.

Police seized the car, three cell phones, three Iranian passports and two Iranian driving licenses.

The accused had arrived in Hyderabad a month ago and were staying at a hotel. The police were trying to gather more information about them from Iranian embassy.

(The story has been published via a syndicated feed.)

How media censors sexual degradation and harassment of Hindu women by Islamists in cyberspace

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On New Year, another case of misusing photos of Muslim women has been reported. This time, it is ‘Bulli Bai’– an app on GitHub. Last year, Muslim women were targeted through ‘Sulli Deals’ where their pictures were leaked & misused. GitHub, a code hosting platform, has been used for both apps and Muslim women have been listed on both apps for auction. Both cases have been widely reported by the media. Boths apps have been removed from GitHub but this is not the final solution. It’s good to see that people on social media are also outraging & asking the concerned authorities to act against the culprits behind these apps.

This is not limited to Muslim women. Even Hindu women are facing the same from years but it has hardly been reported by the media. Today, I am going to tell you how Hindu girls & women’s photos were leaked on various platforms with their details and derogatory remarks.

Telegram Messenger

Specific channels were created on Telegram where the photos of only Hindu girls were shared.

Telegram Channel
Telegram Channel

Here are the links of the some of the groups which have recently been reported & removed successfully.

  • https://t.me/interfaithxxx_official
  • https://t.me/Hslut4Mstuds
  • https://t.me/Interfaithroom
  • https://t.me/innterfaith

These were highly active groups in which both original & morphed photos of Hindu girls were shared with their details & derogatory remarks.

Kik Messenger

Such activities are not limited to Telegram. Similar groups are also active on ‘Kik’ messenger to target Hindu women. As soon as one group was infiltrated, some specific rules mentioned for the group came up. The rules are for those people who join these groups.

Kik Messenger

Some groups have been reported and removed successfully.

Reddit

Many such accounts were also created on Reddit to target Hindu Women. Here are some of the accounts which have been reported & removed.

Discord

Discord is a VoIP. It allows users to create servers which can consist of a variety of text, media and voice channels. And, guess what? Hindu women were targeted here too.

Unfortunately, our media reported only about these apps: Sulli Deals & Bulli Bai. But the media ignored the other side– the Hindu deals on various platforms.

All of us must raise voice against cybercrimes against women. And, our media should also highlight all such cases equally, not specifically.

The country needs more awareness regarding cyber crimes. From school level, both boys and girls should be educated regarding safe use of internet as well as how to report any sort of cyber crime to the concerned authorities such as portal of cyber police.

(This story was published on medium.com by Anshul Saxena and has been reproduced here.)

Dussehra – celebrating the victory of good over evil

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dussehra

Dussehra is an important Hindu festival that celebrates the victory of good over evil. It is also known as Vijayadashami and is celebrated on Dashami tithi in the Shukla Paksha of Ashwin month. Dussehra celebrates two significant events – Mahishasur vadh by Maa Durga and Ravan vadh by Prabhu Sri Ram.

Mahishasur vadh

Once a fierce battle ensued between Devas led by Indra and asuras led by Mahishasur. The asuras overpowered the Devas and Mahishasur occupied Swarglok driving out Indra. The Devas sought refuge with and help from Sri Hari Vishnu and Bhagwan Shiva.

When the Devas along with Bhagwan Brahma reached the spot where Bhagwans Vishnu and Shiva were present. They narrated the entire sequence of events and requested their help. “We have come to you for refuge. Please think of a way to get rid of Mahishasur”, the Devas appealed.

“Hearing the Devas’ narration, Bhagwans Vishnu and Shiva were angry at the asuras. Devi emerged from the combined energies of Sri Hari Vishnu, Bhagwan Shiva, Shri Brahma, and other Devas. Mahadev armed Devi with Trishul, Sri Vishnu gave Her a chakra, Indra gave Her a bell and vajra, Yamraj, Varundev, and Prajapati armed Devi with dand, pash and spatik mala respectively, Kaal gave sword and shield, Kshirsamudra presented several ornaments, Himalaya presented a lion for Devi’s vahan, other Devatas gave Her different weapons and ornaments for Her use”, Markandeya Purana says.

Having been thus armed, Devi rode Her ferocious lion to the battlefield. Mahishasur rushed in the direction of the lion’s roar along with his army. Subsequently, a fierce battle ensued between Maa Durga and several generals of Mahishasur at first. The asuras attacked Devi who responded with equal vigour and easily fended off Her attackers. The ganas, who emerged from Maa’s breath, fought against the asuras as did Devi’s vahan simha (lion).

Seeing his army totally destroyed, Mahishasur assumed the form of a buffalo and began harassing Maa Durga’s ganas. An angered Devi tied Mahishasur with Her pash forcing the asur to give up his buffalo form. He then assumed various forms including that of a lion, an elephant, and finally that of a buffalo again. Maa Durga pushed Mahishasur to the ground and ultimately slayed him using Her sword.

Devas were extremely pleased and sang praises of Maa Durga. Dussehra celebrates the victory of Maa Durga and Her ridding the world of Mahishasur’s atrocities. In many regions, Devi Aparajita is celebrated. Aparajita means one who cannot be defeated. This event is said to have occurred in the second Manvantara.

Ravan vadh

Ravan vadh took place in Tretayug when Sri Hari Vishnu descended on the earth as Prabhu Sri Ram. According to certain accounts, Prabhu Ram prayed to Devi Aparajita before battling Ravan. Devi Aparajita’s worship was restricted to Kshatriyas during the Vedic period.

As the festival is associated with the ten-headed Ravan’s vadh, it also signifies the removal of ten sins. Kama Vasana (lust), Krodha (anger), Moha (attraction), Lobha (greed), Mada (over pride), Matsara (jealousy), Swartha (selfishness), Anyaya (injustice), Amanavata (cruelty), and Ahankara (ego) are the ten sins one should get rid of while celebrating Prabhu Ram’s victory over Dashanan Ravan.

(Featured Image Source: Dainik Jagran)

Backed by Tripura govt for 70-plus years, centuries-old Durga Puja a big hit

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The over 500 years old Durga Puja, initiated by the then royal dynasty and sponsored by the Tripura government for the past over seven decades, continues to draw devotees from different parts of Bharat and the neighbouring countries, including Bangladesh.

Tripura, governed by the Left and non-Left parties since it merged with the Indian union 73 years ago, is possibly the only state in Bharat where the government continues to sponsor an over five century-old Durga Puja, that is also closely overseen by the erstwhile royal family.

With ‘Maha Sasthi’ or ‘Bodhan’ — the welcoming of Devi Durga murtis– the five-day Puja began on Saturday at the famed Durgabari temple, located in front of the 121-year-old Ujjayanta Palace, one of the biggest royal mansions in eastern India.

According to 57-year-old Jayanta Bhattacharjee, the head priest of Durgabari temple, a few years after the beginning of the royal era in Tripura the kings started Durga Puja over 500 years ago.

“The capital of the princely dynasty along with the royal temple moved to three different places – Udaipur, Amarpur and Puran Habeli before the state headquarters and the capital city along with the Durgabari temple was settled in Agartala 184 years ago in 1838 by Maharaja Krishna Kishore Manikya (1830-49),” Bhattacharjee told IANS.

Bhattacharjee’s family has performed the role of head priest or priest to worship the Durga murtis for six generations.

He said that West Tripura’s district magistrate and collector before starting the rituals of Durga Puja have to report in writing about the preparations at Durgabari to the former royal family and submit a final report after completion of the mega puja.

Now this traditional practice has been slightly changed. However, every detail of the Durga Puja is approved by the surviving elderly royal family member, Bibhu Kumari Devi.

Bhattacharjee is supposed to get Rs 8,500 as monthly honorarium from the state government as head priest of the Durgabari temple but as he is an employee of the power department he is not getting this honorarium. However, his younger brother is getting an honorarium of Rs 6,500 as priest.

Bhattacharjee, who assisted his father and former head priest Pandit Dulal Bhattacharjee for many decades, said it is on the final day of Dashami that the real splendour of the festival unfolds.

The murtis of Durgabari that lead the Dashami procession are the first to be immersed at Dashamighat here with full state honours, with the state police band playing the national song.

“The state government like in previous years has sanctioned Rs 5 lakh this year for the Durga Puja at this royal temple,” said Bhattacharjee adding that after three years the sacrifice of animals would restart this year.

“A young buffalo, several goats and pigeons are sacrificed during the five-day festival at Durgabari in the presence of thousands of devotees – all at government expense,” the head priest said.

People For Animals (PFA) chairperson Maneka Gandhi, former union minister of women and child development, in a letter to the district magistrates had earlier asked them to stop the “cruel killing of animals in the temples” during religious festivities.

A division bench of the Tripura High Court comprising the then Chief Justice Sanjay Karol and Justice Arindam Lodh in a landmark judgement on September 27, 2019 ordered that no person including the state government shall be allowed to sacrifice any animal or bird within the precincts of any of the temples in the state of Tripura.

The Tripura government subsequently moved a Special Leave Petition (SLP) before the Supreme Court against the Tripura HC order.

Historian and writer Salil Debbarma said that Tripura is the only Bharatiya state where the state government, be it of the Left or non-Left parties, is at the forefront of funding such a Hindu puja.

The tradition has been going on since Tripura’s merger with the Indian union and has been on during Communist rule in the state as well, he told IANS.

A part of the fortress and royal mansion continues to be the abode of the former princely family and the remaining palace area served as the Tripura assembly till 2009. It has now been turned into eastern Bharat’s biggest museum conserving the history, life and culture of northeast Bharat.

Debbarma said that at the end of the 517-year rule by 1,355 kings, on October 15, 1949, the erstwhile princely state came under the administrative control of the Bharatiya government after a merger agreement signed between Kanchan Prabha Devi, then regent maharani, and the Indian governor general.

The merger agreement made it mandatory for the Tripura government to continue the sponsorship of temples run by the Hindu princely rulers. This continues even seven-and-a-half decades after Independence.

A full-fledged division – Debarchan Vibhag – under the district magistrates in four of Tripura’s eight districts now bears this responsibility and the entire expenditure of over 15 temples, including that of Durgabari, is met by the government.

“Before starting the five-day-long worship of Durga and her four children, a procession led by the head priest, escorted by Tripura Police, goes to the palace to seek the consent of the former royal family to begin the puja of the deities at Durgabari,” said an official of the west Tripura district administration.

Historian Pannalal Roy, who wrote many books on the royal era, said: “The Durga Puja in Durgabari temple is unique in the sense that the prasad (holy offering) includes meat, fish, eggs, liquor and, of course, fruits.”

Though at least 2,570 community and about 100 family Durga Pujas are being held in Tripura, the Durga Puja at the Durgabari temple remains the main attraction for numerous reasons, including for its centuries old customs, kept alive by the royal family and the government.

Traditional themes, prevailing issues and events continue to dominate puja pandals in the state with historical events forming part of the themes for decorations.

“Afer the Covid-19 pandemic induced faltering economy in 2020 and 2021, the number of Durga Pujas has also increased by 450 in urban, rural and remote areas,” a Tripura Police spokesman told IANS.

(The story has been published via a syndicated feed with minor edits to conform to HinduPost style-guide.)

एक ओर शक्ति-पर्व में महिलाएं मना रही हैं गरबा स्वतंत्र होकर, तो वहीं सीमा पार अफगानिस्तान में शिक्षा के लिए बम धमाकों में गंवा रही हैं जान! संस्कृति और तहजीब में क्या यही है अंतर?

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अंतर्राष्ट्रीय विमर्श में बार बार हिन्दू धर्म को इस बात को लेकर पिछड़ा कहा जाता है, यह कहा जाता है कि हिन्दू अपनी स्त्रियों को अधिकार नहीं देते? हिन्दू अपनी स्त्रियों को परदे में रखते हैं। आदि आदि! परन्तु इन दिनों गरबा में जिस प्रकार से जिहादी तत्व प्रवेश करने का प्रयास कर रहे हैं, वह इस बात को रेखांकित करने के लिए पर्याप्त है कि कैसे जब संस्कृति तहजीब में बदलती है, वैसे ही क्या अंतर हो जाता है?

इन दिनों पूरे देश में दुर्गोत्सव मनाया जा रहा है। पूरे नौ दिनों तक जगत जननी माता की आराधना की जाती है, और माँ की शक्ति इस पूरे देश में जैसे व्याप्त हो जाती है एवं अन्याय से लड़ने की शक्ति भी देती है। भारत में उत्सव का अर्थ ही रंग, श्रृंगार आदि होते हैं। बिना रंग और बिना श्रृंगार के कैसे अपने आराध्य की आराधना होगी? हमारे आराध्य तो अपने भक्तों के साथ नृत्य भी करते हैं! माता की आराधना के लिए एक ओर बड़े बड़े पंडाल बनाए जाते हैं, जिनमें माता की प्रतिमाओं को विविध रूप से सजाया जाता है,। तो वहीं गुजरात एवं महाराष्ट्र में गरबा खेला जाता है।

उत्तर भारत में माता की आराधना स्वरुप पूरे आठ दिन व्रत रखा जाता है। पुरुष एवं महिलाऐं दोनों ही व्रत रखते हैं एवं फिर नौंवी के दिन नौ कन्याओं को भोज कराया जाता है एवं व्रत खोला जाता है। कहने का तात्पर्य यही कि इन दिनों जैसे हर हिन्दू शक्ति से ओतप्रोत रहता है! माँ अपनी शक्ति अपने भक्तों को प्रदान करने आती हैं, ताकि माँ के भक्त इस धरती पर होने वाले अन्याय का सामना कर सकें।

परन्तु अंतर्राष्ट्रीय मीडिया एवं अकादमिक जगत हिन्दुओं को लगातार पिछड़ा या फिर कहें स्त्रियों का विरोधी बताया जाता है, शोषक उत्पीड़क कहा जाता है, मगर यह उनके चेहरे पर एक बहुत बड़ा तमाचा है कि जब भारत की स्त्रियाँ स्वतंत्रता के साथ अपना उत्सव मना रही हैं, उसी समय भारत के पड़ोस में अफगानिस्तान में लडकियां अपने जीवन की हर प्रकार से लड़ाई लड़ रही हैं।

जब भारत में सृजन की शक्ति अपने नए रूपों में भक्तों को आशीर्वाद दे रही हैं, तो उन्हीं दिनों अफगानिस्तान में बालिकाओं को निशाना बनाकर बम विस्फोट हो रहे हैं और वह भी कथित रूप से “अल्पसंख्यक” शिया समुदाय की लड़कियों पर! उनका दोष क्या था? उनका दोष पढ़ाई करना था। इस बात को लेकर पश्चिमी मीडिया, जो बार बार हिन्दू समुदाय को पिछड़ा बताता रहता है, वह एकदम मौन है! उसके लिए यह मायने ही नहीं रखता कि अफगानिस्तान में  लड़कियों पर हमला हो रहा है, और न ही पश्चिम के अकादमिक जगत की दृष्टि ईरान में जा रही है, जहाँ पर लडकियां सड़क पर इसलिए हैं क्योंकि वहां पर उन्हें इस्लामिक कट्टरपंथी शासन द्वारा बाल तक खोले जाने की आजादी नहीं है।

पूरा सोशल मीडिया उन मरने वाली मासूम शिया लड़कियों के चेहरे से भरा पड़ा है, जो काबुल में हुए इस विस्फोट का शिकार हुई हैं। परन्तु पश्चिम का अकादमिक जगत हिन्दूफोबिया में इस हद तक अंधा हो गया है, कि वह यह नहीं देख पा रहा है कि शक्तिपर्व ही नहीं बल्कि शेष दिनों भी भारत में महिलाऐं स्वतंत्र हैं और उनकी स्वतंत्रता दरअसल उसी समुदाय के कट्टरपंथी तत्वों द्वारा खतरे में आ रही है, जो उनका प्रिय है अर्थात कट्टरपंथी मुस्लिम तत्व! लव जिहाद को लेकर हिन्दू लडकियां असमय मारी जा रही हैं, अब इस विषय को ग्रीस का भी मीडिया उठा रहा है, परन्तु पश्चिम का अकादमिक जगत इस बात को नहीं मानता है।

हिन्दुफोबिया इस हद तक हावी है, या कहें हिन्दुओं से इस सीमा तक घृणा है कि उसके चलते मुस्लिम लड़कियों की लाशों पर भी बात करना वहां पर जैसे अपराध है। शुक्रवार को अफगानिस्तान में हुए बम धमाकों में 46 लड़कियों सहित 53 लोगों की मौत हुई थी

वहीं लोगों में इस बात को लेकर भी गुस्सा हैं कि जहां ईरान में मसाह अमीनी की मृत्यु पर पूरे विश्व में इतना विरोध किया जा रहा है, तो वहीं अफगानिस्तान में इतनी लड़कियों के मारे जाने पर भी बात नहीं हो रही है? प्रश्न तो सही है कि आखिर पश्चिम का अकादमिक जगत उन लड़कियों के विषय में बातें करने से क्यों डरता है, जो कट्टरपंथी इस्लाम का शिकार हो रही है?

वहीं दूसरी ओर एक और बम विस्फोट का समाचार आया था, परन्तु उसमें कितने लोग मारे गए थे, अभी यह नहीं पता चला है

लोग वहां पर मारी गयी लड़कियों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं! प्रश्न यही है कि इस्लामी कट्टरपंथियों के हाथों मारी जा रही इन लड़कियों के असमय मरते सपनों पर बात क्यों नहीं की जाती है?

भारत में जब लडकियां स्वतंत्र होकर माँ की आराधना में अपने तमाम आभूषणों सहित स्वतंत्रता के साथ गरबा कर रही हैं, बंगाल में वह माँ दुर्गा के पंडालों में जा रही हैं, शेष भारत में उत्सव के विविध रूपों के माध्यम से अपनी सृजनशीलता का परिचय दे रही हैं, उस समय भारत के पड़ोस में अल्पसंख्यक शिया-हजारा समुदाय की लडकियां धमाकों का शिकार हो रही हैं!

उनका कत्ल कौन कर रहा है? उनकी जान इस तरह कौन ले रहा है? क्या हिन्दू या यहूदी उन्हें मार रहे हैं?

वहां पर शिया हजारा समुदाय की महिलाऐं उसी प्रकार से प्रदर्शन कर रही हैं, जैसे ईरान में लडकियां विरोध प्रदर्शन कर रही हैं, फिर भी पश्चिम का मीडिया और पश्चिम का अकादमिक वामपंथी जगत इस बात को लेकर हैरान परेशान है कि दुर्गा पूजा के गरबे में मुस्लिमों का प्रवेश क्यों नहीं है?

मुस्लिमों को हिन्दू धार्मिक त्योहारों में प्रवेश न देने देना, जो किसी भी समुदाय का धार्मिक अधिकार है, वह पश्चिम की मीडिया की दृष्टि में “अल्पसंख्यकों” के प्रति असहिष्णुता है, हिन्दू कट्टर हो रहा है और वहीं अफगानिस्तान में “शिया-हजारा” समुदाय की लड़कियों को बम धमाके में उड़ा देने के लिए उनके पास शब्द नहीं है!

लोग बम विस्फोट से पहले की वहां की तस्वीरें साझा कर रहे हैं

और इन्हीं लड़कियों में से कुछ मांस के लोथड़े बन गए थे, परन्तु विमर्श में क्या है, यह महत्वपूर्ण है! विमर्श में यह है कि हिन्दू अपने ही धार्मिक पर्व में उन्हें नहीं आने दे रहे हैं, जो हिन्दुओं के धार्मिक पर्व को आदर नहीं देते हैं, विमर्श में यह है कि हिन्दू असहिष्णु हैं क्योंकि वह अपने पर्वों का सेक्युलरीकरण नहीं कर रहे हैं!

विमर्श में तहजीब संस्कृति पर हावी हो रही है, जबकि वास्तविकता में और जीवन में यह संस्कृति ही है, जो मानव जीवन को बचाएगी, क्योंकि संस्कृति में वह देवी हैं, वह शक्ति है, जो सृजन करती है, जो शक्ति का विस्तार करती है!